करनाल, [पवन शर्मा]। ऑस्ट्रेलिया में रह रही हरियाणा की बेटी सगनदीप को उसकी सेवा की लगन के लिए वहां पढ़ रहे विदेशी विद्यार्थी नमन कर रहे हैं और वह इसकी पूरी हकदार है। सिडनी में आइटी की छात्रा सगनदीप ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन को कहते सुना कि वहां अध्ययनरत विदेशी विद्यार्थियों की मदद करने में वह असमर्थ हैं और ऐसे विद्यार्थी चाहें तो स्वदेश जा सकते हैं। इससे हरियाणा की इस बेटी का मन विचलित हो उठा। उसने ऑस्‍ट्रेलिया में रह रहे विदेशी विद्यार्थियों की मदद का बीड़ा उठा लिया।

विदेशी सरजमीं पर सगन की लगन को सभी कर रहे नमन

सगनदीप ने बिना समय गंवाए वॉट्सऐप पर हेल्पिंग एट रिस्क स्टूडेंट्स ग्रुप बना दिया। इसके बाद देखते ही देखते चहुंओर सेवा की अलख जगने लगी और कारवां बन गया। किसी ने बेघर छात्रों को आश्रय दिया तो किसी ने खाने-पीने की मदद मुहैया कराई। यह सिलसिला अब दिन-रात जारी है। 

आस्‍ट्रेलिया में मदद की मुहिम में जुटी सगनदीप और उनकी दाेस्‍त।

सगनदीप मूलत: करनाल के निसिंग से ताल्लुक रखती है। दो वर्ष से वह सिडनी के आस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोरमेशन टेक्नॉलोजी में अध्ययनत है। आइटी की पढ़ाई कर रही सगन ने बताया कि पिछले दिनों काेरोना के खौफ से आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने साफ कह दिया कि वह लॉकडाउन में फंसे विदेशी विद्यार्थियों की मदद में असमर्थ हैं और वे स्वेदश जा सकते हैं। उड़ानें रद होने से यह मुमकिन नहीं था।

सगनदीप ने बताया कि यह सुन वह बेचैन हो उठी। उसने तय किया कि हर हाल में इन विद्यार्थियों की मदद करेगी। उसने विदेशी विद्यार्थियाें की मदद के लिए मुहिम छेड़ने की निश्‍चय किया। इसके लिए उसने व्हाट्स एप ग्रुप हेल्पिंग एट रिस्क स्टूडेंट्स बनाया। उसने इसके माध्‍यम से परिचितों और अन्‍य लोगों से मदद की गुहार लगाते हुए इस मुहिम आगे बढ़ाने की अपील की। इसके बाद लोगों ने मदद के हाथ बढ़ाए और इसके लिए सक्रिय हो गए।

ऑस्‍ट्रेलिया में फंसे विदेशी विद्यार्थियों के लिए खाना पैक करते सगनदीप के ग्रुप के सदस्‍य।

इसके बाद ऑस्‍ट्रेलिया में फंसे विदेशी विद्यार्थियों ने अपनी व्‍यथा बयां करना शुरू किया। किसी ने फीस को लेकर समस्या जताई तो किसी के पास रहने का ठिकाना और खाने-पीने तक का इंतजाम नहीं था। सगन और उसके दोस्तों ने पूरे धैर्य के साथ इन सबकी भरपूर मदद की तो नई अलख ही जगने लगी। उन लोगों ने गुरुद्वारों से खाने के फ्री पैकेट बनाकर डिलीवर किए। डोर टू डोर मदद पहुंचाई। बेघर विद्यार्थियों के लिए रहने के ठिकाने तलाशे तो कई की फीस जमा कराई। यह सिलसिला अब तक जारी है। 

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सरबत की भलाई का संदेश

सगन को पिता त्रिलोक सिंह व माता जिंदर कौर के साथ सिख धर्म की शिक्षाओं ने आदर्श संस्कार दिए। सरबत की भलाई को सूत्र वाक्य मानकर सेवा कर रही सगन के लिए भारत ही नहीं, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल तक से ऑस्ट्रेलिया में बसे विद्यार्थियों की मदद करना मौजूदा दौर का सबसे अहम फर्ज है।

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कामकाज ठप, हजारों बेरोजगार

फोन पर बातचीत में सगनदीप ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में कोरोना संकट के चलते ऐसे हजारों विदेशी विद्यार्थी बेरोजगार हैं, जो हाउस कीपिंग या होटल आदि में काम करके रोजी-रोटी से लेकर फीस तक का इंतजाम करते थे। इनमें छात्राओं की भी अच्छी-खासी संख्‍या है। पर्यटन पूरी तरह बंद है। ऑस्ट्रेलिया सरकार भी अपने नागरिकों की मदद को ही प्राथमिकता दे रही है। हालांकि, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उनसे पिछले दिनों हुई वार्ता के बाद हालात कुछ बदले हैं, लेकिन अभी भी काफी समस्याएं हैं।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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