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    जीएसटी बिल प्रधानमंत्री मोदी की सुधारवादी छवि को बनाएगा विश्वसनीय

    By Rajesh KumarEdited By:
    Updated: Wed, 03 Aug 2016 04:54 PM (IST)

    जीएसटी बिल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साल 2014 में सत्ता में आने के बाद सबसे बड़ा सुधारवादी कदम है।

    नई दिल्ली। वित्तमंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को राज्यसभा में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) बिल पेश करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में यह सबसे महत्वपूर्ण कर सुधार है। उन्होंने इसके लिए सभी दलों को समर्थन देने पर उनका आभार जताया।

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    राज्यसभा में वित्तमंत्री ने कहा, "जीएसटी के बारे में एक व्यापक आम सहमति बनी है। मैं सभी विपक्षी दलों को इसके लिए धन्यावाद करता हूं। इसके साथ ही, खासकर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद को इसके लिए शुक्रिया करता हूं।"

    उन्होंने जीएसटी की विशेषता बारे में बताते हुए कहा, "यह भारत को एक समान आर्थिक बाज़ार (यूनिफॉर्म इकॉनोमिक मार्केट) में बदल कर रख देगा। यूनिफॉर्म टैक्स दर के जरिए बिना किसी बाधा के वस्तु एवं सेवा देशभर में पहुंच पाएंगे और किसी तरह के छल-कपट को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।"

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    वित्तमंत्री ने आगे कहा कि जीएसटी बिल राज्य को और सशक्त बनाएगा और राज्य के साथ ही केन्द्र की आय को भी बढ़ाएगा। इसके आगे उन्होंने कहा कि जीएसटी बिल आर्थिक गति और रफ्तार देगा क्योंकि टैक्स के ऊपर और कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा।

    जीएसटी मोदी की सुधारवादी छवि को निखारेगा

    जीएसटी बिल मौजूदा केन्द्र और राज्य सरकार की तरफ से लगाए जा रहे करों की जगह पर लागू किया जाएगा और यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद सबसे बड़ा सुधारवादी कदम है। जीएसटी बिल पास होने पर पीएम मोदी की सुधारवादी छवि को और बल मिलेगा। अगर यह जीएसटी बिल पास हो जाता है तो यह स्वतंत्र भारत में अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार होगा।

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    जीएसटी लागू होने के बाद उपभोक्ताओं पर टैक्स लगाया जाएगा ना कि इसके उत्पादकों के ऊपर। संसद में जीएसटी बिल के पास होने के बाद इसे राज्यों की सहमति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद, अंत में एक स्पेशल जीएसटी काउंसिल की बैठक बुलाई जाएगी जिसमें राज्य के वित्तमंत्री भी शामिल होंगे। उन्हें उन पर अपनी सहमति देनी होगी जिसमें कर की दर भी शामिल होगी। ये सब पूरा होते-होते करीब एक साल का समय लग जाएगा।