Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    हत्या मामले में राम रहीम के खिलाफ खट्टा सिंह गवाही देने को तैयार, कहा- खोलूंगा पोल

    By Kamlesh BhattEdited By:
    Updated: Sat, 16 Sep 2017 04:47 PM (IST)

    छत्रपति व रणजीत हत्याकांड में आज गुरमीत राम रहीम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में पेश हुआ। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। ...और पढ़ें

    हत्या मामले में राम रहीम के खिलाफ खट्टा सिंह गवाही देने को तैयार, कहा- खोलूंगा पोल

    जेएनएन, चंडीगढ़। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और पूर्व डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्याकांड की सुनवाई अब सीबीआइ कोर्ट में अलग-अलग होगी। शनिवार को दोनों केस सुनवाई के लिए रखे गए थे, मगर सीबीआइ ने पहले रणजीत मर्डर केस में गवाहों के बयानों को पढ़कर सुनाया। बाद में समय पूरा होने के कारण सुनवाई सोमवार 18 सितंबर तक के लिए टाल दी गई।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    उधर, सीबीआइ कोर्ट में गुरमीत की पेशी सुनारिया जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई। इस दौरान उसने सफेद रंग का कुर्ता-पजामा पहन रखा था और बाल खुले छोड़ रखे थे। रणजीत सिंह की हत्या मामले के अभियुक्त कृष्ण लाल, अवतार सिंह, जसबीर, सबदिल और इन्द्रसेन कोर्ट में पेश हुए। दूसरी ओर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या मामले में अभियुक्त निर्मल सिंह, कृष्ण लाल और कुलदीप पेश किए गए। रामचंद्र छत्रपति केस में फाइनल बहस 22 सितंबर से शुरू होगी।

    सीबीआइ के अनुसार रणजीत मर्डर केस में तीन गवाह महत्वपूर्ण थे। इनमें दो चश्मदीद सुखदेव सिंह और जोगिंद्र सिंह हैं, जिन्होंने अभियुक्तों को रणजीत सिंह पर गोली चलाते हुए देखा था। तीसरा गवाह गुरमीत का ड्राइवर खट्टा सिंह था, जिसके सामने रणजीत को मारने के लिए कहा गया था।

    सीबीआइ के अनुसार 10 जुलाई 2002 को डेरा सच्चा सौदा में मैनेजर रहे रणजीत सिंह की हत्या हो गई थी। वह यौन शोषण मामले में साध्वी के गुमनाम खत के आने से कुछ समय पहले ही अपनी बहन के साथ डेरा छोड़कर अपने घर कुरुक्षेत्र चला गया था। डेरा प्रमुख गुरमीत को शक था कि उक्त खत के पीछे रणजीत सिंह ही है। इसलिए पहले उसे समझाने का प्रयास किया गया। बाद में गुरमीत के कहने पर रणजीत सिंह की हत्या कर दी गई।

    सीबीआइ के वकील एचपीएस वर्मा ने बताया कि करीब सात घंटे तक चली कार्यवाही के दौरान सीबीआइ की ओर से रणजीत सिंह मर्डर केस में 31 गवाहों के बयान पढ़कर सुनाए गए। अब कोर्ट तय करेगा कि खट्टा सिंह को गवाही देनी है या नहीं। कोर्ट ने छत्रपति मामले की सुनवाई 22 सितंबर तक टाल दी है, जबकि रणजीत हत्याकांड में सोमवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। खट्टा सिंह ने बताया कि सुनवाई के दौरान राम रहीम हाथ जोड़े खड़ा रहा। वह काफी हताश और निराश था। खट्टा के मुताबिक पहले और अब में राम रहीम में बहुत फर्क नजर आया। जो राम रहीम पहले नाचता था वह अब सहमा नजर आया।

    दोनों हत्याओं के मामले में सात अन्य आरोपी निर्मल सिंह, कृष्ण लाल, कुलदीप, अवतार सिंह, जसबीर, सबदिल और इन्द्रसेन को भी अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के मद्देनजर रोहतक, पंचकूला सहित राज्यभर में सुरक्षा कड़ी रही। रोहतक में सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन द्वारा 15 ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। साथ ही अर्धसैनिक और पुलिस के जवान पेशी के दौरान संदिग्ध लोगों पर विशेष नजर रख रहे हैं।

    बता दें, पत्रकार छत्रपति और डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या मामलों में शनिवार को फाइनल बहस हुई। रोहतक जेल में यह पहला मौका था जब किसी कैदी की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरियाणा के नए गृह सचिव एसएस प्रसाद, पुलिस महानिदेशक बीएस संधू, चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक और पंजाब के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ बैठक की।

    पंचकूला सीबीआइ कोर्ट के बाहर तैनात पुलिस बल।

    गृह सचिव व डीजीपी ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए कदमों की जानकारी दी। राज्य में अभी 33 कंपनियां अद्र्धसैनिक बलों की तैनात हैैं। गुरमीत राम रहीम की पेशी के बाद फिर से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी। उसके बाद पंचकूला, सिरसा और रोहतक जिलों को छोड़कर बाकी जिलों से अद्र्धसैनिक बलों की कंपनियों को वापस भेजा जा सकता है।

    रणजीत व छत्रपति मर्डर केस भी 15 साल पुराने

    10 जुलाई 2002 को डेरे की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत का मर्डर हुआ था। डेरा प्रबंधन को शक था कि रणजीत ने साध्वी यौन शोषण की गुमनाम चिट्ठी अपनी बहन से ही लिखवाई थी। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत के पिता ने जनवरी 2003 में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की। वहीं 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा के सांध्य दैनिक 'पूरा सचÓ के संपादक रामचंद्र छत्रपति को पांच गोलियां मारी गई थी, जिसके बाद 21 नवंबर 2002 को रामचंद्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मृत्यु हो गई।

    बताया जाता है कि अपने अखबार में साध्वी यौन शोषण मामले को उठाने पर ही रामचंद्र छत्रपति की हत्या की गई। जनवरी 2003 में पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की। इसके बाद हाई कोर्ट ने पत्रकार छत्रपति व रणजीत हत्याकांड की सुनवाई एक साथ करते हुए 10 नवंबर 2003 को सीबीआइ को एफआइआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए। दिसंबर 2003 में सीबीआइ ने छत्रपति व रणजीत हत्याकांड में जांच शुरू की। डेरे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच पर रोक की मांग की। नवंबर 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने डेरे की याचिका खारिज कर दी।

    पंचकूला में पैरामिलिट्री व पुलिस तैनात

    गुरमीत राम रहीम की पेशी भले ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई, लेकिन पंचकूला स्थित सीबीआइ कोर्ट की सुरक्षा कड़ी रही। पंचकूला कोर्ट में हरियाणा पुलिस और पैरामिलिट्री को तैनात किया गया है। राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में सजा सुनाने वाले जज जगदीप सिंह ने ही रणजीत सिंह व रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड की सुनवाई की।

    कानून तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई

    रोहतक के एसपी पंकज नैन ने कहा कि गुरमीत राम रहीम की पेशी को देखते हुए सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। अगर किसी भी व्यक्ति ने कानून तोडऩे का प्रयास किया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिले की सभी सीमाओं पर वाहनों की जांच के साथ-साथ संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी शुरू कर दी है।

    यह भी पढ़ेंः टूट रहा गुरमीत का भ्रमजाल, करोड़ों नहीं साढ़े चार लाख हैं डेरा के अनुयायी