कानपुर में साइबर ठगों का गढ़ बना रहे थे आरिफ और अल हुमैद, 2.5 करोड़ की ठगी
कानपुर में चकेरी के एक कारोबारी से हनीट्रैप के जरिए 2.5 करोड़ रुपये ठगने वाले कंबोडियाई गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। आरिफ और अल हुमैद ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
जागरण संवाददाता, कानपुर। चकेरी के कारोबारी को हनीट्रैप में फंसा 2.5 करोड़ ठगने वाले कंबोडिया के गिरोह से जुड़े सात ठगों में आरिफ व अल हुमैद शहर को साइबर ठगों का गढ़ बना रहे थे। इसी गिरोह ने तेलंगाना, गुजरात, छत्तीसगढ़ समेत आठ से ज्यादा राज्यों के जिलों में भी ठगी की थी। आरिफ शहर में लोगों से पहले दोस्ती कर उन पर रुपये खर्च करता।
फिर उन्हें घर बैठे कमाई का जरिया बता उनके खातों की जानकारी लेकर ठगी की रकम ट्रांसफर करा देते थे। ऐसे वह ज्यादातर बाबूपुरवा, जाजमऊ, चमनगंज, बेकनगंज समेत कई क्षेत्रों में अपनी ठगी की जड़े मजबूत करने में जुटा था। साइबर टीम ने सातों को जेल भेज दिया।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी सतीश चंद्र यादव ने बताया कि पकड़े गए ठगों में जाजमऊ के न्यू अंबेडकर नगर निवासी मो. आरिफ, बाबूपुरवा के ओसामा, मो. यूसुफ, मो. सावेज, मो. फैज अनवर अंसारी व प्रयागराज के करौली जीबीटी नगर कालोनी के अल हुमैद को गिरफ्तार किया गया था। ये गिरोह कंबोडिया के साइबर ठगों के गिरोह को ठगी की रकम ट्रांसफर कराने के लिए खाते उपलब्ध कराते और रकम को क्रिप्टो में बदलकर कंबोडिया और चीन में यूहोम के जरिए भेजता था।
इसमें सरगना आरिफ और उसके साथी अल हुमैद शहर और प्रयागराज में गिरोह संचालित कर रहे थे। आरिफ और ओसामा लोगों से पहले दोस्ती करते थे और उनके साथ बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में पार्टी करते थे। महंगे कपड़े, जूते खरीदते और उन दोस्तों को भी अपनी तरफ से दिलवाते थे। इसके कुछ दिन बाद आरिफ उन्हें कमाई के उपाये बताते थे।
उनके बैंक खाते खुलवाते और फिर उन्हें ठगी की रकम मंगवाने पर चार से आठ प्रतिशत रुपये कमीशन मिलने का लालच देते थे। घर बैठे कमाई के लालच में उनके जाल में फंस जाते थे। यही नहीं इस चेन को आरिफ आगे बढ़ाता था और उन्हीं लोगों से अन्य लोगों को शामिल कर उनसे खाते उपलब्ध कराता था, जिससे ज्यादा से ज्यादा बैंक खाते वह कंबोडिया भेज सके और ठगी की रकम मंगवा सकते।
इसके लिए आरिफ को कंबोडिया का गिरोह 20 प्रतिशत तक कमीशन देता था। यही नहीं आरिफ अल हुमैद से ठगी की रकम को यूएसडीटी में बढ़े दामों पर बदलवा देता था। इसके बाद क्रिप्टो करंसी में बदलकर यूहोम के जरिए कंबोडिया और चीन, इंडोनेशिया समेत देश में भेजता था। इस गिरोह ने कारोबारी से ठगी की रकम तीन लेयर में 96 बैंक खातों में ट्रांसफर की थी। टीम उन बैंकों की जांच भी कर रही है।
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ठगों के गिरोह ने इस तरह से की थी कारोबारी से ठगी
चकेरी के सफीपुर प्रथम निवासी कारोबारी राहुल केसरवानी ने 17 दिसंबर को साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उनके अनुसार, मई में उनके पास फेसबुक पर एक युवती की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, जिसे स्वीकार किया था। इसके बाद मोबाइल लेकर युवती वाट्सएप पर चैट करने लगी और कुछ दिन बाद उसने शेयर मार्केट में निवेश करने पर ज्यादा लाभांश मिलने का लालच दिया।
10 लाख रुपये बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जिस एप के जरिए निवेश करना था। उस पर 26 लाख दिखाने लगा, फिर युवती ने 50 लाख निवेश करने को कहा। मना करने पर युवती ने दोस्ती का हवाला देकर अपनी तरफ से 50 लाख निवेश करने की बात कही।
इसमें एप पर एक करोड़ से ज्यादा रुपये दिखने लगे। इसके बाद युवती का पिता बन एक व्यक्ति ने खुद को कर्नल बताते हुए बेटी को जाल में फंसाने की बात कह पुलिस आयुक्त को अपना दोस्त बताया और जेल भिजवाने की धमकी देकर छह माह में 2.40 करोड़ रुपये ठगे थे।

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