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    उमर के साथ खड़ी केंद्र सरकार

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    Updated: Mon, 12 Aug 2013 10:50 PM (IST)

    जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हुई हिंसा को लेकर कठघरे में घिरी उमर अब्दुल्ला सरकार के साथ केंद्र पूरी मुस्तैदी से खड़ा है। गृह मंत्री की भी जिम्मेदारी स ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हुई हिंसा को लेकर कठघरे में घिरी उमर अब्दुल्ला सरकार के साथ केंद्र पूरी मुस्तैदी से खड़ा है। गृह मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल रहे वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने राज्यसभा में खुलकर उनका बचाव किया। यह भी माना कि राज्य में कई तरह की चुनौतियां हैं। उनमें घुसपैठ सबसे बड़ी चुनौती है। आतंकवाद की समस्या है। दो समुदायों के बीच तनाव है। ऐसी भी शक्तियां हो सकती हैं, जिन्हें सीमा पार से मदद मिल रही हो, लेकिन इन सबके बावजूद सरकार वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखेगी और 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन वाली स्थिति किसी कीमत पर नहीं आने देगी।

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    पी. चिदंबरम ने सोमवार को राज्यसभा में सदस्यों को यह भरोसा दिया कि किसी का पलायन नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने नौ अगस्त को भाजपा नेता अरुण जेटली को किश्तवाड़ जाने से रोकने के मामले में अब्दुल्ला सरकार का बचाव किया। स्पष्ट किया कि जरूरतों के लिहाज धारा-144 राज्य सरकार लागू करती है। उसके तहत किसी को रोके जाने का ताल्लुक किसी नेता के दर्जे, जातीय या लैंगिक भेदभाव से नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही वहां स्थिति सामान्य हो जाएगी। तब वहां नेता विपक्ष ही नहीं, कोई भी जा सकता है। वह खुद भी जाएंगे। उन्होंने बताया कि किश्तवाड़ में दो लोग मारे गए हैं। एक दूसरे क्षेत्र में मारा गया है। कुल तीन लोग मारे गए हैं। जिनमें एक हिंदू, दो मुसलमान हैं, लेकिन तीनों ही भारतीय हैं।

    राज्यसभा में उपसभापति कुरियन और चिदंबरम भिड़े

    नई दिल्ली। एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में वित्तमंत्री पी चिदंबरम और राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन के बीच सदन की कार्यप्रणाली को लेकर तकरार हो गई। इसकी वजह से सदन में हंगामा हो गया और सदन की कार्यवाही को करीब एक बाधित रही।

    विवाद दोपहर में तब शुरू हुआ जब कुरियन ने विपक्ष के नेता अरुण जेटली को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ की स्थिति पर बोलने को कहा। पिछले हफ्ते वहां हिंसा हुई थी। इससे पहले भाजपा के सदस्यों की ओर जेटली को इस मुद्दे पर बोलने देने की जोरदार ढंग से मांग की गई थी क्योंकि रविवार को उन्हें किश्तवाड़ जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसी बीच चिदंबरम ने कहा कि वह इस मुद्दे पर एक बयान देना चाहते हैं और उन्हें बोलने का पहले मौका दिया जाना चाहिए। इस पर कुरियन ने कहा कि वह जेटली को पहले ही बोलने को कह चुके हैं। वित्त मंत्री अपना बयान उनके बाद दे सकते हैं। उन्होंने चिदंबरम से कहा कि यदि उन्हें बयान देना था तो उन्हें इसके बारे पहले ही अवगत करना चाहिए था। इस पर नाराज होकर चिदंबरम ने कहा कि यह पूरी तरह से नया प्रचलन है। मैं इसका विरोध हर हाल में दर्ज कराऊंगा।

    चिदंबरम के सहयोगी अहमद पटेल, अंबिका सोनी और सत्यव्रत चतुर्वेदी ने चिदंबरम के समर्थन में उतर आए और उन्होंने उपसभापति से सरकार को इस मुद्दे पर पहले बयान देने का मौका देने को कहा। भाजपा ने इस मांग का विरोध शुरू किया। सरकार की मांग कुरियन ने नहीं मानी। हंगामा जारी रहने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। बैठक दोबारा शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा। अंत में तय यह हुआ कि जेटली के बाद बसपा सदस्य सतीश मिश्र बोलेंगे उसके बाद चिदंबरम बयान देंगे।

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