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    माघ मेला 2026: आखिर प्रयागराज में ही क्यों सजता है आस्था का सबसे बड़ा दरबार? जानें पौराणिक रहस्य

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 01:00 PM (IST)

    Magh Mela: जानें क्यों प्रयागराज के संगम तट पर ही लगता है आस्था का सबसे बड़ा माघ मेला? क्या है कल्पवास की कठिन साधना और समुद्र मंथन से जुड़ी वह पौराणिक ...और पढ़ें

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    संगम तट पर क्यों लगता है माघ मेला? (Image Source: Freepik)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पुराणों के अनुसार, प्रयागराज को 'तीर्थराज' यानी सभी तीर्थों का राजा कहा जाता है। मत्स्य पुराण और पद्म पुराण में उल्लेख है कि जब पूरी सृष्टि का निर्माण होना था, तब ब्रह्मा जी ने यहां 'अश्वमेध यज्ञ' किया था। इस प्रथम यज्ञ के कारण ही इस स्थान का नाम 'प्रयाग' पड़ा (प्र- प्रथम, याग- यज्ञ)।

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    लेकिन, माघ मेला यहां लगने की सबसे बड़ी वजह अमृत की बूंदें मानी जाती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को लेकर जब देवताओं और असुरों में छीना-झपटी हुई, तब अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरी थीं- हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज। माघ के महीने में प्रयागराज के संगम का जल साक्षात अमृत के समान हो जाता है, इसीलिए यहां स्नान का फल मोक्षदायी माना गया है।

    कल्पवास: संयम और साधना की कठिन परीक्षा

    माघ मेले की सबसे अनूठी विशेषता है 'कल्पवास'। पूरे एक महीने तक संगम की रेती पर रहकर सात्विक जीवन जीने को कल्पवास कहा जाता है। कल्पवासी जमीन पर सोते हैं, दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं और तीन बार गंगा स्नान करते हैं। मान्यता है कि माघ के महीने में जो व्यक्ति संगम तट पर जप-तप करता है, उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

    माघ मेले के प्रमुख स्नान पर्व 2026

    साल 2026 में माघ मेले की रोनक इन मुख्य तिथियों पर चरम पर होगी:

    मकर संक्रांति: जब सूर्य उत्तरायण होते हैं, तब मेले की औपचारिक शुरुआत होती है।

    मौनी अमावस्या: इसे सबसे बड़ा स्नान पर्व माना जाता है, जहां मौन रहकर साधना की जाती है।

    Sangam

    (Image Source: AI-Generated)

    बसंत पंचमी: ज्ञान की देवी सरस्वती के पूजन के साथ शाही स्नान जैसा माहौल रहता है।

    माघी पूर्णिमा: इस दिन कल्पवास की पूर्णाहुति होती है।

    वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व

    आध्यात्मिक दृष्टि से माघ मास को ऊर्जा के संचय का समय माना जाता है। वैज्ञानिक रूप से भी, इस समय गंगा के जल में विशेष खनिज और औषधीय गुण चरम पर होते हैं। जो शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने और चर्म रोगों को दूर करने में सहायक होते हैं। कड़ाके की ठंड में ठंडे पानी में डुबकी लगाना व्यक्ति की इच्छाशक्ति (Will Power) को मजबूत बनाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।