वाड्रा ने किया बड़ा फर्जीवाड़ा
हरियाणा के आइएएस अधिकारी अशोक खेमका ने संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी और रियल एस्टेट की दिग्गज कंप ...और पढ़ें

चंडीगढ़ [जागरण ब्यूरो]। हरियाणा के आइएएस अधिकारी अशोक खेमका ने संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी और रियल एस्टेट की दिग्गज कंपनी डीएलएफ के बीच हुए जमीनी सौदे को फिर से गलत ठहराते कुछ नए तथ्यों का रहस्योद्घाटन किया है। खेमका ने सौदे की जांच के लिए गठित तीन वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों की हाई पावर कमेटी द्वारा वाड्रा-डीएलएफ डील को क्लीन चिट देने पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मुख्य सचिव की तलबी पर भेजे अपने जवाब में खेमका ने पूरे मामले में कई स्तरों पर फर्जीवाड़ा हुआ।
पढ़ें: रॉबर्ट वाड्रा हैं मिस्टर क्लीन चिट
रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी ने गुड़गांव के शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन खरीदी थी। एक महीने के भीतर ही वहां आवासीय कॉलोनी बनाने का लाइसेंस लेकर इस जमीन को डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया, जबकि यह जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी। चकबंदी विभाग के महानिदेशक पद पर रहते हुए खेमका ने इस जमीन का म्यूटेशन रद कर दिया था, और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पड़ने वाले गुड़गांव, मेवात, पलवल और फरीदाबाद के उपायुक्तों से वाड्रा-डीएलएफ के बीच हुए अन्य सौदों की भी जांच रिपोर्ट मांगी थी।
पढ़ें: 11 हजार रुपये के वाड्रा!
इन चारों उपायुक्तों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में वाड्रा और डीएलएफ के बीच हुए सभी सौदों को वाजिब ठहरा दिया। इसके बाद हरियाणा सरकार ने वरिष्ठ आइएएस अधिकारी कृष्ण मोहन के नेतृत्व में तीन अधिकारियों की एक हाई पावर कमेटी गठित की। इस कमेटी ने भी वाड्रा-डीएलएफ डील को क्लीन चिट देते हुए खेमका की कार्रवाई को गलत ठहराया।
इसके बाद मुख्य सचिव ने जमीन सौदों को लेकर अशोक खेमका की कार्रवाई की बाबत उनसे जवाब मांगा था। खेमका ने अपना जवाब हालांकि सरकार को तभी भेज दिया था, लेकिन उन्होंने करीब 150 पेज के अपने इस जवाब को शनिवार को सार्वजनिक कर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
मुख्य सचिव पीके चौधरी ने कहा है कि खेमका के जवाब का परीक्षण किया जा रहा है। शीघ्र ही वह इस पर कोई निर्णय देंगे। खेमका को यह डील रद करने के बाद कई बार तबादलों का सामना करना पड़ा है।
फजर्ीे थे जमीन के कागज
खेमका ने रिपोर्ट में पहला सवाल यही खड़ा किया है कि आखिर शिकोहपुर गांव से खरीदी गई जमीन का एक महीने के भीतर ही इतना रेट कैसे बढ़ गया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने नियमों की अनदेखी करके जमीन के इस्तेमाल को बदला। जमीन को फर्जी कागजों के आधार पर खरीदा गया था, जिस कारण इसका म्यूटेशन रद किया गया।
सेल डीड फर्जी
खेमका की रिपोर्ट के मुताबिक वाड्रा की कंपनी ने इस जमीन की खरीद के लिए ओमकारेश्वर प्रॉपर्टी को नकद रुपये नहीं दिए थे। जो चेक दिया गया था, वह भी कैश नहीं हो पाया। इस लिहाज से कानूनी और नैतिकता के आधार पर कोई सौदा हुआ ही नहीं। इसलिए शिकोहपुर की खरीदी गई जमीन और डीएलएफ को बेची गई जमीन से संबंधित दोनों सेल डीड फर्जी हैं। 1ृ2 फरवरी, 2008 को वाड्रा की कंपनी ने ओमकारेश्वर प्रॉपर्टी से यह जमीन हासिल की थी और मार्च, 2008 में वाड्रा की कंपनी को लाइसेंस मिल गया था।
जमीन का मालिकाना हक कैसे बदला
जब धन का लेन-देन ही नहीं हुआ तो जमीन का सौदा कैसे हो गया? जब वास्तव में सौदा ही नहीं हुआ तो जमीन का मालिकाना हक कैसे बदला ? ऐसे में कानूनी रूप से स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी जमीन की मालिक ही नहीं हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक सेल डीड ही नहीं बल्कि स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी की ओर से दाखिल बैलेंस सीट भी गलत है। उन्होंने कंपनी एक्ट और आइपीसी की विभिन्न धाराओं का जिक्र करते हुए इस सौदे को गैर वाजिब करार दिया है।
मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।