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    AI से बना हैकर, फर्जी रायल्टी से किया करोड़ों का घोटाला, यूं राजफाश

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 04:23 PM (IST)

    महोबा में हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस कोर्स को किया। इसके बाद उसने फर्जी रायल्टी से करोड़ों का घोटाला कर दिया। यह सब उसने आधुनिक तकनीक के साथ क्रशर कर्मियों की मिलीभगत से किया। करीब डेढ़ साल से उसका यह खेल चल रहा था। पुलिस ने मुख्य आरोपित सहित तीन को पकड़ा है।

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    फर्जी रायल्टी से करोड़ों का घोटाला कर दिया।

    जागरण संवाददाता, महोबा। पत्थर मंडी कबरई में हुए करोड़ों की फर्जी रायल्टी खेल में आधुनिक तकनीक को हथियार बनाया गया। इस खेल के मुख्य आरोपित विजय सैनी ने पहले एआइ का कोर्स किया और क्यूआर कोड से बेवसाइट हैक करना भी सीखा। उसने खनिज विभाग की फर्जी वेबसाइट बनाई और फर्जी रायल्टी के घोटाले को अंजाम दिया। क्रशर कर्मियों ने भी इसमें पूरा साथ दिया।

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    शिकायत की जांच के बाद मुख्य आरोपित सहित तीन लोग पकड़े। उनके पास से 1532 फर्जी रायल्टी, 1206 बिना प्रिंटेड सिक्योरिटी पेपर, लैपटाप आदि बरामद किया गया है। इनके छह साथी अभी फरार चल रहे है। एसपी प्रबल प्रताप सिंह कहते है इसकी अभी जांच चल रही है।

    मुख्य आरोपित विजय सैनी निवासी ग्राम सुरहा कबरई हाल मुकाम विशाल नगर कबरई क्रशर मुनीमों को 10-20 हजार का लालच देता था और उनसे पट्टा संबंधी एमएम-11 प्रपत्र प्राप्त कर लेता था। इनका उपयोग वह फर्जी रायल्टी बनाने में करता था। पुलिस के मुताबिक आरोपित विजय ने पहले एआइ का कोर्स किया और क्यूआर कोड हैक करने व फर्जी वेबसाइट की तकनीकी सीखी।

    खनिज विभाग की अधिकृत वेबसाइट upmines.updsc.gov.in के नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट https://www.upmines-upsdc.gov.ink बनाकर अवैध ई-ट्रांसिट पास जारी किए। यह खेल करीब डेढ़ साल से चल रहा था। खेल में आसानी ऐसे हुई कि मुनीमों व क्रशर कर्मियों के पास आइडी पासवर्ड होता था और विजय खनिज विभाग की वेबसाइट से मिलती जुलती रायल्टी बना लेता था।

    इसके बाद एआइ के माध्यम से देखता था कि कौन सी रायल्टी सरकारी कार्यदायी संस्थाओं ने उपयोग नहीं की। उसी से मिलती जुलती रायल्टी बनाकर कार्यदायी संस्था को देता था और प्रति रायल्टी 1500-2000 का भुगतान हो जाता था। जो वास्तविक एमएम-11 रायल्टी प्रपत्र होता है उसमें क्रशर स्वामी का कोड होता है। इसे जनरेट करने में ओटीपी मालिक के पास पहुंचती है। लेकिन नकली रायल्टी में ये लोग उस कोड को अलग कर देते थे, जो आसानी से पकड़ में नहीं आता था। वाहन की दूरी और फर्जी नंबर के आधार पर भी रायल्टी बनाई जाती थी। इस तरह आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर विजय सैनी ने इस खेल को अंजाम दिया।

    ऐसे खुला मामला

    शहर के मुहल्ला बजरंग चौक गांधीनगर निवासी रामकिशोर सिंह ने बताया था कि उनके साथ ही पुत्र शिवम व पत्नी के नाम भी पट्टे है। सभी पट्टों के सिक्योरिटी पेपर प्रपत्र-सी जैसे कागजात शिवम ग्रेनाइट अलीपुरा थाना कबरई से संचालित होते है। जिनका पूरा लेखाजोखा व सभी प्रपत्र कर्मचारी बिंदादीन उर्फ बिंदा कुशवाहा के पास रहते है। वह पिछले चार सालों से सिक्योरिटी पेपर मंगाना व रायल्टी जनरेट करना आदि कार्य करता है और पट्टों का हिसाब रखता है। पेपर कम होने पर पता चला कि बिंदादीन ने पट्टों के कुछ सिक्योरिटी पेपरों के कुछ बंडल संदिग्धों को दे दिए। बताया कि सिक्योरिटी पेपर विजय सैनी को दिए, जिसका का एक बड़ा गिरोह है। इसके पहले खनिज विभाग ने शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। इनकी जांच हुई और पूरा खेल खुल गया।

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    गैंग के सदस्य पट्टाधारकों के आईडी-पासवर्ड व सिक्योरिटी पेपर की साठ-गांठ कर साइट से बार कोड स्कैन लिंक ले लेते थे। उसमें छेड़छाड़ कर फर्जी रॉयल्टी तैयार करते थे। यह फर्जी प्रपत्र कार्यदायी संस्थाओं में बिल भुगतान के लिए प्रयोग हो रहे थे। शासन को राजस्व की क्षति पहुंचाई जा रही थी। तीन आरोपितों को पकड़ा गया है। शेष की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है। एआइ तकनीकी का इसमें प्रयोग किया गया।

    - प्रबल प्रताप सिंह, पुलिस अधीक्षक महोबा।

    पूरे मामले से खनिज निदेशालय लखनऊ को अवगत करा दिया गया है। आगे से लोग फर्जीवाड़ा न कर सके इस दिशा में शासन से पहल की जाएगी। जो भी दिशा निर्देश दिए जाएंगे उनका पालन कराया जाएगा।

    - आरबी सिंह, जिला खनिज अधिकारी।