नई दिल्‍ली (आनलाइन डेस्‍क)। यूक्रेन युद्ध के चलते जहां एक तरफ रूस की गैस के बिना यूरोप ऊर्जा संकट की मार झेल वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं जहां पर ये संकट दूसरे देशों की तुलना में लगभग न के ही बराबर है। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था जर्मनी का रूस की गैस आपूर्ति के बंद होने से बुरा हाल है। उसकी अर्थव्‍यवस्‍था का पहिया इसके बिना रुक सा गया है। वहीं दूसरी तरफ यूरोप की तीसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था इटली को कोई समस्‍या नहीं है। ऐसा नहीं है कि इटली रूस की गैस का इस्‍तेमाल नहीं करता है और उसके बंद हो जाने से उसको परेशानी नहीं हुई है। लेकिन, इटली ने समय रहते जो उपाय किए हैं उसकी ही बदौलत आज इटली इस स्थिति में पहुंच गया है कि जिस समस्‍या से पूरा यूरोप हलकान हो रखा हे उससे वो दुखी नहीं है। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है कि आखिर इटली ने ऐसा क्‍या किया है।

समय रहते कवायद कर दी थी शुरू 

दरअसल, जिस वक्‍त यूक्रेन पर रूस से हमला शुरू किया था तभी इटली ने आने वाले बुरे संकेतों को डिकोड करना भी शुरू कर दिया था। यूक्रेन पर बढ़ते हमलों और इस युद्ध के बाद बदलते समीकरणों के बीच इटली की सरकारी एनर्जी कंपनी ईएनआई के सामने भी आने वाले दिनों में समस्‍या बढ़ने के आसार दिखाई दे रहे थे। ऐसे में कंपनी के सीईओ ने गैस आपूर्ति के लिए अफ्रीका का रुख किया था। अल्‍जीरिया, ट्यूनेशिया, लीबिया, अंगोला, मिस्र और कांगों में कंपनी ने गैस सप्‍लायर से बैठकें की। ईएनआई ने अफ्रीकी गैस सप्‍लाई कंपनियों से अपने पुराने संबंधों का भी फायदा उठाया। कंप‍नी ने इन बैठकों में ये सुनिश्चित किया कि अफ्रीकी देशों से होने वाली गैस सप्‍लाई की मात्रा को बढ़ाया जा सके, जिससे रूस की गैस का विकल्‍प उन्‍हें मिल सके।

हालात सुधरने का इंतजार करते रहे दूसरे देश 

इटली ने जब ये किया उस वक्‍त जर्मनी समेत दूसरी अधिकतर यूरोपीय देश केवल यूक्रेन युद्ध के बंद होने का या हालात सुधरने का ही इंतजार कर रहे थे। उन्‍हें इस बात का अंदाजा भी नहीं हो सका कि हालात इस कदर बुरे हो जाएंगे कि सर्दियां काटनी उनके लिए मुश्किल हो जाएगी। इस जंग में रूस के खिलाफ यूक्रेन का साथ देकर और उसको हथियारों की सप्‍लाई कर वो खुद को मुश्किल दौर में डालते चले गए। इस तरह से वो इस संकट से उबरने का प्‍लान समय से नहीं बना सके। जर्मनी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। रूस की गैस के बिना जर्मनी मंदी की मार झेलने को मजबूर है। अब जबकि उसके सामने स्थिति भयावह हो गई है तो वो छटपटा रहा है और देश की प्रमुख एनर्जी कंपनियों का राष्‍ट्रीयकरण कर रहा है।

बेहतर स्थिति में इटली 

दूसरी तरफ इटली को मिली अफ्रीकी मदद की बदौलत उसको गैस का कोटा निर्धारित करने जैसी समस्‍या से भी दो-चार नहीं होना पड़ा है। सरकार ने भी दावा किया है कि ईली यूरोप के देशों से सबसे बेहतर स्थिति में है। रूस की गैस के बंद होने से जर्मनी, हंगरी और ऑस्ट्रिया की स्थिति सबसे अधिक खराब है। वहीं कम प्रभावित देशों में इटली, फ्रांस, स्वीडन और ब्रिटेन का नाम शामिल है। 1970 के दशक में पश्चिमी देशों में ऐसे ही हालात थे। उस वक्‍त इन देशों ने मध्यपूर्वी देशों, वेनेजुएला और मेक्सिको को विकल्‍प के तौर पर देखा था। जर्मनी की बात करें तो वहां पर अब एलएनजी के लिए 5 फ्लोटिंग टर्मिनल लीज पर लेने के लिये कदम बढ़ाये हैं। वहीं इटली के पास ऐसे 5 टर्मिनल हैं।

आंकड़ों पर एक नजर 

इटली ने वर्ष 2021 में 29 अरब क्यूबिक मीटर रूसी गैस का इस्तेमाल किया था, जो कि उसके कुल गैस आयात का करीब 40 फीसद थी। मौजूदा समय में ईटली ने दूसरे देशों से करीब करीब 10.5 अरब क्यूबिक मीटर गैस लेने का करार किया है जो इस सर्दी में उसको मिल जाएगी। इसमें अल्‍जीरिया से अधिकतर गैस आ रही है। अल्‍जीरिया ने ईटली को 20 फीसद गैस की सप्‍लाई बढ़ा दी है। अब वह इस साल करीब 25.2 अरब क्यूबिक मीटर तक इसको पहुंचा देगा। इसके साथ ही वो इटली को गैस का सबसे बड़ा सप्‍लायर बन जाएगा। 2023 में इटली को मिस्र, कतर, कांगो, नाईजीरिया और अंगोला से भी एलएनजी की सप्लाई शुरू हो जाएगी।

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Edited By: Kamal Verma

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