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    100 साल से ज्‍यादा पुराने PNB के गौरवशाली इतिहास को नीरव मोदी ने किया बर्बाद

    By Kamal VermaEdited By:
    Updated: Wed, 21 Feb 2018 10:02 AM (IST)

    पंजाब नेशनल बैंक का काफी गौरवशाली इतिहास रहा है, लेकिन अब इसको नीरव मोदी ने धूमिल कर दिया है।

    100 साल से ज्‍यादा पुराने PNB के गौरवशाली इतिहास को नीरव मोदी ने किया बर्बाद

    नई दिल्‍ली [स्‍पेशल डेस्क]। पीएनबी या पंजाब नेशनल बैंक का नाम कभी बड़ी हस्तियों से जुड़ा था। इनमें लाला लाजपत राय, जवाहर लाल नेहरू, महात्‍मा गांधी, इंदिरा गांधी का नाम शामिल था। इस बैंक की अपनी एक साख थी जो कभी देश के स्‍वतंत्रता सेनानियों से बनी थी। उन्‍होंने ही इसको एक पहचान दी थी। इस बैंक में खाता खुलवाना सम्‍मान की बात समझी जाती थी। पंजाब केसरी के नाम से मशहूर लाला लाजपत राय ने इसमें अपना पहला अकाउंट खुलवाया था। वह इसके पहले ग्राहक थे।

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    लाहौर में खुली थी बैंक की पहली ब्रांच
    1894 में स्‍वदेशी आंदोलन के नेताओं ने इसकी शुरुआत की थी। इस बैंक की स्‍थापना करने वालों में सरदार दयाल सिंह मजीठिया, लाला हरकिशन लाल, लाला लाल चंद और लाला ढोलन दास थे। 12 अप्रैल 1895 को इस बैंक की पहली ब्रांच लाहौर के आर्य समाज मंदिर में खुली थी, जिसके पहले ब्रांच मैनेजर भी लाला लाजपत राय के भाई ही थे। इसके पांच वर्षों के अंदर बैंक ने इसका विस्‍तार सिंध और नॉर्थ वेस्‍ट फ्रंटियर प्रॉविंस में किया। हालांकि इससे पहले अवध कमर्शियल बैंक भी हुआ करता था जो 1881 में शुरू हुआ था। यह बैंक 1958 में बंद हो गया। इन सभी के बावजूद पीएनबी ही देश का पहला स्‍वदेशी बैंक था।

    बर्मा तक खुली बैंक की ब्रांच
    समय बीतने के साथ बैंक ने अपना विस्‍तार देश के दूसरे राज्यों में भी किया और बर्मा में भी अपनी एक शाखा खोली। ये बैंक कभी पंजाबियों की शान हुआ करता था। 1943 में जब इसकी कमान लाला योद्ध राज के हाथों में आई थी तो वह दौर भारत और पंजाब के लिए काफी मुश्किलों भरा था। इसकी वजह ये थी कि दूसरे विश्‍व युद्ध में काफी संख्‍या में पंजाबी लड़ रहे थे और भारत का स्‍वतंत्रता आंदोलन भी काफी मुश्किल दौर से गुजर रहा था।

    पाकिस्‍तान से शिफ्ट होकर दिल्‍ली लाया गया सारा फंड
    1945 में दूसरा विश्‍व युद्ध समाप्‍त हुआ उस वक्‍त देश आजाद होने की दिशा में बढ़ रहा था। लेकिन ये राह इतनी आसान साबित नहीं हुई और 1947 में आजादी के नाम पर मुल्‍क दो देशों में बंट गया। देश आजाद होने से पहले ही स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जून 1947 में कड़ी मेहनत और पूरी सावधानी के साथ बैंक का सारा फंड दिल्‍ली शिफ्ट कर लिया गया। उस वक्‍त योद्ध राज द्वारा लिया गया ये फैसला काफी बड़ा था। जब देश का बंटवारा हुआ तो इस बैंक ने पाकिस्‍तान के पंजाब से इस तरफ आए लोगों की मदद के लिए अपने द्वार खोल दिए, जिससे वह अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर सकें। इसमें कोई शक नहीं था कि इस बैंक में खाता खुलवाने वाले लोग आर्थिक तौर पर भी काफी मजबूत थे। ये वो समय था जब देश में हाहाकार मचा हुआ था। लोग एक जगह से दूसरी जगह जाने को मजबूर हो रहे थे। रातों रात उन्‍हें अपना घर छोड़कर दूसरी जगहों पर जाना पड़ रहा था। यह बैंक के लिए भी काफी मुश्किल भरा था।

    दो बड़े बदलाव से बदल गया बैंक
    आजादी के बाद पीएनबी ने पाकिस्‍तान में मौजूद अपनी 92 ब्रांच को बंद कर दिया था। इसकी वजह से बैंक का करीब 40 फीसद पैसा बर्बाद हो गया था। समय के साथ-साथ आजाद भारत में बैंक के कामकाज में भी बदलाव आया। 1953 में इस बैंक में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव ये हुआ कि इसकी कमान पंजाबी के हाथों से निकलकर डालमिया जैसे बड़े उद्धयोगपति के हाथों में आ गई। इसका नतीजा ये हुआ के योद्ध राज इससे अलग हो गए। बैंक में इसके बाद भी लगातार बदलाव होते चले गए। जुलाई 1969 में फिर बड़ा बदलाव तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के उस आदेश के बाद हुआ जिसमें उन्‍होंने सभी बैंका का राष्‍ट्रीयकरण किया था। तब से लेकर आज तक इस बैंक ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।

    नीरव ने धूमिल किया बैंक का गौरवशाली इतिहास
    1894 में इस बैंक का गठन हुआ था तो इसके पीछे सोच बेहद बेहतर थी। उस समय के हिसाब से देखें तो भारत के लिए यह बड़ा कदम भी था। तब किसी ने नहीं सोचा था कि जिस पीएनबी की शुरआत हो रही है उसका नाम नीरव मोदी जैसे कारोबारियों की वजह से धूमिल हो जाएगा। जिस बैंक को कभी लाला लाजपत राय के नाम से जाना जाता था वह आज नीरव मोदी की वजह से सुर्खियों में है। अब पीएनबी 11400 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर सुर्खियों में है, जिसका मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी अभी तक फरार है। इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। ईडी और दूसरी एजेंसियां लगातार उसके ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। इस छापेमारी में अब तक करीब 5700 करोड रुपये की राशि की संपत्ति जब्‍त की जा चुकी है। वहीं नीरव मोदी ने एक पत्र लिखकर यहां तक कह दिया है कि वह बैंक का बकाया नहीं चुकाएगा। उसका कहना है कि जितनी राशि की देनदारी बैंक की तरफ से की जा रही है वह दरअसल है ही नहीं। उसके मुताबिक उसकी देनदारी 5000 करोड़ रुपये से कम है।

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