पहाड़ सी चुनौती होगी अफसरों, कारोबारियों को जीएसटी का पाठ पढ़ाना
सूत्रों की मानें तो सरकार ने इस चुनौती को भांपते हुए अभी से जीएसटी को लागू करने की जरूरी तैयारियां शुरु कर दीं।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली । दशक भर राजनीति की मंझधार में गोते खाने के बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अब मूर्तरूप लेने के करीब तो पहुंच गया है लेकिन इसको जमीन पर उतारने को सरकार को ऐड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। जीएसटी के लिए जरूरी संविधान संशोधन विधेयक राज्य सभा से पारित होने के बाद सरकार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती केंद्र और राज्यों के अधिकारियों और कारोबारियों को इस कानून का पाठ पढ़ाना है जिन्हें रोजमर्रा के कामकाज में जीएसटी से दो-चार होना पड़ेगा। इसके लिए न सिर्फ व्यवसाइयों को जागरुक बनाने की चुनौती होगी बल्कि जीएसटी के सूचना प्रौद्योगिकी ढांचे 'जीएसटीएन' को भी 60 से 70 लाख कारोबारियों की सेवा के लिए सुचारु बनाना होगा।
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सूत्रों की मानें तो सरकार ने इस चुनौती को भांपते हुए अभी से जीएसटी को लागू करने की जरूरी तैयारियां शुरु कर दीं। जीएसटी लागू करने की प्रस्तावित तारीख एक अप्रैल 2017 से पहले वित्त मंत्रालय ने जीएसटीएन पोर्टल को परखने की तैयारी कर ली है। इसी के तहत अक्टूबर से ही चुनिंदा कारोबारियों, अधिकारियों और कर पेशेवरों के लिए यह पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा ताकि इससे संबंधित व्यवहारिक दिक्कतों को दूर किया जा सके।
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सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने अपने प्रशिक्षण संस्थान तथा राजस्व अकादमी को प्रशिक्षण कार्य के लिए तैयारी करने को कहा है। इसके साथ ही 2000 से अधिक ट्रेनर्स ऑफ ट्रेनर भी तैयार किए जा रहे हैं। ये ऐसे प्रशिक्षक होंगे जो देशभर में इस सिस्टम का इस्तेमाल एकाउंटेंट, वकीलों, कर अधिकारियों और पेशेवरों को प्रशिक्षित करेंगे। यह सब कवायद इसलिए हो रही है कि जब मौजूदा वैट या केंद्रीय उत्पाद शुल्क जैसे लगभग डेढ़ दर्जन परोक्ष कर समाप्त होंगे तो नए जीएसटी को लागू करने और व्यवसाइयों को उसका पालन करने में किसी भी प्रकार की दिक्कत न आए। साथ ही सरकार यह मानकर चल रही है कि सुदृढ़ सूचना प्रौद्योगिकी तंत्र होने से जीएसटी का पालन बेहतर ढंग से होगा। साथ ही कर प्रशासन मंे सक्षमता आने से कर चोरी रुकेगी जिससे अधिकांश वस्तुओं पर कर का बोझ भी कम होगा जिससे उपभोक्ताओं को फायदा होगा।
क्या है जीएसटीएन?
जीएसटी नेटवर्क एक ऐसा प्लेटफार्म है जिसका इस्तेमाल कर कारोबारी जीएसटी की राशि और रिटर्न ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। वहीं केंद्र और राज्य सरकारें अपने-अपने जीएसटी का लेखा-जोखा भी इसके माध्यम से रख सकेंगी। सरकार ने इस पोर्टल को संभालने के लिए जीएसटीएन नाम से कानून की धारा 25 के तहत एक निजी कंपनी बनायी है जिसमें केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी 24.5 - 24.5 प्रतिशत है। शेष 51 प्रतिशत हिस्सेदारी एलआइसी हाउसिंग फाइनेंस, आइसीआइसीआइ बैंक, एचडीएफसी और एनएसई स्ट्रेटिजिक इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन के पास है। इस पोर्टल का प्रबंधन देश की जानी मानी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इन्फोसिस करेगी।
कैसे काम करेगा जीएसटीएन
1. कारोबारी जीएसटीएन पोर्टल पर अपने मोबाइल नंबर और पैन नंबर के माध्यम से पंजीकरण करा सकेंगे।
2. जीएसटीएन पर पंजीकरण कराने पर 15 डिजिट की एक संख्या कारोबारी को मिलेगी
3. जीएसटीएन पोर्टल का इस्तेमाल केंद्र, राज्य सरकारें और कारोबारी एक साथ अपने-अपने कार्य के लिए कर सकें
4. कारोबारी इस पोर्टल की मदद से केंद्र और राज्य का जीएसटी जमा कर सकेंगे और रिटर्न फाइल कर सकेंगे।
5. कारोबारी छोटे हों या बड़े उन्हें कर अधिकारियों से संपर्क करने की जरूरत नहीं होगी वे सिर्फ इसी पोर्टल के माध्यम से कर अधिकारियों से संपर्क कर सकेंगे।
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