नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। भारत सरकार ने शुक्रवार को ‘गगनयान-2022’ परियोजना को मंजूरी दे दी है। पहले गगनयान में तीन भारतीय सात दिन बिताएंगे। इस मिशन पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस दौरान 120 करोड़ भारतीयों समेत पूरी दुनिया की निगाहें इन अंतरिक्ष यात्रियों पर होगी। क्या आप जानते हैं कि स्पेस में यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की हर गतिविधि पहले से निर्धारित होती है। यहां तक कि वो कब किस रंग का स्पेस सूट पहनेंगे ये भी पहले से ही तय होता है। आइये जानते हैं अंतरिक्ष यात्री स्पेस में कब किस रंग का सूट पहनते हैं।

भारत ने 2022 गगनयान परियोजना के लिए सितंबर-2018 में यात्रियों के लिए तैयार किया गया स्पेेस सूट प्रदर्शित किया था। बेंगलुरु में चल रहे स्पेस एक्सपो में इसका प्रोटोटाइप डिजाइन पेश किया गया था। ये स्पेस सूट नारंगी (ऑरेंज) रंग का है। पहले भी आपने नासा या दूसरी स्पेस एजेंसियों के अंतरिक्ष यात्रियों को ऑरेंज रंग का स्पेस सूट पहने हुए देखा होगा। कभी आपने सोचा है कि आखिर ये स्पेस सूट नीले, पीले, हरे, लाल या किसी अन्य रंग के क्यों नहीं होते। आज हम आपको इन्हीं सवालों का जवाब देंगे।

स्पेस सूट के ऑरेंज होने की बड़ी वजह
स्पेस सूट का रंग ऑरेंज होने के पीछे सबसे बड़ी वजह होती है, इसका दूसरे रंग से ज्यादा विजीबल होना। स्पेस सूट में प्रयोग होने वाला ऑरेज रंग कोई साधारण कलर नहीं होता। इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक, खास तौर पर स्पेस सूट के लिए तैयार किया जाता है। इस रंग के पीछे बड़ी वजह ये है कि इस सूट से अंतरिक्ष यात्रियों को आसानी से देखा जा सकता है। कोई हादसा होने पर भी इस रंग के स्पेस सूट की वजह से अंतरिक्ष यात्रियों को दूर से ही पहचाना जा सकता है। समुद्र में लैंडिंग के दौरान भी इस रंग के स्पेस सूट की बदौलत इन्हें दूर से ही देखा जा सकता है। इस सूट को एडवांस्ड क्रू स्केप सूट (Advanced Crew Escape Suit या ACES) कहा जाता है। इसका अर्थ ये है कि स्पेस क्राफ्ट के टेकऑफ और पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाने के लिए इस सूट का इस्तेेमाल किया जाता है। इसके अलावा यही स्पेेस सूट धरती पर वापस लौटते समय अंतरिक्ष यात्री पहनते हैं।

कब सफेद या नीला सूट पहनते हैं अंतरिक्ष यात्री
स्पेस वॉक के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा सफेद रंग का सूट पहनने के पीछे भी एक खास वजह है। दरअसल, अंतरिक्ष के डार्क बैकग्राउंड में सफेद रंग का सूट साफ तौर पर दिखाई देता है। इसके अलावा यह सूर्य की रोशनी में भी चमकता है। इसी वजह से इसको स्पेस वॉक के दौरान ही पहना जाता है। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के काम में आने वाली कई चीजें होती हैं। इसके अलावा यह स्पेेस सूट अंतरिक्ष में घूम रहे एस्ट्रॉयड से भी बचाता है। सफेद रंग के इस सूट को एक्सट्राव्हीकुलर एक्टीविटी सूट (Extravehicular Activity suit या EVA) कहा जाता है। स्पेकस क्राफ्ट में रहते हुए अंतरिक्ष यात्री अधिकतर नीले रंग की ड्रेस पहनते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि एक स्पेस सूट का वजन बिना किसी सामान के करीब 21 किलो होता है। इसकी कीमत तकरीबन 1,20,00,000 अमेरिकी डॉलर तक हो सकती है।

दूर से ही पहचाना जाता है रंग
दूर से ही पहचाने जाने वाले ऑरेंज स्पेस सूट की तर्ज पर ही सेन फ्रांसिस्को का गोल्डन गेट ब्रिज और जापान का टोक्योे टावर बनाया गया है। ऑरेंज सूट न सिर्फ रेसक्यू के दौरान मदद करता है, बल्कि टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान होने वाले हादसों में भी उनकी मदद करता है। इस सूट में हवा और पानी की सप्लाूई भी की जाती है। इसके अलावा इसमें ही पैराशूट, दवाइयां, संपर्क साधने वाले यंत्र और अंतरक्षि यात्रियों के काम में आने वाली कई अन्य चीजें भी होती हैं। जिस तरह का स्पेस सूट अब अंतरिक्ष यात्री पहनते हैं, उसकी शुरुआत 1994 में हुई थी। हालांकि इसके रंग में कोई बदलाव नहीं किया गया था। तब इसको लॉन्च एंट्री सूट कहा जाता था। इससे पहले अंतरिक्ष यात्री सिल्वर और सफेद रंग का सूट पहनते थे।

अपवाद हैं रूस और चीन
रूस और चीन को स्पेस सूट के रंगों के मामले में कुछ अपवाद स्वरूप देखा जा सकता है। रूसी अंतरिक्ष यात्री खासतौर पर जो सुयोज स्पेस क्राफ्ट से जाते हैं उनका स्पेस सूट सफेद रंग का होता है। उसे सोकुल सूट कहा जाता है। इन यात्रियों को स्पेस वॉक के दौरान जो सूट पहनना होता है, वो ओरलान सूट होता है। इसी तरह से चीन के अंतरिक्ष यात्री भी सफेद रंग का स्पेस सूट पहनते हैं, जिसको फेटियन सूट कहा जाता है। यह रूस के सोकुल सूट की ही तरह होता है।

एक नजर यहां भी
ऑरेंज कलर को हाईली विजीबल माना जाता है। यही वजह है कि आपको कुछ खास तरह के लोगों द्वारा यह रंग पहना हुआ दिखाई दे जाता है। भारत की ही बात करें तो यहां पर एनडीआरएफ की रेस्क्यू टीम भी इसी रंग के कपड़े पहनती है। विमान के अंदर लगा ब्लैक बॉक्स भी ओरेंज रंग का होता है, जिसकी वजह से यह दूर से ही पहचान लिया जाता है। अक्सर निर्माण में लगे कारिगरों को भी इसी रंग की जैकेट पहनने को दी जाती है।

600 लोगों ने करा रखी है अंतरिक्ष यात्रा की बुकिंग
गत 13 दिसंबर को वर्जिन गैलेक्टिक ने पहली टूरिज्म स्पेसशिप को अंतरिक्ष में पहुंचाने में सफलता हासिल की थी। अन्य निजी कंपनियां जैसे ब्लू ओरिजिन और स्पेस एक्स भी मानव स्पेसशिप अभियानों को आने वाले दिनों में भेजने की तैयारी में जुटी हैं। तेजी से उभरते अंतरिक्ष पर्यटन में भारत अपनी बड़ी संभावनाएं देख रहा है। इस बाजार का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि अंतरिक्ष की कक्षा में 90 मिनट की परिक्रमा के लिए वर्जिन सबऑर्बिटल मिशन के तहत प्रति व्यक्ति 1.8 करोड़ रुपये लगते हैं। 600 से अधिक लोगों ने उड़ान से पहले ही रकम जमा कर रखी है।

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Posted By: Amit Singh

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