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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 15, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अमेरिकी यात्रा के दौरान डिजिटल इंडिया पर होगा पीएम मोदी का जोर

By Sachin kEdited By:
Published: Tue, 15 Sep 2015 11:12 AM (IST)Updated: Tue, 15 Sep 2015 12:06 PM (IST)

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी अपनी आगामी अमेरिकी यात्रा के दौरान डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया में सहयोग अहम मुद्दा होगा। ...और पढ़ें

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वाशिंगटन। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी अपनी आगामी अमेरिकी यात्रा के दौरान डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया में सहयोग अहम मुद्दा होगा। अपनी इन योजनाओं के लिए पीएन मोदी अमेरिका का सहयोग मांगेंगे। पीएम मोदी तीस साल बाद सिलिकॉन वैली जाने वाले देश के पहले पीएम हैं। इस यात्रा से ऐसी नई प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी पाने का मौका मिलेगा, जो भारत में स्मार्ट शहरों व अन्य ढांचागत सुविधाओं के विकास में मददगार होगी।

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अमेरिका की दूसरी यात्रा पर जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 सितंबर को सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के मुख्यालय का दौरा करेंगे। उनके गूगल के कैंपस गूगलप्लेक्स भी जाने की उम्मीद है। फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग से मुलाकात के दौरान मोदी इस बात को लेकर चर्चा कर सकते हैं कि सामाजिक व आर्थिक चुनौतियों से कैसे निपटा जा सकता है।

फेसबुक का मुख्यालय अमेरिका के कैलिफोर्निया में है। सिलिकॉन वैली के मेनलो पार्क में इसी साल फेसबुक का मुख्यालय स्थानांतरित हुआ है। यह करीब चार लाख हजार वर्ग फीट में फैला है। फेसबुक के अमेरिका के बाद भारत में सबसे ज्यादा यूजर्स हैं। दुनियाभर में उसके 1.44 अरब यूजर्स हैं, जिनमें से 12.5 करोड़ भारत में हैं।

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मोदी की यात्रा से यह मौका मिलेगा कि नई प्रौद्योगिकी किस तरह से भारत के लिए सुरक्षित व स्वच्छ स्मार्ट शहर बसाने, समान शिक्षा का अवसर देने, लाखों लोगों को बिजली उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकती है। अमेरिकी कंपनियां इन मुद्दों के नए समाधान खोजने में भारत के साथ गठजोड़ को उत्सुक हैं। भारत, अमेरिका में निवेश का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।

एक सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिका में 91,000 रोजगार सृजित हुए हैं और 15 अरब डॉलर का निवेश किया गया है। दूसरी तरफ, भारत में अमेरिका से निवेश 2004 के 7.7 अरब डॉलर से बढ़कर आज 28 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। भारत में 500 से अधिक अमेरिकी कंपनियां काम कर रही हैं, जबकि अमेरिका में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के संख्या 2005 में 85 से बढ़कर अब 200 तक पहुंच चुकीं हैं।