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    52.81 करोड़ विवादित टेंडर मामले में कार्रवाई, एसई के नेतृत्व में 5 मेंबरी कमेटी गठित, बोलीदाताओं के दस्तावेज फिर से चेक होंगे

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 06:27 PM (IST)

    अमृतसर नगर सुधार ट्रस्ट के 52.81 करोड़ के विवादित टेंडर मामले में स्थानीय सरकार विभाग के सचिव मंजीत सिंह बराड़ ने एक तकनीकी कमेटी गठित की है। एसई बूटा ...और पढ़ें

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    अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट।

    जागरण संवाददाता, अमृतसर। नगर सुधार ट्रस्ट के 52.81 करोड़ के टेंडर मामले में स्थानीय सरकार विभाग के सचिव मंजीत सिंह बराड़ ने तकनीकी कमेटी गठित की। इसमें एसई बूटा राम, एक्सईएन मंदीप सिंह, एसडीओ परमिंदर सिंह, एसडीओ जसकरणबीर सिंह और जेई वरुण गुप्ता को कमेटी में रखा गया है। यह कमेटी सभी बोलीदाताओं को अपने दस्तावेज पेश करने का मौका देगी।

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    इसके बाद तकनीकी मूल्यांकन किय जाएगा। यह कमेटी एडीसी शहरी विकास की तरफ से विवादित टेंडर की जांच को लेकर दी गई रिपोर्ट के आधार पर गठित की गई है। इस मामले में पहले कथित फेवर करने के आरोप में एसएसपी विजिलेंस लखबीर सिंह को सस्पेंड किया गया था। इसके बाद नगर सुधार ट्रस्ट के एसई, दो एक्सईएन सहित 7 अफसरों को भी सस्पेंड कर दिया गया था। वहीं कमेटी में शामिल अधिकारियों को उनकी जगह पर तैनात किया गया है।

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    जानें क्या है मामला

    नगर सुधार ट्रस्ट की तरफ से 31 अक्टूबर को रंजीत एवेन्यू की विभिन्न योजनाओं में विकास कार्य करवाने के लिए 52.81 करोड़ की लागत वाला टेंडर लगाया गया था। इसमें चार फर्मों ने टेंडर हासिल करने के लिए आनलाइन बिड दी थी। इसमें 15 दिसंबर को तकनीकी बोली खोलते हुए मूल्यांकन किया गया था। जिसमें सीगल इंडिया लिमिटेड और गणेश कार्तिकया कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को तकनीकी खामियां (दस्तावेजों की खामियों) के आधार पर टेंडर प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया गया था।

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    वहीं 18 फरवरी को वित्तीय बोली खोलते हुए मूल्यांकन करते हुए रजिंदर इंफ्रास्ट्रक्टर प्राइवेट लिमिटेड और शर्मा कांट्रेक्टर में से शर्मा को सफर बिडर बनाया गया था। इसके बाद तुल्नात्मक सूचि बनाकर वेटिंग के लिए चंडीगढ़ भेज दिया गया था। इसमें 5 करोड़ से उपर की राशि का काम होने के कारण इ तीन चीफ इंजीनियर्स की कमेटी ने इसकी वेटिंग करनी थी।

    दूसरी तरफ एक फर्म टेंडर प्रक्रिया को चैलेंज करते हुए हाईकोर्ट भी चली गई थी। इसमें अगली 15 जनवरी को मामले की सुनवाई होनी है। वहीं सीगल कंपनी ने इसमें टेंड्र प्रक्रिया में अनियमतता बरते जाने को लेकर चीफ से्क्रेटरी को शिकायत दी थी। जिसके बाद डिप्टी कमिश्नर ने कमेटी बनाकर टेंडर मामले की जांच करवाई थी।

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