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    सजगता ने सिमटाया हुदहुद का खतरा

    By anand rajEdited By:
    Updated: Mon, 13 Oct 2014 10:19 AM (IST)

    पर्याप्त सजगता, अत्यंत सावधानी और बेहतर तालमेल ने रविवार को आए प्रकृति के एक बड़े प्रकोप का असर बहुत कम कर दिया। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में दो सौ किलोमी ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली (जागरण ब्यूरो)। पर्याप्त सजगता, अत्यंत सावधानी और बेहतर तालमेल ने रविवार को आए प्रकृति के एक बड़े प्रकोप का असर बहुत कम कर दिया। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में दो सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आए हुदहुद तूफान ने दम तो खूब दिखाया, मगर यहां से बड़ी संख्या में लोगों को पहले ही सुरक्षित जगहों पर भेजा जा चुका था। हालांकि, अभी यह खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। अभी ओडिशा में तूफान की आशंका के साथ ही पश्चिम बंगाल, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में तेज आंधी और भारी बारिश का खतरा बना रहेगा। राज्य सरकारों के साथ मिल कर केंद्रीय एजेंसियां भी पूरी चौकसी बरत रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर पूरी मदद का भरोसा दिलाया है।

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    रविवार को दो सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आए हुदहुद तूफान से निपटने के लिए राज्यों के प्रशासन के साथ ही केंद्र ने भी पूरी तरह कमर कसी हुई थी। ऐसे काम के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित और आधुनिक संसाधनों से लैस राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ) की 42 टीमें आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तैनात हैं। इसी तरह वायु सेना और नौसेना भी अपने-अपने स्तर पर राहत और बचाव कार्य में मदद कर रही हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बात की। इसमें उन्होंने केंद्र की ओर से पूरी मदद का भरोसा दिलाया। उधर, गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी आंध्र प्रदेश और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर विभिन्न एजेंसियों के तालमेल का जायजा लिया। प्रधानमंत्री के निर्देश पर कैबिनेट सचिव ने सुबह ही राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) की बैठक बुलाई और उसके बाद से लगातार सारी तैयारियों पर सीधी नजर बनाए रहे। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में शाम को भी एनसीएमसी की बैठक हुई और प्रभावित इलाकों में संचार और बिजली व्यवस्था की बहाली पर चर्चा की गई। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में एक बार इसका खतरा पूरी तरह से टल जाने के बाद ही संपत्ति और ढांचागत सुविधाओं को हुए नुकसान के बारे में सही आकलन किया जा सकेगा।

    आंध्र सरकार ने किया स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

    आापदा से निपटने के लिए आंध्र सरकार ने देश में पहली बार इसरो और एनआरएससी की मदद से स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया।

    आंध्र के तटीय इलाकों में तबाही का आलम

    तेज हवाएं, उखड़े पेड़, उजड़े झुग्गी झोपड़ी और टूटे बिजली के तार चक्रवाती तूफान हुदहुद के कहर को बयां करने के लिए काफी हैं। आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में तूफान की सबसे अधिक तबाही देखी गई है। यह चक्रवाती तूफान तटीय जिलों विशाखापत्तनम, श्रीकाकुलम और विजयनगरम जिलों से रविवार को टकराया। इन इलाकों में 170 से 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं,जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह बिगड़ गया। भीषण तूफान के चलते विशाखापत्तनम में पहले भूस्खलन हुआ। फिर तूफानी हवाओं ने पेड़ों को उखड़ा। झोपड़ियों के छत व शेड उड़ गए। साथ ही भारी बारिश ने मुश्किलों को और बढ़ा दिया। विशाखापत्तनम और श्रीकाकुलम में बिजली के खंभे, तार और होर्डिग्स सड़कों पर गिर पड़े। प्रचंड तूफान का प्रभाव सबसे अधिक विशाखापत्तनम में दिखाई पड़ा। विशाखापत्तनम के कुछ लोगों ने बताया, तेज हवाओं के चलते खिड़कियां टूट गईं। तूफान की वजह से विशाखापत्तनम और श्रीकाकुलम में संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    13.5 लाख लोग निकाले गए

    आंध्र प्रदेश सरकार ने तूफान से पहले ही लगभग ढाई लाख लोगों को उनके स्थान से निकालकर सुरक्षित जगहों पर भेज दिया था। ओडिशा सरकार ने भी एक लाख लोगों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया। राज्य में प्रभावित लोगों के लिए 604 कैंप बनाए गए हैं।

    ऐसे कमजोर पड़ा तूफान

    विशाखापत्तनम में तट से टकराने के बाद तूफान कमजोर पड़ गया। दिल्ली में मौसम विभाग के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौर ने बताया कि भौगोलिक स्थिति के कारण तूफान की तीव्रता पहले छह घंटे में कम हुई और उसके अगले 12 घंटे में यह और कम हो जाएगी। हालांकि विजाग क्षेत्र में अगले तीन दिन तक भारी से बहुत भारी वर्षा का खतरा बना रहेगा।

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