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    Lord Vishnu Puja Vidhi: नए साल की शुरुआत में भगवान विष्णु की पूजा से मिलेगी सुख-समृद्धि

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 08:00 AM (IST)

    नए साल की शुरुआत भगवान विष्णु की विशेष पूजा से करें, क्योंकि नए साल की शुरुआत गुरुवार से हो रही है। यह पूजा सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्य ...और पढ़ें

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    Lord Vishnu Puja Vidhi (AI Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गुरुवार के दिन से नए साल की शुरुआत होने जा रही है। ऐसे में आप इस दिन पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना द्वारा सुख-समृद्धि की प्राप्ति कर सकते हैं, क्योंकि गुरुवार का दिन प्रभु श्रीहरि की कृपा प्राप्ति के लिए बहुत ही खास माना गया है।ऐसे में आप साल के पहले दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से आराधना कर सुख-समृद्धि की प्राप्ति कर सकते हैं।

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    भगवान विष्णु की पूजा विधि

    • गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें और पीले रंग के वस्त्र पहनें।
    • एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
    • भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें और उन्हें फूल, चंदन, अक्षत्, फल अर्पित करें।
    • भोग अर्पित करते समय उसमें तुलसी दल जरूर रखें।
    • दीप जलाकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जप करें और भगवान विष्णु की आरती करें।
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    विष्णु जी के मंत्र (Lord Vishnu Mantra)

    शांताकारम भुजङ्गशयनम पद्मनाभं सुरेशम।
    विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम।
    लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।
    वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम।

    ॐ नमोः नारायणाय॥

    ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥

    3. विष्णु गायत्री मंत्र -

    ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
    तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

    मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः।
    मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

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    (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    भगवान विष्णु की आरती (Vishnu ji ki Aarti)

    ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।

    भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

    ॐ जय जगदीश हरे।

    जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

    स्वामी दुःख विनसे मन का।

    सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

    ॐ जय जगदीश हरे।

    मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।

    स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।

    तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

     ॐ जय जगदीश हरे।

    तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

    स्वामी तुम अन्तर्यामी।

    पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

    ॐ जय जगदीश हरे।

    तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

    स्वामी तुम पालन-कर्ता।

    मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

    ॐ जय जगदीश हरे।

    तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

    स्वामी सबके प्राणपति।

    किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

     ॐ जय जगदीश हरे।

    दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

    स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

    अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥

    ॐ जय जगदीश हरे।

    विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।

    स्वमी पाप हरो देवा।

    श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा॥

    ॐ जय जगदीश हरे।

    श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

    स्वामी जो कोई नर गावे।

    कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

    ॐ जय जगदीश हरे।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।