दूषित जल से दशहत में भागीरथपुरा के रहवासी, घर-घर लग रहे आरओ, कैन और उबला पानी बना सहारा
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से 16 मौतों के बाद लोग भयभीत हैं। अब वे नल का पानी इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं, घरों में आरओ लगवा रहे हैं या बाह ...और पढ़ें

भागीरथपुरा क्षेत्र के एक घर में वाटर प्यूरिफायर फिट करता कर्मी।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से 16 लोगों की मौत के बाद इलाके के रहवासी गहरे भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि अब लोग नल का पानी इस्तेमाल करने से कतराने लगे हैं। रोजाना 20 से 25 घरों में आरओ मशीनें लगाई जा रही हैं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह का जोखिम न उठाना पड़े। जिन घरों में आरओ की व्यवस्था नहीं है, वहां लोग बाहर से पानी की कैन मंगवाकर जरूरत पूरी कर रहे हैं।
उबालकर ही इस्तेमाल हो रहा टैंकर का पानी
नगर निगम द्वारा इलाके में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन लोग इस पानी को भी सीधे इस्तेमाल करने से बच रहे हैं। अधिकांश परिवार पानी को कम से कम 15 मिनट तक उबालने और छानने के बाद ही पी रहे हैं। नगर निगम के वाहन लगातार क्षेत्र में घूमकर लोगों को पानी उबालने और सुरक्षित तरीके से उपयोग करने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
अग्रवाल समाज ने रहवासियों को बांटा स्वच्छ जल
उधर, दूषित जल संकट के बीच जब नगर निगम शुद्ध पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं कर पा रहा, तब सामाजिक संगठनों ने आगे बढ़कर मदद का हाथ बढ़ाया है। अग्रवाल समाज ने शनिवार को भागीरथपुरा के प्रभावित परिवारों को 20-20 लीटर के 500 पानी के जार वितरित किए। इसके साथ ही दो टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ आरओ जल भी लोगों तक पहुंचाया गया।
अग्रवाल महासभा के प्रमुख संयोजक राजेश बंसल ने बताया कि आगे भी हर बार 20 हजार लीटर आरओ का शुद्ध जल वितरित किया जाएगा, ताकि जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सके।
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पुरानी पाइपलाइन अब भी बड़ी समस्या
भागीरथपुरा के अधिकांश इलाकों में अब भी पुरानी जलापूर्ति लाइन से ही पानी की सप्लाई हो रही है। नगर निगम द्वारा दो चरणों में नई पाइपलाइन बिछाने का काम किया जा रहा है, जिसका करीब 60 प्रतिशत कार्य पूरा होने का दावा किया गया है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमेंट की सड़कों को खोदकर नई लाइन डालने के दौरान पुरानी पाइपलाइन टूट रही है, जिससे दूषित पानी की समस्या और बढ़ रही है।

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