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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 14, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

तीन माह से बेटे के शव के लिए तड़प रही मां

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Published: Wed, 14 Aug 2013 09:45 AM (IST)Updated: Wed, 14 Aug 2013 09:48 AM (IST)

एक मां एक-दो दिन नहीं पूरे तीन माह से बेटे के शव के लिए तड़प रही है। उसके बेटे का ...और पढ़ें

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हाजीपुर [रविशंकर शुक्ला]। एक मां एक-दो दिन नहीं पूरे तीन माह से बेटे के शव के लिए तड़प रही है। उसके बेटे का शव सऊदी अरब में पड़ा है जहां उसकी मौत तीन महीने पहले हो चुकी थी। जबकि गांव के मामूली झगड़े में उसका पति जेल में बंद है।

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जानकारी के अनुसार महनार प्रखंड अंतर्गत लावापुर नारायण के रामबाबू राय का पुत्र दीपक कुमार सऊदी अरब की एक कंपनी में नौकरी कर रहा था। जहां तीन माह पहले उसकी मौत हो गयी। परिजनों को उसकी मौत की खबर मिली तो उन्होंने शव मंगाने के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगायी लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।

बीते दिनों वैशाली के सांसद डा. रघुवंश प्रसाद सिंह अपने पैतृक गांव महनार गए थे। दीपक की मां ने मुलाकात कर उन्हें अपनी पूरी दास्तान सुनायी।

सांसद ने दिल्ली लौटते ही विदेश मंत्री को पत्र लिखा। टाल-मटोल होता रहा। कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता देख उन्होंने 7 अगस्त को लोकसभा में इस मामले को उठाया। जबाब में विदेश मंत्रालय के अवर सचिव ने पत्र लिखकर दीपक का शव सऊदी अरब में होने की पुष्टि की। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दीपक गत जनवरी में वहां सड़क हादसे का शिकार हो गया था। बीते 23 मई को उसकी वहां मौत हो गयी। मृत्यु के उपरांत दूतावास ने 24 जून को उस कंपनी से संपर्क किया जहां दीपक काम करता था।

दीपक वहां सऊदी अरब के अल हुसैन एंड ब्रदर्स ग्रुप के लिए काम कर रहा था। दीपक का शव भारत भेजने के लिए सऊदी अरब में 1 जुलाई, 2013 को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया। लेकिन दीपक का शव वहां सिर्फ इस इंतजार में पड़ा है कि मृतक के परिजन इस बात की पुष्टि करें कि उसके शव को पटना एयरपोर्ट पर रिसीव कर लिया जाएगा।

इस मां का दुर्भाग्य तो देखिए एक ओर जहां बेटे का शव विदेश में पड़ा है वहीं गांव के झगड़े में पति जेल में बंद हैं। उसका कोई मददगार नहीं है। सांसद डा. रघुवंश ने डीएम से आग्रह किया है कि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर विदेश मंत्रालय को यथाशीघ्र सूचित किया जाए और मामूली झगड़े में जेल में बंद उसके पिता को रिहा कराने की भी व्यवस्था की जाए।

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