नई दिल्‍ली (कमल कान्‍त वर्मा)। रूस और यूक्रेन के युद्ध को छह माह पूरे हो चुके हैं। फिलहाल इस युद्ध के जल्‍द खत्‍म होने के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। इस बीच यूरोप पर पड़ती रूस की गैस की मार उनके लिए चिंता का सबक बनी हुई है। ऐसे में यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था जर्मनी ने कनाडा पर अपना दांव खेला है। लेकिन उसका ये दांव कितना सही होगा इसको लेकर कई तरह की चिंताएं भी उठ रही हैं। इस विस्‍तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि जर्मनी समेत यूरोप की क्‍या जरूरत है और कनाडा उसकी जरूरत पर कितना खरा उतरेगा और उसके साथ क्‍या परेशानियां हैं।

  • बीते छह माह के दौरान रूस लगातार यूरोप को होने वाली गैस की सप्‍लाई को कम करता रहा है। इतना ही नहीं इस दौरान कई बार गैस की सप्‍लाई को उसने बंद भी किया है। ऐसे में जर्मनी और समूचा यूरोप अपने लिए एक नया विकल्‍प तलाश रहा है। जर्मनी ने कनाड़ा के रूप में विकल्‍प तलाशा है। जर्मनी को रूस की गैस की सबसे अधिक जरूरत होती है। उसकी अर्थव्‍यवस्‍था को चलाने के लिए ये फिलहाल इकलौता रामबाण है। लेकिन लगातार रूस की तरफ से खड़ी की जाने वाली परेशानियों के चलते जर्मनी नए विकल्‍प को तलाशने के लिए मजबूर हुआ है।
  • दूसरी तरफ कनाडा दुनिया में प्राकृतिक गैस का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके बावजूद भी जर्मनी को गैस की सप्‍लाई करना उसके लिए एक बड़ी चुनौती है। इसकी वजह ये है कि उसके पूर्वी तट की ओर कोई प्राकृतिक गैस का कोई बंदरगाह नहीं है। ऐसे में उसके पास केवल एक विकल्‍प बचता है कि वो यूरोप तक पाइपलाइन के जरिए गैस सप्‍लाई की राह खोले। इसमें एक सबसे बड़ी दिक्‍कत ये है कि यदि कनाडा से केवल जर्मनी ही गैस खरीदता है तो ऐसे में इसकी कीमत कहीं अधिक होगी। ये जर्मनी के लिए भी मुनाफे का सौदा नहीं होगा।
  • कनाडा के लिए समुद्र के रास्‍ते पाइपलाइन डालना भी कोई आसान काम नहीं होगा। इस काम में भी कई महीनों का समय लगेगा। कनाडा और जर्मनी में यदि गैस को लेकर समझौता हो भी जाता है तो भी कनाडा तुरंत जर्मनी को गैस सप्‍लाई नहीं कर सकेगा। यूरोप में अकेले जर्मनी के गैस खरीदने की सूरत में कनाडा को उन सभी देशों को इसकी कीमत देनी होगी जहां से ये गुजरेगी। इसके लिए कनाडा को उन देशों से भी करार करना जरूरी होगा। पाइपलाइन का खर्च और समय दोनों ही काफी अधिक होंगे। इसके बाद भी कनाडा उतनी गैस दे पाएगा जितनी रूस देता है इसको लेकर भी बड़ा सवाल है।
  • जर्मनी की कोशिश है कि वो हर हाल में वर्ष 2024 तक रूस से गैस का आयात पूरी तरह बंद कर दे। लिहाजा वो जल्‍द ही नया साझेदार चाहता है। इसके साथ ही वो ये भी सुनिश्चित करना चाहता है कि उसकी अर्थव्‍यवस्‍था का पह‍िया न रुक सके। लेकिन इसमें रूस अपनी टांग अड़ा सकता है। यदि कनाडा और जर्मनी में ये सौदा हो जाता है तो रूस जर्मनी को जबरदस्‍त झटका देते हुए गैस की सप्‍लाई पूरी तरह बंद कर सकता है। इसके अलावा उसके पास ये भी विकल्‍प है कि वो गैस की कीमतों को बढ़ा दे। पहले से ही प्राकृतिक गैस की कीमत रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से काफी अधिक हो चुकी है।

Edited By: Kamal Verma

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