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    UP में बाढ़, अभी भी कई गांव गंगा-यमुना की चपेट में, किशोर डूबा, मकान नदी में समा रहे

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 10:10 PM (IST)

    Uttar Pradesh Flood उत्तर प्रदेश में गंगा-यमुना का जलस्तर कम होने के बावजूद कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। फर्रुखाबाद में किशोर की डूबकर मौत हुई और नाव पलटने से छात्र-छात्राएं पानी में गिरे जिन्हें ग्रामीणों ने बचाया। गंगा कटान से कई मकान बह गए। चित्रकूट में युवक के कूदने की आशंका महोबा में फसल बर्बाद होने से किसान ने जान दे दी।

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    गांव बल्लू बेहटा में हो रहा कटान देखते ग्रामीण। जागरण

    जागरण टीम, कानपुर। उत्तर प्रदेश में बाढ़ लोगों को दर्द दे रही है। गंगा व यमुना का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। लेकिन अभी भी कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। फर्रुखाबाद, उन्नाव, कन्नौज, फतेहपुर, चित्रकूट में तटवर्ती तटवर्ती गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। फर्रुखाबाद में नहाते समय डूबने से एक किशोर की मौत हो गई। छात्र-छात्राओं व यात्रियों को लेकर आ रही नाव अचानक पलट गई। गंगा के कटान में कई मकान समा गए। चित्रकूट के राजापुर यमुना पुल से युवक के छलांग लगाने की आशंका है।

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    Banda Flood

    पैलानी में केन नदी के जलस्तर से डूबे पेड़-पौधे। जागरण

    बांदा में नदियों का घट रहा जलस्तर

    केन व यमुना नदी का जलस्तर कम हो रहा है। गुरुवार को केन नदी का जलस्तर 97.74 मीटर पर आ गया। इसी तरह यमुना का जलस्तर 96.74 मीटर पर पहुंच गया। यह जलस्तर गुरुवार से करीब एक मीटर कम हुआ है। पैलानी क्षेत्र के पांच में से तीन जलमग्न रपटों के खुलने से लोगों को कई दिन से आवागमन में हो रही दिक्कत से राहत मिली है। नदियों का जलस्तर कम होने से पलरा-नरी, गौरीकला-गडरिया, मरझा-पडे़री मार्ग पर स्थित रपटे खुल गये। जिससे आवागमन बहाल हो गया। वहीं अभी गौरी-अमारा, संपर्क मार्ग पर बने रपटा पर चंद्रावल नदी के बाढ़ का पानी अभी भी बरकरार है, वहां नाव से संचालन हो रहा है। सिंधनकला-तुर्री नाला पडो़हरा-नांदादेव मार्ग पर बने रपटे जलमग्न हैं। इनमें नावों का संचालन बिना लाइफ सपोर्ट जैकेट के हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी यहां नहीं पहुंच रहीं हैं। तहसीलदार पैलानी राधेश्याम सिंह ने बताया कि केन नदी और यमुना नदी का जलस्तर घट रहा है। ज्यादातर रपटे खुल गये हैं।

    मकान ढह गया

    इधर, बांदा के पैलानी तहसील के खप्टिहा कलां निवासी मंजीरा वादक छोटकू, बड़कू प्रजापति का कच्चा मकान नाले के पानी के कारण गुरुवार को ढह गया। स्वजन बाल-बाल बच गए। घर में रखी गृहस्थी का सामान मलबे में दबने से बर्बाद हो गया। छोटकू व बड़कू प्रजापति ने बताया कि वह कई बार ग्राम प्रधान से टूटे नाले की मरम्मत करवाने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। छोटकू व बड़कू लोक गायन, भजन कीर्तन में मंजीरा बजाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। मकान ढहने से वह बेघर हो गये हैं। प्रशासन से आर्थिक मदद की मांग की है। तहसीलदार पैलानी राधेश्याम सिंह ने बताया कि लेखपाल को भेज कर रिपोर्ट मंगाई जाएगी। वही ग्राम प्रधान मैना देवी निषाद ने बताया कि बरसात के चलते नाले का निर्माण नहीं हो पाया। बारिश के बाद नाला निर्माण कराया जाएगा।

    Auriya Flood

    पानी कम होने के बाद गोहानी कलां संपर्क मार्ग से आता बाइक सवार। जागरण

    औरैया में बाढ़ का पानी गोहानी कलां संपर्क मार्ग से हुआ कम

    यमुना का जलस्तर लगातार कम हो रहा है और शुक्रवार शाम छह बजे 109.03 मीटर पहुंच गया। लगातार घट रहे जल स्तर के चलते लोगों को राहत मिली है। इटावा-औरैया के संपर्क मार्ग पूरी तरह से खुल गया है। गोहानी कलां मार्ग से पानी चला गया है और आवागमन शुरू हो गया है। सिकरोड़ी गांव के श्मशान घाट से भी पानी कम हो चुका है। धीरे-धीरे लोगों की जिंदगी पटरी पर लौटना शुरू हो गई है।

    कानपुर देहात में आढ़न पथार मार्ग पर नाव से आवागमन

    यमुना नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है जिसके चलते आढ़न पथार मार्ग छोड़कर सभी रास्ते खुल गए हैं। पड़ाव जाने वाली सड़क पर भी आवागमन शुरू हो गया और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। शुक्रवार को सुबह पड़ाव जाने वाला मार्ग भी खाली हो गया है जिसके चलते पड़ाव, कुम्भापुर, रसूलपुर चतुरीपुरवा, सिहारी व लबरसी के लिए आना-जाना शुरू हो गया है। वहीं आढ़न पथार मार्ग पर अभी भी पानी भरा हुआ है नाव से लोग आ जा रहे हैं।

    Farrukhabad Flood

    बाढ़ के पानी से छात्रों की साइकिलें निकालते लोग। वीडियो ग्रैब

    फर्रुखाबाद में नाव पलटने से कई छात्र व यात्री पानी में गिरे

    गांव बिरिया डाड़ा से कुआंखेड़ा वजीर आलम जाने वाला मार्ग बाढ़ के पानी से गांव कासिमपुर तराई के पास कट गया है। इस संपर्क मार्ग पर 12 गांव के ग्रामीणों का आना-जाना है। यहां एक समाजसेवी ने ग्रामीणों के आवागमन के लिए दो छोटी नाव उपलब्ध कराई हैं। शुक्रवार सुबह गांव गढ़िया के छात्र अनुज कुमार, अनिकेत, ऋषभ, अंकलेश, आकाश व कांति गांव से साइकिल से कासिमपुर तराई के पास कटी सड़क पर पहुंचे। वहां से नाव में अपनी साइकिल रखकर बाढ़ का पानी पार कर रहे थे। नाव में अन्य लोग भी सवार थे। तेज धार से निकलने के बाद नाव किनारे पहुंची तभी पलट गई। जिससे नाव पर सवार सभी लोग बाढ़ के पानी में गिर गए। वहीं दूसरी तरफ खड़े ग्रामीणों ने पानी में कूदकर छात्रों तथा यात्रियों को बाहर निकाला। छात्रों की कापी किताबें पानी में गिर जाने से खराब हो गईं। ग्रामीणों ने छात्रों की साइकिलें भी बाहर निकालीं।

    Farrukhabad Flood

    गांव पंखियन की मड़ैया में बाढ़ के पानी में गिर रही मकान की दीवार। जागरण

    इधर, पंखियन की मड़ैया में छह मकान व एक झोपड़ी गंगा में समाई

    बाढ़ का प्रकोप कम न होने से कटरी क्षेत्र के ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। कटान से परेशान गांव पंखियन की मड़ैया कटरी धर्मपुर में रह रहे लोगों ने महिलाओं व बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी कर ली है। हालांकि आधे से अधिक परिवार पहले से ही बाढ़ शरणालय में रह रहे हैं। शुक्रवार को देखते ही देखते छह मकान गंगा में समा गए व एक झोपड़ी बह गई। गांव में अब तक 34 मकान गंगा में कट चुके हैं। ग्रामीण अब दिन भर बाढ़ का आंकलन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दोपहर तक गंगा में पानी बढ़ा है।

    34 मकान व कई झोपड़ियां बह गईं 15 दिन में

    तहसील सदर के गांव पंखियन की मड़ैया में पिछले 15 दिन से कटान चल रहा है। जिसमें मकान गिर रहे हैं व झोपड़ियां बह रही हैं। गांव के आधे से अधिक परिवार पहले से ही शहर के मुहल्ला सलावत खां स्थित रहमानी स्कूल में बने शरणालय में रह रहे हैं। जो परिवार गांव में बचे हैं वह भी अब बच्चों व महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर भेजने लगे हैं। ग्राम प्रधान शहनाज के पति शाहिद अली ने बताया कि शुक्रवार को देखते ही देखते सलमान, इब्बन, गुलफाम, अकील, सहलान, ईमान खां के मकान कट गए जबकि जुलफाम की झोपड़ी गंगा में बह गई। अब तक गांव के 34 मकान व कई झोपड़ियां बह चुकी हैं। अब पूरे गांव में पानी है, कई और मकान कटान की जद में आ गए हैं। कटान की आशंका वाले मकानों को खाली कर दिया है, उनके खिड़की दरवाजे उखाड़ लिए गए हैं। प्रधान पति ने दावा किया कि कई दिनों से गंगा स्थिर थीं, लेकिन रात से ही पानी बढ़ना शुरू हुआ था। दोपहर तक पानी बढ़ता रहा।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के गांव में बुखार से पीड़ित किशोर की मौत

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के गांव में किशोर की बुखार से मौत हो गई। कंपिल थाना क्षेत्र के गांव वैभलपुर में बाढ़ का पानी भरा है। गांव के हरिश्चचंद्र राठौर का 12 वर्षीय पुत्र गौरव राठौर को 25 अगस्त से बुखार आ रहा था। स्वजन ने गौरव को कायमगंज में एक चिकित्सक से परामर्श लिया। उसके बाद स्वजन गौरव को घर ले गए। गांव में बाढ़ का पानी भरा होने से वह अस्पताल नहीं जा सके। शुक्रवार दोपहर को हरिश्चंद्र अपने भाई रामलखन आदि लोगों के साथ गौरव को लेकर लोहिया अस्पताल के आकस्मिक विभाग पहुंचे। यहां पर डा. उदयराज ने गौरव का उपचार किया। इलाज के दौरान गौरव की मौत हो गई। वहीं, थाना क्षेत्र के गांव आजाद नगर भटपुरा निवासी गोताखोर नसीम का 16 वर्षीय पुत्र वसीम शुक्रवार करीब 11 बजे गांव के ही नदीम, चांद बाबू, तहसीन आदि 10-12 दोस्तों के साथ निमार्णाधीन सेतु पहुंच मार्ग पर कटी पुलिया के पास गंगा नहाने गया था। इस दौरान वसीम करीब 20 फीट गहराई में चला गया और देखते ही देखते गंगा की गहराई में समा गया।

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    उरई में उतरे पानी के बाद भोजन-चारा का संकट

    कुसेपुरा की मोहनी, कुसुम, जमुनिया कच्चे चबूतरे से लेकर घर के आंगन को लीपने, माटी को हटाने के साथ बिखरी गृहस्थी को संवारने में जुट गई हैं। अभी 20 दिन पहले आई बाढ़ में उन्हें सही करने में छह दिन लगे थे कि दोबारा से फिर आई इस मुसीबत ने उन्हें तोड़ कर रख दिया। इन्हें टूटे घरौंदों को संवारने की चिंता तो है ही साथ में पेट पालने को लेकर भीग चुके अनाज, खराब हो चुके गृहस्थी के सामान को सुरक्षित कैसे करें यह भी परेशानी का बड़ा कारण है। पहली बार तो प्रशासन से मदद मिली थी लेकिन दोबारा से अभी कोई पूछने नहीं आया है। इस समस्या से केवल कालपी ही नहीं बल्कि रामपुरा क्षेत्र के साथ महेवा, कदौरा आदि से जुड़े करीब 80 गांवों के लोग पीड़ित हैं। तीन दिन पहले यमुना, बेतवा, पहुज, सिंध नदी का पानी तो उतर चुका है लेकिन गांव जाने वाले रास्ते अभी भी कीचड़ से भरे हैं।

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    महोबा में किसान ने दी जान

    अतिवृष्टि से फसल बर्बाद होने व कर्ज के बोझ तले दबे किसान ने पहाड़ में लगे पेड़ से फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। थाना चरखारी के ग्राम छेदीमऊ निवासी 25 वर्षीय कमलेश यादव ने पहाड़ पर जाकर यहां लगे पेड़ से तौलिया का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। दिवंगत के भाई कालका ने बताया कि उसके भाई के पास केवल एक बीघा जमीन थी और वह खेती के साथ ही मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करता था। इसके साथ ही वह जमीन बटाई पर लेकर भी खेती करता था। लेकिन इस साल हुई अधिक बारिश के कारण उसकी पूरी फसल नष्ट हो गई। उसने मूंगफली, उर्द, मूंग आदि की बोआई कराई थी। उसके ऊपर स्वयं सहायता समूह का पचास हजार व साहूकारों का करीब एक लाख का कर्ज था। वह इसे लेकर परेशान रहता था।

    उन्नाव में चेतावनी से ऊपर बह रही गंगा

    खतरे के निशान से नीचे आने के बाद गंगा नदी अभी भी चेतावनी बिंदु से करीब 56 सेमी. ऊपर 112.560 मीटर पर बह रही है। शुक्रवार को मारौंदा से पनपथा, परियर से माना बंगला, मक्का पुरवा से टपरा, महानंद पुरवा बेनी पुरवा मार्ग में भरा बाढ़ का पानी निकल गया है। जिससे यहां के निवासियों का आवागमन सुगम हो गया है। वहीं माना बंगला से बाबू बंगला, टपरा व बसधना मार्ग में अभी भी बाढ़ का पानी भरा होने से यहां के लोगों को आने जानें में कठिनाई हो रही है। बाढ़ प्रभावित गांव में गंदगी के चलते मच्छर के प्रकोप से बढ़ गया है।

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