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    उत्तराखंड में सामने आया इंदौर जैसा मामला, नल के गंदे पानी से बिगड़ी मासूम की तबीयत; मचा हड़कंंप

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 05:00 AM (IST)

    हल्द्वानी के गांधीनगर में पिछले दो माह से गंदे पानी की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। दूषित पानी पीने से कई बच्चे बीमार पड़ गए हैं, जिनमें 14 महीने की बच् ...और पढ़ें

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    शहर के मध्य में स्थित करीब सात हजार की आबादी वाले गांधीनगर के लोगों का हाल बुरा. Concept Photo

    गोविंद बिष्ट, जागरण, हल्द्वानी : इंदौर की घटना से पीने के पानी की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए तो पूरे देश में सुर्खियां बनना शुरू हो गई। मगर हाल कुमाऊं के प्रवेशद्वार कहे जाने वाले हल्द्वानी के गांधीनगर का भी ठीक नहीं है। यहां नलों को खोलने पर गंदगी सीधा घर के अंदर पहुंच रही है। दूषित पानी की वजह से मासूम के बीमार पड़ने पर लोग बगैर उबाले पानी पीने से डरने लगे। कई ने बाजार से बोतलबंद पानी खरीदना शुरू कर दिया। लेकिन बहुत से लोगों की आर्थिक स्थिति इस काबिल भी नहीं। इसलिए नजदीकी नलकूप से पीने का पानी भरना इनका मजबूरी बन चुका है।

    साफ पानी आम लोगों का अधिकार है। मगर इस अधिकार में कहीं कोई 'कटौती' तो नहीं हो रही। यह जानने के लिए जागरण टीम रविवार दोपहर शहर के मध्य में स्थित गांधीनगर क्षेत्र पहुंची। छोटी-छोटी गलियों से गुजरने के दौरान आत-जाते लोगों से पानी की गुणवत्ता को लेकर पूछना शुरू किया तो हर किसी से यही सुनने को मिला कि गंदा पानी आ रहा है। इसके बाद घरों के बाहर और अंदर मौजूद महिलाओं से बातचीत करने पर पता चला कि सुबह-शाम दो वक्त पानी तो आता है लेकिन 'साफ पानी' नहीं।

    महिलाओं का कहना था कि करीब दो माह से गंदे पानी की समस्या को झेल रहे हैं। विमला नाम की महिला ने बताया कि परिवार की 14 महीने की बच्ची राधिका की तबीयत गंदे पानी की वजह से ही बिगड़ी है। डाक्टर की सलाह के आधार पर बोतलबंद या उबला पानी ही अब पीने को देते हैं।

    यही पीड़ा भगवती देवी की भी थी। जिनका नाती भी बीमार है। वहीं, कुछ दूरी पर रहने वाली निर्मला ने बताया कि इंदिरानगर में एक नलकूप है। जहां से परिवार के लोग पीने का भरकर ला रहे हैं। थोड़ा आगे बढ़ने पर कुछ बुजुर्ग महिलाएं आपसी चर्चा में मशगूल नजर आई।

    सवाल करने पर इन्होंने साफ कहा कि फिटकरी-नमक मिला पानी को चूल्हे में उबालने के बाद ही गांधीनगर का पानी पीने लायक है। लापरवाही बरतने पर बीमार पड़ जाएंगे। अब देखना यह है कि इन परेशान लोगों के घरों से महज आधा किमी दूर स्थित अपने दफ्तरों से प्रशासन और जल संस्थान के अधिकारी यहां कब तक पहुंचेंगे?

    लोगों की बातचीत

    नलों से आना वाले पानी बिलकुल भी पीने लायक नहीं है। करीब दो महीने से इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
    विमला देवी

    दीपावली के बाद गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। सुबह-शाम दोनों समय यही हाल है। उसके बाद भी सुनवाई नहीं है।
    मंजू

    हाल यह है कि पीने के लिए दुकानों से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। साफ पानी अधिकार है। व्यवस्था करनी चाहिए।
    प्रद्युम्न

    नल खोलते ही गंदा पानी आने लगता है। कपड़े और अन्य धुलाई में उसका इस्तेमाल कर ले रहे हैं। लेकिन पीने लायक नहीं है।
    कंचन देवी

    बड़ी आबादी से जुड़े इस इलाके में गंदे पानी की समस्या से हर कोई परेशान हो चुका है। लाइन चेक कर दिक्कत दूर होनी चाहिए।
    संजय सोनकर

    नल के पानी को पीने से बीमार होने का डर बना हुआ है। इसलिए पीने के लिए नलकूप से पानी लाकर जैसे-तैसे काम चला रहे हैं।
    निर्मला

    बाजार से बोतलबंद पानी खरीदना हर किसी के लिए संभव नहीं है। इसलिए नल से पानी भरने के बाद उबालकर ही इस्तेमाल करते हैं।
    भगवती

    शिकायत के बाद जल संस्थान की टीम यहां आई थी। चेक करने पर कहीं कोई पेयजल लाइन टूटी नहीं मिली थी। मगर पानी अब भी खराब ही आ रहा है।
    रोहित कुमार, पार्षद

    हाल में गांधीनगर क्षेत्र से गंदे पानी से जुड़ी कोई शिकायत नहीं मिली। अब मामला संज्ञान में आया है। जल संस्थान की टीम को मौके पर भेजा जाएगा।
    आरएस लोशाली, ईई जल संस्थान

    25 दिन पहले की गई थी लाइनों की सफाई : विभाग

    मामले को लेकर गांधीनगर क्षेत्र के जेई भुवन भट्ट का कहना था कि करीब 25 दिन पूर्व लाइनों में सिल्ट पहुंचने की शिकायत मिली थी। जिसके बाद लाइन वाश यानी प्रेशर सिस्टम से तेज रफ्तार में पानी छोड़ शहर के कई इलाकों में लाइन सफाई की गई थी।

    नाले के अंदर गंदगी के बीच से निकली लाइन

    गांधीनगर की गलियों का हाल जानने के बाद मुख्य मार्ग पर पहुंचने पर पानी की मुख्य लाइन नजर आई। जो कि भूमिगत नाली के अंदर से गुजर रही थी। नाली गंदगी और पाइप गुटखे के पीक सनी थी। अगर कभी इस हिस्से में लाइन लीक हुई तो गंदा पानी घरों के अंदर पहुंचेगा।

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