जागरण संपादकीय: बचकानी राजनीति
आखिर वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या इसलिए कि वे अच्छे से जान रहे हैं कि वोट चोरी का आरोप झूठा है।
HighLights
राहुल गांधी ने व्यापारियों की रैली टालने की अपील ठुकराई
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को बचकाना बताया
'वोट चोरी' के आरोप झूठे और अपरिपक्व राजनीति का हिस्सा
दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों के प्रमुख संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने राहुल गांधी से विपक्षी दलों की 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को टालने का जो अनुरोध किया था, उसे उन्होंने ठुकरा कर संवेदनहीनता और हठधर्मी का ही परिचय दिया। यह संगठन बस इतना चाह रहा था कि रैली भाई दूज के बाद की जाए, ताकि वे नुकसान से बच सकें। राहुल गांधी और उनके सहयोगी-साथी इससे अनभिज्ञ नहीं हो सकते कि धनतेरस एवं दीवाली के पहले बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है। उन्हें इसका भी आभास होना चाहिए था कि दिल्ली के कुछ इलाकों और खासकर कनाट प्लेस के व्यापारी कांग्रेस और काकरोच जनता पार्टी के अनवरत धरना-प्रदर्शन से पहले ही नुकसान उठा चुके हैं।
समस्या केवल यह नहीं कि राहुल ने व्यापारियों के अनुरोध पर तनिक भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई, बल्कि यह भी है कि उन्होंने उनके पत्र के तीन दिन बाद अपनी निष्ठुर प्रतिक्रिया में यह कहा कि उन्हें पीएम मोदी से मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने को कहना चाहिए। इसे बचकानेपन के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता। राहुल अच्छे से जानते हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल महाभियोग के जरिये हटाया जा सकता है और उसे संसद से पारित कराने की उनमें सामर्थ्य नहीं। वास्तव में इसीलिए वे कुतर्कों के सहारे यह माहौल बना रहे कि प्रधानमंत्री उनके झूठे आरोपों के कारण उन्हें हटा दें। यह राजनीतिक अपरिपक्वता की पराकाष्ठा ही है।
वोट चोरी का राहुल गांधी का शिगूफा भी झूठ पर ही टिका है। वे और अन्य विपक्षी नेता वोट चोरी का झूठ कितना ही दोहराएं, वे इसे सच सिद्ध करने में नाकाम हैं। राहुल वोट चोरी का तबसे शोर मचा रहे, जबसे बिहार में एसआईआर हुआ था, लेकिन वे अपने पक्ष में जनमत बनाने में समर्थ नहीं हुए। इसी से वे खीझे हुए हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि झूठ के पांव नहीं होते। वे झूठ के सहारे कई बार अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन उनकी दाल नहीं गली।
एसआईआर को वोट चोरी कहने के पहले राहुल और उनके साथियों ने ईवीएम को निशाने पर लिया था, लेकिन नाकाम ही रहे। जिस कथित वोट चोरी का आरोप लगाकर वे मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा मांग रहे हैं, उसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही है और एक याचिका तो खुद उन्होंने दायर कर रखी है। आखिर वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या इसलिए कि वे अच्छे से जान रहे हैं कि वोट चोरी का आरोप झूठा है। हैरानी नहीं कि यदि एसआईआर की सुनवाई कर रहा सुप्रीम कोर्ट राहुल के मन का फैसला न दे तो वे उस पर भी चढ़ाई कर दें। उनके याचिका दाखिल करने के तरीके से यह स्पष्ट भी हुआ था।
-1793036746072_v.webp)

-1793037603439_v.webp)








