प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, बीमा कंपनी ने किया 40 करोड़ का भुगतान
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहा दावा खुद किसानों ने किया था। किसानों की शिकायत के बाद डीएम ने तहसील स्तर पर टीमें गठित की। इसके बाद सामने आया कि इफको टोकियो कंपनी ने बीमा का करोड़ों का भुगतान कर दिया है।

जागरण संवाददाता, महोबा। महोबा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। योजना के तहत करीब 40 करोड़ से अधिक का फर्जी भुगतान कर दिया गया। यह दावा खुद किसानों ने किया है। खास बात है कि उन किसानों का बीमा हो गया जो बाहरी जनपदों से है और महोबा से उनका कोई सरोकार ही नहीं है। किसानों की शिकायत पर डीएम ने तहसील स्तर पर टीमें गठित की तो सामने आया कि बिना सत्यापन किए ही इफको टोकियो कंपनी ने बीमा का करोड़ों का भुगतान कर दिया।
इस पूरे खेल में बटाईनामे का अहम किरदार सामने आया है। वहीं ग्राम थुरट में मृत व्यक्ति के नाम भी बीमा हो गया। हालांकि उपकृषि निदेशक ने इफको टोकियो के प्रबंधक पर मुकदमा दर्ज कराया है। लेकिन यदि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हुई तो कईयों पर और गाज गिर सकती है।
जय जवान जय किसान एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गुलाब सिंह सहित अन्य किसानों ने दावा किया था कि बीमा माफियाओं ने 2024 खरीफ में चरखारी तहसील के ग्राम सिमरिया, पुरवा जैतपुर, इंदौरा, कर्रीजरीद में क्षेत्रफल से अधिक किसानों का बीमा करा दिया। बीमा कंपनी से सांठगांठ करके तीन करोड़ से अधिक का भुगतान हो गया। इसी तरह तहसील कुलपहाड़ के ग्राम भटेवरकला, लुहारी व संतोषपुरा में भी ऐसा ही हुआ और 2 करोड़ 80 लाख का भुगतान करा लिया गया। 2025 में ग्राम के क्षेत्र से तीन गुना अधिक का बीमा करा लिया गया। मुरानी गांव में 42 लोगों का भुगतान 49 लाख रुपये कर दिया गया।
गांव के किसानों का कहना है कि उन्हें बीमा मिला ही नहीं। करीब 10 करोड़ का जिले में भुगतान हो गया। दावा किया कि जिले में 40 करोड़ से अधिक भुगतान हुआ और महोबा में जूनागढ़, उरई, पारीक्षा व बांदा सहित अन्य जनपदों के किसानों ने बीमा करा लिया। उधर अजनर के ग्राम थुरट निवासी अभिषेक सिंह ने उच्चाधिकारियों को भेजे पत्र में बताया कि उसके दादा अतिरूप सिंह विभिन्न गांटा संख्या में स्थित भूमि के मालिक थे। लेकिन उनका निधन हो चुका है। जमीन की अभी पिता के नाम वरासत भी नहीं हुई है। लेकिन इस जमीन का गांव के ही कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करा लिया। डीएम गजल भारद्वाज ने इसकी जांच के लिए टीमें गठित की।
उपकृषि निदेशक रामसजीवन ने बताया कि जांच समिति ने कुलपहाड़ व चरखारी तहसील की जांच आख्या जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की। इसमें किसानों के डाटा बिना सत्यापन किए क्लेम का भुगतान कर दिया गया। मामले में निखिल चतुर्वेदी जिला प्रबंधक इफको टोकियो पर मुकदमा दर्ज हुआ है। किसानों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, यदि ऐसा हुआ तो कई और पर गाज गिर सकती है। इफको टोकियो के जिला प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी को तीन बार फोन लगाया गया पर रिसीव नहीं हुआ।
बटाईनामा के जरिए ऐसे हुआ खेल
पूरे खेल में फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों ने बीमा कंपनी से सांठगांठ कर ऐसे गांवों को चुना जिसमें चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। बीमा करने के लिए पोर्टल पर भू-स्वामी व बटाईदार अपना बीमा करा सकता है। चकबंदी प्रक्रिया वाले गांवों का डाटा प्रदर्शित नहीं होता। जिससे कोई भी 10 रुपये के स्टांप में बटाईनामा बनवाकर किसी की भी जमीन से बीमा करा सकता है। इसमें वह जो जानकारी भर देता है वह सही मानी जाती है। खाली स्टांप भी इसमें लगाया जा सकता है। उसी के कागजातों के आधार पर बीमा होता है। इसकी जांच बीमा कंपनी ही करती है। इसके बाद फर्जीवाड़ा कर रहा व्यक्ति टोल फ्री नंबर पर फोन कर नुकसान की जानकारी देता है। इसकी जांच भी बीमा कंपनी करती है और क्लेम पास कर भुगतान कर देती है। जाहिर है कि कहीं न कहीं बीमा कंपनी के लोग भी शामिल है। किसी भी मामले का सत्यापन नहीं कराया गया। यदि सत्यापन कराया जाता तो शायद फर्जी भुगतान होने से बच जाता।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जांच अभी चल रही है। तहसील स्तर पर टीमें गठित है। जिला प्रबंधक पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। जो आगे दोषी पाया जाएगा। कार्रवाई कराई जाएगी।
- रामसजीवन, उपकृषि निदेशक, महोबा।
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