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    हरियाणा में खत्म होंगे कृषि भूमि के इंतकाल और कब्जे के झगड़े, छह महीने में बंटवारा जरूरी

    By Sunil Kumar JhaEdited By:
    Updated: Sat, 07 Nov 2020 10:52 AM (IST)

    हरियाणा में अब कृषि भूमि के इंतकाल और कब्‍जे के झगड़े खत्‍म होंगे। अब जमीन का बंटवारा छह महीने में जरूरी होगा। इसके साथ ही खरीदी गई जमीन का इंतकाल भी आसानी से होगा। हरियाणा सरकार ने विधानसभा में पंजाब भू-राजस्व (हरियाणा संशोधन) विधेयक पारित कराया है।

    हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र की कार्यवाही के दौरान सदन का दृश्‍य।

    चंडीगढ़, जेएनएन। हरियाणा में कृषि भूमि के इंतकाल, कब्‍जे और बंटवारे को लेकर होने वाले विवाद व झगड़े बंद होंगे। किसानों को अब खेती के लिए खरीदी गई भूमि या उसके हिस्से का इंतकाल कराने और कब्जा लेने के लिए वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही हिस्सेदारों की सहमति के बगैर ही खानाकाश्त से अनुचित रूप से गिरदावरी किसी के भी नाम कराने पर रोक लगेगी। इससे जमीन से जुड़े झगड़े खत्म होंगे। विधानसभा ने शुक्रवार को पंजाब भू-राजस्व (हरियाणा संशोधन) विधेयक पर मुहर लगा दी है।

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    खून के रिश्ते व पति-पत्नी को छोड़कर सभी हिस्सेदारों को छह महीने में जमीन का बंटवारा करना होगा

    उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व वित्तायुक्त संजीव कौशल ने बताया कि खून के रिश्ते व पति-पत्नी को छोड़कर जमाबंदी और इंतकाल में शामिल सभी हिस्सेदारों के लिए अनिवार्य रहेगा कि वह कानून लागू होने के छह महीने के भीतर आपसी सहमति से जमीन का बंटवारा कर लें। राजस्व अधिकारी से अनुरोध करने पर यह समय छह महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है। एक साल में भी अगर आपसी बंटवारा नहीं किया जाता है तो राजस्व अधिकारी अपने स्तर पर तकसीम की कार्यवाही छह महीने में पूरी करेंगे।

    प्रदेश में 17.82 लाख सामूहिक खेवट, राजस्व अदालतों में चल रहे जमीन से जुड़े साढ़े 39 हजार केस

    वित्तायुक्त राजस्व संजीव कौशल ने बताया कि प्रदेश में 17.82 लाख सामूहिक खेवट हैं। राजस्व अदालतों में जमीन से जुड़े 39 हजार 500 विवादों के केस लंबित हैं। चूंकि फैसले से लाखों परिवार प्रभावित होने वाले हैं, इसलिए राजस्व विभाग के अफसरों और कर्मचारियों के साथ ही रिटायर्ड अफसरों और कर्मचारियों की भी इस काम में मदद ली जाएगी।

    वहीं, संगठित अपराध से निपटने के लिए हरियाणा संगठित अपराध नियंत्रण (हरकोका) विधेयक पारित किया गया है। महाराष्ट्र ने 1999 में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम लागू किया था जिसकी तर्ज पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक ने भी कानून बनाए हैं।

    मेयर के साथ ही पालिका और परिषद के प्रधानों के खिलाफ आ सकेंगे अविश्वास प्रस्ताव

    हरियाणा में नगर निगमों के मेयर और नगर पालिकाओं व परिषद के प्रधानों के खिलाफ फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए विधानसभा में नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक और  हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) विधेयक पारित किए गए हैं। इसके अलावा नगर परिषद और नगर पालिका में प्रधान के पद का चुनाव सीधे तौर पर मतदाताओं से कराने के लिए हरियाणा नगर पालिका निर्वाचन नियमावली 1978 भी संशोधन की प्रक्रिया में हैं।

    एजी आफिस में अनुबंध पर रहेंगे ला अफसर

    हरियाणा के महाधिवक्‍ता कार्यालय में विधि अधिकारियों की तैनाती पर भ्रम अब साफ हो गया है। इसके लिए हरियाणा विधि अधिकारी (विनियोजन) संशोधन विधेयक पारित किया गया है। संशोधन में स्पष्ट किया गया है कि इन कानून अधिकारियों की तैनाती अनुबंध आधार पर होगी। अधिनियम से नियुक्ति शब्द हटाया गया है जिससे भ्रम की स्थिति बन रही थी।

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    बोर्ड-निगमों को देना होगा खर्चे का हिसाब

    प्रदेश के सभी विभागों की तर्ज पर बोर्ड-निगमों, सहकारी समितियों, विश्वविद्यालयों, स्थानीय प्राधिकरणों, निकायों, सार्वजनिक संस्थानों और प्रदेश सरकार से अनुदान प्राप्त करने वाली सभी संस्थाओं को खर्चे और आमदनी का हिसाब देना होगा। इसके लिए हरियाणा लोक वित्त उत्तरदायित्व (संशोधन) विधेयक पारित किया गया है।

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