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    संवादी : विचारों की सुंदरता में जन्म लेती है कहानी

    By Ashish MishraEdited By:
    Updated: Fri, 07 Oct 2016 08:47 PM (IST)

    छोटे-छोटे किस्सों से आकार लेने वाली हर कहानी का जन्म विचारों की सुंदरता से होता है। गूढ़ संदेश तो कहानी के हृदय में छिपा होता है, जो अदृश्य होता है। ...और पढ़ें

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    लखनऊ [आलोक मिश्र] । छोटे-छोटे किस्सों से आकार लेने वाली हर कहानी का जन्म विचारों की सुंदरता से होता है। गूढ़ संदेश तो कहानी के हृदय में छिपा होता है, जो अदृश्य होता है। संवेदना की जमीन पर खड़े होकर जब कोई कहानीकार सहज व सरल शब्दों में उसे पालता-पोसता है, तो कहानी पढऩे वाले तक अपने मर्म को खुद पहुंचा देती है। 'आने वाले कल की कहानी में युवा मन में उमड़े विचारों व सवालों से बुनी गई कहानियां जब श्रोताओं तक उनकी अपनी शैली में पहुंची तो इस विधा के मर्मज्ञ सोचने को विवश हो गए।

    गहराई व गूढ़ता भाषा में नहीं विचारों में होती है : सौरभ शुक्ला

    सत्या फिल्म में 'कल्लू मामा का बहुचर्चित किरदार निभाने वाले अभिनेता व स्क्रीन प्ले राइटर सौरभ शुक्ला व प्रसिद्ध कहानीकार अखिलेश के सामने युवा युक्ति त्रिपाठी, पूजा सिंह, साक्षी यादव, बसंत कुमार, मोनिका वर्मा, श्वेता यादव, स्नेहा कुमारी, जान्हवी ने अपने-अपने अंदाज में अपनी कहानियों को सुनाया। इन कहानियों में देश के सुनहरे भविष्य की कल्पनाओं से लेकर समाज की कुरीतियों व अव्यवस्था के प्रति छटपटाहट थी। युवाओं ने सपने को आधार बनाकर उनकी कल्पनाओं में आए भविष्य को अपने शब्दों के जरिए आकार देने की कोशिश की। इस बीच अध्यापिका मधु कौशिक ने शिक्षा के उजियारे को बयां करती अपनी कहानी कही। श्रोताओं ने भी बड़े धैर्य व चाव से उनकी कहानियों को सुना।

    संवादी : भाषा के रूप में भावनाओं की अभिव्यक्ति

    युवा कहानीकारों को सुनकर सौरभ शुक्ला ने आयोजन मंडल को पहले तो युवाओं को कार्यशाला के जरिए कहानी लेखन की वास्तविकता से रूबरू कराने की नसीहत दी। फिर बोले, कहानी व निबंध में फर्क करना होगा। कहानी का एक अलग शैली होती है। हर लिखी हुई चीज कहानी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि कहानी का अपना अंदाज होता है और हर युग में अंदाज बदलता है। सौरभ शुक्ला ने कहा कि बच्चे क्या सोच रहे हैं, यह सुनकर झटका लगा। वे सोच रहे हैं या उन्हें सोचवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवा जल्दी सोचने लगते हैं कि कहानी को एक लेवल पर ले जाया जाए।

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    गूढ़ शब्द लिखने की कोशिश करते हैं। ताकि वाक्य में बड़ेपन का एहसास हो। जबकि गूढ़ता विचारों में होती है, भाषा में नहीं। सहज तरीके से कहा गया गूढ़ विचार ज्यादा अच्छी कहानी का आधार होता है। इसके बाद मंच पर आए कहानीकार अखिलेश ने कहा कि युवा अपने मौलिक विचारों व निजी अनुभवों को तरजीह दें। कल्पनाओं को आधार बनाकर अपनी बात कहना भी कहानी है। कोई कहानी ऐसी नहीं, जिसमें अतीत न झलकता हो। कहानीकार वर्तमान को न छूता हो। वह भविष्य को भी देखता है।

    विचारों की सुंदरता पर कहानी बनती है। अखिलेश ने युवाओं को नसीहत दी कि कहानी में संदेश छिपा होता है। कहानी में विचार जितना अदृश्य हो, कहानी उतनी श्रेष्ठ कथा होती है। कहानी में किस्से ज्यादा से ज्यादा हों। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक पत्रकार के लिए तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं। उसी प्रकार कहानीकार के लिए संवेदना ज्यादा मायने रखती है। इससे पूर्व कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए दैनिक जागरण के संपादक (उत्तर प्रदेश) दिलीप अवस्थी ने कहा कि हमारे पेशे में भी संवाद आधार है। यहां जो लोग आए हैं, वे तरह-तरह की विधाओं से सजे संवरे हैं। हमारा प्रयास है कि हम लोगों को उन तक सीधे पहुंचा सकें। वहीं कार्यक्रम की शुरुआत में अविनाश दास ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताई।

    बांटा अपना निजी अनुभव
    फिल्म अभिनेता ने युवाओं को बताया कि कक्षा सात में उन्हें निबंध लिखने को मिला था। तब पहली बार उन्होंने एक अंग्रेजी फिल्म की पटकथा को अपने शब्द देकर एक कहानी का रूप देकर लिखा था। इसके लिए स्कूल में अध्यापक ने उनकी खिंचाई भी की थी, लेकिन पिता ने उन्हें लेखन के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने युवाओं से कहा कि जो सोच रहे वो लिखो। अपनी कहानी को अपने मूल विचारों में ही आगे बढ़ाओ।