Cyber Fraud: साइबर ठग फिर कर रहे वार, लेकिन इस बार तरीके पुराने; नए शिकार
देहरादून में साइबर अपराधी पुराने तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। नए साल में तीन मामलों में ₹2.67 करोड़ की ठगी हुई। इनमें डिजिटल अरेस्ट और निवेश ...और पढ़ें

घिसे-पिटे हथकंड़ों से भी साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं साइबर अपराधी। प्रतीकात्मक
सोबन सिंह गुसांई, देहरादून। डिजिटल युग में जहां एक ओर तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है वहीं साइबर अपराधियों ने इसी तकनीक को हथियार बना दिया है। हैरानी की बात यह है कि साइबर ठग आज भी पुराने तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैँ, फिर भी हर दिन नए शिकार उनके जाल में फंस रहे हैं। पुलिस की ओर से चलाए जागरूकता अभियान व समाचारपत्रों में प्रतिदिन खबरें प्रकाशित होने के बावजूद भी साइबर ठगी की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है।
नववर्ष के पहले दिन ही साइबर ठगी के तीन मामले सामने आए हैं। साइबर ठगों ने उत्तराखंड के तीन व्यक्तियों से 2.67 करोड़ रुपये की साइबर ठगी कर दी। साइबर ठगों का ठगी करने का तरीका पुराना था, लेकिन इसके बाद भी ठग करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने में कामयाब हो गए। इनमें से एक डिजिटल अरेस्ट जब कि दो मामले में निवेश के नाम पर ठगी के हैँ। तीनों मामलों में साइबर ठगी की शुरुआत अज्ञात नंबर से काल करके हुई, जिसके बाद ठगों ने उनकी जिंदगी भर की कमाई लूट ली।
15 दिन तक ठगते रहे, फिर भी नहीं हुआ आभासा
तपोवन रायपुर निवासी राजकुमार को ठगों ने 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा, लेकिन फिर भी उन्हें ठगी का एहसास नहीं हुआ। आरोपितों ने खुद को सीबीआइ पुलिस आफिसर इंचार्ज संदीप राव व इन्वेस्टिगेशन आफिसर शिवा सुब्रमणि, साइबर क्राइम डिपार्टमेंट मुंबई बताया। व्हा
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ट्सएप पर फर्जी एफआइआर की कापी और मनी लाड्रिंग से जुड़े दस्तावेज भेजे। यह भी दावा किया कि नरेश गोयल के घर से बरामद 200 डेबिट कार्ड में एक कार्ड उनका है, जिससे दो करोड़ का लेनदेन हुआ और 20 लाख रुपये कमीशन उन्हें मिला है। इतना सब होने के बाद भी उन्होंने घटना के बारे में किसी से जिक्र नहीं किया, यदि घटना के बारे में वह किसी को जानकारी देते तो शायद ठगी की घटना से बच सकते थे
पुण्य कमाने आए, लेकिन दूर नहीं हुआ लालच
विदेश में रहकर इंजीनियर आदित्य कुमार ने काफी पैसा कमाया और इसके बाद उनके दिल में पुण्य कमाने की बात जागी। वह शांतिकुंज हरिद्वार पहुंचे, लेकिन फिर भी लालच दूर नहीं हुआ और लालच में आकर उन्होंने 90.78 लाख रुपये गंवा दिए। ठगों ने उन्हें 200 रुपये मुनाफे के छोटे से लालच में फंसाया और इसके बाद उन्हें मोटा मुनाफा का झांसा देते हुए उनसे लाखों रुपये की ठगी कर दी। निवेश के नाम पर ठग उनसे रकम जमा करवाते रहे और वह ठगों के जाल में फंसते रहे।
साइबर ठगी से ऐसे बचें
- डराने या जल्दी करने वाला काल आए तो तुरंत काट दें और खुद बैंक या संबंधित संस्था को काल करें।
- पैसा डबल या गारंटीड रिटर्न जैसी बातों से दूर रहें, यह लगभग हमेशा ठगी होती है।
- किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, खासकर जो इनाम, रिफंड या शिकायत के नाम पर आए हों।
- अगर गलती हो जाए तो शर्म न करें तुरंत 1930 पर काल करें और बैंक को सूचना दें।
- बच्चों और बुजुर्गों को पहले से ही ऐसे फ्राड के बारे में समझाकर रखें।
लालच में आकर लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। कोई भी ऐसी कंपनी नहीं होती जोकि 25 से 30 प्रतिशत गारंटी का मुनाफा दे। अज्ञात नंबर से फोन कर कोई निवेश की बात करता है तो आनलाइन निवेश करने से बचें। किसी भी तरह से ठगी का एहसास होने पर तत्काल इसकी सूचना 1930, नजदीकी थाने या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दें।
- नवनीत भुल्लर, एसएसपी एसटीएफ

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