विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 12, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भारतीय सीमा से भी हो सकता है कैलास मानसरोवर का दर्शन, यहां से नजर आता है पर्वत

By Skand ShuklaEdited By:
Published: Tue, 12 May 2020 07:48 PM (IST)Updated: Wed, 13 May 2020 10:11 AM (IST)

कोरोना के चलते इस बार कैलास मानसरोवर यात्रा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में महादेव ...और पढ़ें

भारतीय सीमा से भी हो सकता है कैलास मानसरोवर का दर्शन, यहां से नजर आता है पर्वत
भारतीय सीमा से भी हो सकता है कैलास मानसरोवर का दर्शन, यहां से नजर आता है पर्वत

पिथौरागढ़, ओपी अवस्थी : कोरोना के चलते इस बार कैलास मानसरोवर यात्रा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में महादेव के भक्तों में इस बार यात्रा न कर पाने का मलाल है। लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं है। अच्छी खबर यह है कि भारतीय सीमा से भी कैलास मानसरोवर के दर्शन संभव है। यह दर्शन लिपूलेख के ओल्ड लिपु से किए जा सकते हैं। इस पर पूरा अध्ययन करने के बाद भारत तिब्बत सीमा पुलिस के डीआइजी एपीएस निंबाडिया ने भारत सरकार को सुझाव भेजा है।

आइटीबीपी के बरेली रेंज के डीआइजी एपीएस निंबाडिया ने शासन को भेजे सुझाव प्रस्ताव में कहा है कि कुमाऊं मंडल विकास निगम कैलास मानसरोवर यात्रा की तर्ज पर ही गाइड और स्थानीय लोगों की मदद से इसे संचालित कर सकती है। हालांकि आइटीबीपी भी इसमें पूरी मदद करेगी।

गाइड की मदद से ही यात्री यहां पहुंच सकते हैं

ओल्ड लिपु के लिए लिपुलेख के यात्री विश्राम गृह से मार्ग जाता है। यह मार्ग लगभग तीन किमी है। साढ़े सत्रह हजार से लेकर 18 हजार फीट की ऊंचाई वाला यह मार्ग काफी दुर्गम है। जिसके लिए निगम के गाइड और स्थानीय गाडड ही यात्रियों को यहां तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने सुझाया है कि यह यात्रा किसी निजी संस्था या टूर संस्थानों के माध्यम से नहीं कराई जाए। ओल्ड लिपु से भक्त कैलास मानसरोवर के दर्शन कर आदि कैलास आ सकते हैं। ऐसे में कैलास मानसरोवर और आदि कैलास की यात्रा एक साथ संभव है। निंबाडिया ने कहा है कि इस पर वह प्रयोग कर चुके हैं।

कैलास दर्शन पर निंबाडिया लिख चुके हैं पुस्तक

आईटीबीपी के डीआइजी एपीएस निंबाडिया लंबे समय तक यहां रहे हैं। दो बार कैलास मानसरोवर की यात्रा कर चुके हैं और कैलास दर्शन पर पुस्तक लिख चुके हैं। सुझाव प्रस्ताव में उन्होंने कठिनाइयों और उसके समाधान दोनों की जानकारियां दी हैं।

सीपू गांव से शिव तपस्थली गुफा व शिव चरणों के होंगे दर्शन

आदि कैलास से सिनला पास होते हुए दारमा घाटी आकर सीपू गांव में शिव के पैरों के निशान हैं। सीपू गांव के निकट गुफा है, जहां स्थानीय मान्यता के अनुसार इस गुफा में भगवान शिव ने पांच हजार वर्ष तक तपस्या की थी। निंबाडिया का कहना है कि यदि निगम अपने गाइडों के माध्यम से 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले मार्ग से दारमा पहुंचा देता है तो पूरे शैव पथ की यात्रा संभव है।

लिपुलेख तक सड़क बनने से सुगम हो चुकी है यात्रा

एपीएस निंबाडिया, डीआइजी, आइटीबीपी बरेली रेंज ने बताया कि लिपुलेख तक सड़क बनने से अब यात्रा काफी सुगम हो चुकी है। यात्री लिपुलेख तक वाहन से पहुंचेंगे। तीन किमी ओल्ड लिपु तक पैदल जाएंगे। लिपुलेख के यात्री पड़ाव तक पहुंचने के बाद वाहन से सीधे आदि कैलास लौटेंगे। यह सब इसी वर्ष के साथ ही भविष्य में भी संचालित की जा सकती है, लेकिन जरूरी है कि यात्रा केएमवीएन कराए और जिला प्रशासन का पूरा सहयोग रहे।

यह भी पढें 

रोज सैकड़ों की भीड़ झेल रहे रोडवेज के ड्राइवर, 34 रुपये में चाय पिए या खाना खाए 

जिम कॉर्बेट के जंगल में मिला था दुनिया का सबसे लंबा किंग कोबरा, लंबाई थी 23 फुट नौ इंच 

पूर्व स्वास्थ मंत्री बेहड़ पर मुकदमा दर्ज होने पर राज बब्बर ने किया ये ट्वीट, पढि‍ए क्‍या कहा 

पिता की तेरवीं में जाने के लि‍ए पत्‍नी और बच्चों संग दस द‍िन से लाइन में मजदूर 

ऊधमसिंहनगर में एक और काेरोना संक्रमित मिला, अपने कुत्ते संग मेडिकल कॉलेज में आइसोलेट  

अमेरिका की कैरोलिना यूनिवर्सिटी चम्पावत की पूजा ने टाॅप किया, एमएससी में म‍िला सर्वोच्‍च स्‍थान  

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।