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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 11, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इसे कहते हैं किस्मतः बस एक मिनट की देरी ने इस शख्स से छीन लिए 1 करोड़ रुपये

By Abhishek Pratap SinghEdited By:
Published: Thu, 11 Aug 2016 07:46 PM (IST)Updated: Thu, 11 Aug 2016 07:55 PM (IST)

ये कहावत इस शख्स पर सही बैठती है हाथ तो आया पर मुंह ना लगा...जी हां ऐसा ही कुछ हुआ ...और पढ़ें

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निर्धारित समय से एक मिनट की देरी से ऑनलाइन लॉटरी टिकट खरीदना कर्नाटक निवासी एक शख्स को महंगा पड़ा। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने जी टेलीफिल्म्स के 'महा लोट्टो' शो-2003 के एक करोड़ रुपये के लाटरी कथित विजेता ज्योतिष चंद्रन की अर्जी खारिज कर दी है। उसने याचिका दाखिल की थी कि जी टेलीफिल्म्स उसे जीती हुई एक करोड़ रुपये की रकम नहीं दे रहा है।

आयोग के अध्यक्ष अजीत भरिहोक की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला दिया। कहा कि चंद्रन ने लाइव शो खत्म होने के एक मिनट बाद टिकट खरीदा। उसके टिकट पर रात 9.17 बजे का समय दर्ज है। जबकि लाटरी ड्रा का परिणाम जीटीवी पर 6 जनवरी, 2003 को रात 9 बज कर 12 मिनट से 9 बज कर 16 मिनट के बीच लाइव घोषित कर दिया गया था।

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पीठ के अनुसार, 'लिहाजा इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता कि लाइव शो से जीते हुए नंबरों को जानने के बाद शिकायतकर्ता चंद्रन ने टिकट खरीदा और बेजा फायदा उठाने के लिए उसी नंबर को चुना, जिसकी लाटरी लगी थी।' आयोग ने कहा कि लाइव शो और टिकट खरीदने की टाइमिंग को लेकर जी टेलीफिल्म्स और महाराष्ट्र सरकार की दलीलों का भी शिकायतकर्ता ने बहस के दौरान कोई खंडन नहीं किया।

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लिहाजा जी टेलीफिल्म्स और अन्य की दलील को सही माना जाता है। अपनी अर्जी में चंद्रन ने बताया था कि उसने 6 जनवरी, 2003 को महा लोट्टो टिकट ऑनलाइन खरीदा था। इसके बाद उसने लाइव ड्रा देखा और पाया कि उसके नंबर वाले टिकट ने लाटरी जीती है। फिर उसने पुरस्कार राशि पाने के लिए उस ऑनलाइन सेंटर से संपर्क साधा, जहां से टिकट खरीदा था।

इस सिलसिले में चंद्रन ने जी टेलीफिल्म्स के अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों से भी टेलीफोन पर संपर्क करना चाहा, लेकिन उसे एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि नहीं मिली।

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