नई दिल्ली, जेएनएन। 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद सज्जन कुमार समेत चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सज्जन को आपराधिक साजिश और दंगा भड़काने का दोषी पाया गया। इससे पहले निचली अदालत ने 30 अप्रैल 2013 को उन्हें बरी कर दिया था। आइए जानते हैं कौन हैं वह महिला निरप्रीत कौर, जिनकी गवाही पर सज्जन कुमार को अब मरते दम तक जेल की चार दीवारों में जीवन काटना होगा। 

आंखों के सामने पिता को जिंदा जलते देखा था
1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1 से 3 नवंबर तक दिल्ली में सिखों का कत्ल-ए-आम किया गया। सज्जन कुमार के मामले में मुख्य गवाह निरप्रीत कहती हैं- 'मैंने अपनी आंखों के सामने अपने फादर साहब निर्मल सिंह को जिंदा जलते देखा था। इस दौरान तीन बार मेरे पिता ने बचने की कोशिश की, लेकिन वह नाले में गिर गए। इस दौरान वहां जमा भीड़ हैवान की तरह पेश आई और उन्हें लाठी और सरिये से मारा था।

पुलिस प्रशासन ने दिया धोखा
निरप्रीत कौर बताती हैं- 'पुलिस के कहने पर मेरे फादर साहब समझौता करने के लिए गए थे, लेकिन मेरे फादर को जिंदा जलाया गया। जब मैं वापस आई मेरे पिता जल गए। मैं दौड़ के घर के अंदर की तरफ आई तो देखा कि मेरी मां बेहोश पड़ी थी और हमारे घर में पुलिस खड़ी थी। मैंने पाया कि हमारे घर को आग लगी थी। कुछ देर बाद पूरा घर जल गया। 

16 साल की उम्र में देखा था मौत का तांडव
निरप्रीत कौर कहती हैं- 'दंगों के दौरान मैं दिल्ली विश्वविद्यालय के वेंकटेश्वर कॉलेज में बीएससी की पढ़ाई कर रही थी। ...और पालम के राजनगर में अपने परिवार के साथ रहा करती थीं।' निरप्रीत जिस राजनगर में रहती थीं। वहां सिखों के 250-300 परिवार थे।

निरप्रीत ने बताया- '1984 में जब सिखों पर हमले शुरू हुए तो इनमें से ज्यादातर लोग मेरे घर पर इकट्ठा हो गए। यह लोग डटकर दंगाइयों का मुकाबला करने लगे। इसी वजह से भीड़ ने निरप्रीत के पिता निर्मल सिंह को निशाना बनाया। 

बता दें कि निरप्रीत कौर ने पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के खिलाफ कोर्ट में गवाही दी, जिस पर सज्जन कुमार समेत 6 लोगों पर दिल्ली कैंट में 5 सिखों की हत्या का मामला दर्ज हुआ था।

सीबीआई का आरोप है कि सज्जन कुमार मौके पर मौजूद थे और उन्होंने दंगाइयों को भड़काया था। ट्रायल कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था, लेकिन 5 अन्य को विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया गया था। सीबीआई ने 2005 में दंगा पीड़ित जगदीश कौर की शिकायत पर कैंट के राजनगर इलाके में हुए दंगे के मामले में केस दर्ज किया था। पीड़ितों का कहना था कि 2 नवंबर 1984 को सज्जन कुमार ने दिल्ली कैंट में लोगों को भड़का कर दंगे कराए थे।

गवाह ने पहचान लिया था सज्जन को
पिछले महीने पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की एक गवाह चाम कौर ने सज्जन को पहचान लिया था। चाम ने बयान दिया था- घटनास्थल पर मौजूद सज्जन ने वहां मौजूद दंगाइयों से कहा था कि सिखों ने हमारी मां (इंदिरा गांधी) का कत्ल किया है, इसलिए इन्हें नहीं छोड़ना। बाद में भीड़ ने उकसावे में आकर मेरे बेटे और पिता का कत्ल कर दिया।

5 सिखों की हत्या के मामले में हुई सजा
1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे फैले थे। इस दौरान दिल्ली कैंट के राजनगर में पांच सिखों- केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या हुई थी। इस मामले में केहर सिंह की विधवा और गुरप्रीत सिंह की मां जगदीश कौर ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित परिवार की शिकायत और न्यायमूर्ति जीटी नानावटी आयोग की सिफारिश के आधार पर सीबीआई ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ 2005 में एफआईआर दर्ज की थी। 13 जनवरी 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

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Posted By: JP Yadav

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