विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रं संस्कृति सीमांत की सबसे पुरानी संस्कृति: प्रो. गिरधर सिंह नेगी

By Sunil NegiEdited By:
Published: Fri, 03 Nov 2017 07:48 PM (IST)Updated: Fri, 03 Nov 2017 11:07 PM (IST)

चीन और नेपाल की सीमा पर निवास करने वाली रं संस्कृति को सीमांत की सबसे पुरानी संस्कृति है।

रं संस्कृति सीमांत की सबसे पुरानी संस्कृति: प्रो. गिरधर सिंह नेगी
रं संस्कृति सीमांत की सबसे पुरानी संस्कृति: प्रो. गिरधर सिंह नेगी

धारचूला(पिथौरागढ़), [जेएनएन]: कुमाऊं विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. गिरधर सिंह नेगी ने चीन और नेपाल की सीमा पर निवास करने वाली रं संस्कृति को सीमांत की सबसे पुरानी संस्कृति बताया है। रं जनजाति के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले भोटिया शब्द पर उन्होंने आपत्ति जताई है।

डीएसबी परिसर कुमाऊं विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. गिरधर सिंह नेगी ने धारचूला तहसील के उच्च हिमालयी दारमा और चौंदास क्षेत्र का भ्रमण किया। शुक्रवार को धारचूला लौटे प्रो. नेगी ने दैनिक जागरण से कहा रं समाज से जुड़ी चीन सीमा से लगी तीनों घाटियां विपुल संस्कृति को समेटे हैं।

उन्होंने कहा कि रं लोगों के लिए प्रयुक्त किए जाने वाला भोटिया शब्द ठीक नहीं है। रं संस्कृति सीमांत की सबसे पुरानी संस्कृति है। रं समाज के लोगों को दूसरा नाम दिए जाने से उनकी पहचान को नुकसान हो रहा है। धारचूला में रं संस्कृति के धरोहर के रूप में स्थापित रं संग्रहालय को उन्होंने उल्लेखनीय कार्य बताया और इसके रखरखाव पर जोर दिया। संग्रहालय को रं सभ्यता और संस्कृति की झलक दिखाने वाला बताया। 

यह भी पढ़ें: स्वार्गारोहणी के लिए जहां-जहां से पांडव गुजरे, वहां होते पांडव नृत्‍य

यह भी पढ़ें: बदरीनाथ में श्रद्धा का केंद्र बना पंचमुखी देवदार

यह भी पढ़ें: मार्कण्डेय मंदिर में विराजमान हुए तृतीय केदार तुंगनाथ