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    हिंदी का इस्तेमाल बढ़ाने को वेब टूल लाई सरकार

    By Sanjeev TiwariEdited By:
    Updated: Sun, 10 Jan 2016 09:00 PM (IST)

    सरकारी कामकाज में हिंदी के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल के लिए आधिकारिक स्तर पर ठोस पहल शुरू हो गई है। इसके लिए सरकारी दफ्तरों में लगे कंप्यूटरों को कई ऐसे वेब टूल्स से लैस किया गया है, जिससे रोजमर्रा के कामकाज के दौरान कर्मचारियों के बीच हिंदी के प्रयोग को

    नई दिल्ली। सरकारी कामकाज में हिंदी के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल के लिए आधिकारिक स्तर पर ठोस पहल शुरू हो गई है। इसके लिए सरकारी दफ्तरों में लगे कंप्यूटरों को कई ऐसे वेब टूल्स से लैस किया गया है, जिससे रोजमर्रा के कामकाज के दौरान कर्मचारियों के बीच हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा सके। इसमें सबसे अहम ऑडियो टाइपिंग सुविधा है। इस वेब टूल के जरिये कंप्यूटर के कीबोर्ड पर कोई अक्षर टाइप करते ही उसकी आवाज उभरेगी। इस प्रकार कर्मचारी आसानी से हिंदी सीख जाएंगे। इसके अलावा सरकार ने उत्कृष्ट हिंदी साहित्य लेखन के डिजिटलीकरण करने का फैसला भी किया है, ताकि नामचीन लेखकों की रचनाएं इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हो सकें।

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    पढ़ेंः हिंदी के लिए अनूठा अवसर

    आधिकारिक भाषा (राजभाषा) विभाग के सचिव गिरीश शंकर ने 11वें विश्व हिंदी दिवस समारोह के दौरान रविवार को यह जानकारी दी। उनके अनुसार उत्कृष्ट हिंदी साहित्य के डिजिटलीकरण की दिशा में काम भी शुरू हो गया है। बकौल शंकर, 'सरकारी कर्मचारियों के बीच हिंदी पढ़ना-लिखना आसान करने के लिए हमने कंप्यूटरों को वेब टूल्स से लैस किया है। उनके स्वत: हिंदी सीखने के लिए हमने इन पर ऑडियो टाइपिंग सुविधा मुहैया कराई है।' उन्होंने बताया, 'हिंदी का अधिकाधिक उपयोग बढ़ाने के लिए हम प्रेमचंद और अन्य मशहूर लेखकों की रचनाएं वेब पर लाने जा रहे हैं। ताकि हिंदी साहित्य में कर्मचारियों की रुचि बढ़ाई जा सके।' ध्यान रहे कि हर वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है। पहली बार यह समारोह 2006 में शुरू किया गया था।

    हिंदी से नेपाली को खतरा नहीं

    काठमांडू : नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और जाने माने साहित्यकार लोकेंद्र बहादुर चंद ने हिंदी की जोरदार पैरवी की है। उनका कहना है कि नेपाल में इस भाषा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसे नेपाली भाषा का विरोधी नहीं समझा जाना चाहिए। भारतीय दूतावास में आयोजित विश्व हिंदी दिवस समारोह में चंद ने कहा, 'नेपाल में हिंदी काफी समय से प्रचलित है। हिंदी और नेपाली दोनों भाषाओं को समान रूप से प्रोत्साहित करने की जरूरत है।'

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