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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 11, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

धर्मातरण के आरोपों में घिरे चर्च का एफसीआरए लाइसेंस रद्द

By Ravindra Pratap SingEdited By:
Published: Wed, 11 Oct 2017 08:59 PM (IST)

गृहमंत्रालय के अनुसार 2016 में इनका कुल राजस्व लगभग 2400 करोड़ रुपये का था।

धर्मातरण के आरोपों में घिरे चर्च का एफसीआरए लाइसेंस रद्द
धर्मातरण के आरोपों में घिरे चर्च का एफसीआरए लाइसेंस रद्द

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। धर्म परिवर्तन के विवादों में घिरे विलिवर्स चर्च और उससे जुड़े तीन एनजीओ अब विदेशों से फंडिंग नहीं ले सकेंगे। गृहमंत्रालय ने उनका एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया है। 2016 में इन चारों को सबसे अधिक विदेशी फंड मिला था। वैसे गृहमंत्रालय एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने के फैसले को धर्मांतरण से जोड़े जाने से सहमत नहीं है। उसका कहना है कि एफसीआरए के नियमों का पालन नहीं करने के कारण लाइसेंस रद्द किया गया है।

गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि केपी योहान्नन के विलिवर्स चर्च और उससे जुड़े तीन एनजीओ अयाना चैरिटेबल ट्रस्ट (पूर्व नाम गोस्पेल फार एशिया), लव इंडिया मिनिस्ट्रीज और लास्ट आवर्स मिनिस्ट्री के एफसीआरए को लाइसेंस को रद्द कर दिया है। इन सभी पर विदेशों से मिली फंडिंग को खर्च करने में एफआइआरए के नियमों का पालन नहीं करने का आरोप है। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग के आरोप में इस साल अभी तक लगभग 4900 एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस रद्द किये जा चुके हैं।

गौरतलब है कि विलिवर्स चर्च और उससे जुड़े एनजीओ को 2016 के दौरान सबसे अधिक 1348.65 करोड़ रुपये की विदेश से सहायता मिली थी। इनमें अकेले अयाना चैरिटेबल ट्रस्ट को 826.27 करोड़ की विदेशी फंड मिला था। वहीं विलिवर्स चर्च को 342.62 करोड़ रुपये, लव इंडिया मिनिस्ट्रीज 76.23 करोड़ रुपये और लास्ट आवर्स मिनिस्ट्री 103.51 करोड़ रुपये का विदेशी फंड मिला था। यही नहीं, इस चर्च और उससे जुड़े एनजीओ ने देश के भीतर भी काफी धन जुटाया था। गृहमंत्रालय के अनुसार 2016 में इनका कुल राजस्व लगभग 2400 करोड़ रुपये का था। हिंदू संगठन विलिवर्स चर्च पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगाते रहे हैं। वैसे चर्च इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

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