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    Venezuela Crisis: तेल, ड्रग्स या कुछ और... वेनेजुएला में अमेरिकी हमले के बाद भारत पर पड़ेगा कितना असर?

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 09:18 PM (IST)

    अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया। 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' का मकसद ड्रग्स या तेल भंडार पर नियंत्रण ...और पढ़ें

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    अमेरिका ने वेनेजुएला पर किन कारणों से किया हमला?

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका ने वेनेजुएला पर विस्फोटक हमला किया। अमेरिकी सेना इस हमले में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को अपने साथ गिरफ्तार करके ले गई। अमेरिका के वेनेजुएला पर हमला करने से पूरी दुनिया में अफरा-तफरी का माहौल है।

    भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि "वेनेजुएला में जो कुछ हो रहा है, वो चिंता का विषय है। हमने बारीकी से इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुई है।"

    अमेरिका ने वेनेजुएला पर ये हमला 2 से 3 जनवरी की दरमियानी रात किया। अमेरिका की तरफ से करीब रात के 2 बजे वेनेजुएला की राजधानी काराकास में 150 एयरक्राफ्ट ने हमला किया, जिसमें पूरी राजधानी में बम के गोले दागे गए। आधी रात हुए इस हमले को देखते हुए लोग डरकर अपने घरों से बाहर निकले।

    अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के घर में घुसकर हमला किया और आधे घंटे के अंदर वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हिरासत में ले लिया। अमेरिका ने इस मिशन को "ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व" नाम दिया।

    अमेरिकी सेना इस हमले की तैयारी करीब पांच महीने से कर रही थी। वहीं सेना से यह मिशन पांच घंटे में पूरा कर दिया। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने अगस्त से ही निकोलस मादुरो की हर हरकत पर नजर रखनी शुरू कर दी थी।

    इन एजेंसियों ने मादुरो के खाने-पीने से लेकर घूमने-फिरने तक हर बात को मॉनिटर किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हमले से चार दिन पहले ही अमेरिकी सेना को इस मिशन की इजाजत दे दी थी।

    इस मिशन का हिस्सा 15,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक बने। अमेरिका के इस हमले की खबर डोनल्ड ट्रंप के अलावा उनकी कोर टीम के सदस्य वरिष्ठ सहयोगी स्टीफन मिलर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और CIA के निदेशक जॉन रैटक्लिफ को भी थी। अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन को पूरा निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करके किया।

    विदेश मामलों के जानकार और निकोलस मादुरो की राजनीति को करीब से जानने वाले रॉबिन्द्र सचदेव ने जागरण से बातचीत में कहा, "अमेरिका ने मादुरो के साथ उनकी पत्नी को भी गिरफ्तार इसलिए किया, क्योंकि मादुरो की पत्नी एक बहुत अच्छी वकील होने के साथ ही बेहतर पॉलिटिशियन भी हैं।"

    रॉबिन्द्र कहते हैं, "कहा जाता है कि मादुरो के पीछे उनकी पत्नी का दिमाग है और अगर अमेरिकी सेना मादुरो की पत्नी को छोड़कर आती तो वह वेनेजुएला के लोगों को अपनी ओर करने में कामयाब हो जाती। यह भी कहा जा सकता है कि ड्रग्स की अवैध तस्करी के मामले में वेनेजुएला की पत्नी पर भी आरोप लगे हों, जिस वजह से अमेरिकी सेना ने उन्हें भी गिरफ्तार किया।"

    Venezuela president arrest by US Army

    दुनिया में तेल को लेकर छिड़ी जंग

    दुनियाभर में तेल के भंडार को लेकर जंग छिड़ी हुई है। रूस-यूक्रेन युद्ध भी तेल के भंडारण को लेकर लड़ा जा रहा है। अमेरिका इसे ड्रग तस्करों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई बता रहा है। लेकिन विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर ये हमला तेल के भंडारण को अपने कब्जे में लेने के लिए किया है।

    विदेश मामलों के जानकार कमर आगा ने जागरण से बातचीत में वेनेजुएला पर हुए हमले पर खुलकर बात की। कमर आगा ने इस हमले के लिए अमेरिका की निंदा की और कहा, "देश के नागरिकों को अधिकार होता है कि वे अपने राष्ट्रपति का चुनाव करें, न कि किसी और देश की सरकार इस बात का निर्णय लेगी। अगर मादुरो एक खराब राष्ट्रपति थे तो वेनेजुएला की जनता उन्हें बाहर करती। अमेरिकी ऐसा पहले भी कर चुके हैं। यह पहली बार नहीं है कि उन्होंने किसी देश के राष्ट्रपति को किडनैप किया हो। अमेरिका कह रहा है कि वो वेनेजुएला को गबन करेंगे और अब यहां पर हमारी ही हुकुमत होगी।"

    कमर आगा ने कहा, ""ये सभी लड़ाइयां, जो भी मिडिल ईस्ट में हो रही है, ईरान और रूस के साथ चल रही है, तेल के लिए ही हो रही हैं। ये लोग ईरान के लिए भी कह रहे हैं कि यहां भी सत्ता बदलनी चाहिए। ईरान के पास तेल और गैस बहुत हैं। वहीं रूस के पास भी गैस और तेल के भंडार हैं। अमेरिका काफी समय से कहता आ रहा है कि 21वीं सदी अमेरिका की है और इस सदी में अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए तेल पर अधिकार करना जरूरी है।"

    कमर आगा कहते हैं, "इराक के साथ लड़ाई की भी यही वजह थी, जिसकी वजह से सद्दाम हुसैन को हटाया गया। अमेरिका ने सऊदी अरब को तो नोटिस भी दे दिया है कि आपके जितने भी एसेट्स हैं वो अमेरिका के हवाले कर दें, क्योंकि अब हम ही तेल निकालेंगे और हम ही बेचेंगे। अमेरिका का मूल लक्ष्य है कि वो तेल के ऊपर कब्जा कर लें। अमेरिका सबसे ताकतवर मुल्क है, वो जो चाहता है वो कर रहा है, अब कोई अंतरराष्ट्रीय कानून तो बचे नहीं हैं।"

    रॉबिन्द्र सचदेव ने इस मामले को लेकर कहा कि "अमेरिका ने यह हमला कोकीन और गैंग वार के लिए तो किया ही, वहीं तेल के भंडारण को हासिल करने के लिए भी किया। वहीं देख जाए तो वेनेजुएला सीधे-सीधे चीन को तेल दे रहा था। लेकिन अमेरिका नहीं चाहता कि लैटिन अमेरिका की चीन में एंट्री हो या यहां चीन की साझेदारी बढ़े। अमेरिका साफ तौर पर चीन को वेनेजुएला से दूर रखते हुए इस क्षेत्र में केवल अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है।"

    Oil Refinery in Venezuela

    अमेरिका के हमले के बाद भारत को नुकसान?

    दिल्ली और काराकास के बीच 2005 में काफी मजबूत संबंध हुआ करते थे। वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज साल 2005 में 4-7 मार्च तक भारत दौरे पर भी आए थे। उस समय भारत के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह के साथ ह्यूगो चावेज की द्विपक्षीय वार्ता भी हुई थी। वहीं जब मार्च 2013 में चावेज का निधन हुआ, तब उस समय में यूपीए सरकार ने कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री सचिन पायलट को वेनेजुएला राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भेजा था।

    निकोलस मादुरो भी अगस्त 2012 में वेनेजुएला के विदेश मंत्री के तौर पर भारत आ चुके हैं। वे ट्रोइका विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए थे। सितंबर 2016 में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी एनएएम शिखर सम्मेलन के लिए वेनेजुएला गए थे।

    नरेंद्र मोदी की सरकार में भी वेनेजुएला के साथ रिश्ते बेहतर बने रहे। 2015 में भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 22 अप्रैल को जकार्ता, इंडोनेशिया में एशिया-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के दौरान वेनेजुएला के कार्यकारी उपराष्ट्रपति जॉर्ज अरेजा से मुलाकात की थी। वहीं भारत के विदेश मामलों के राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने उसी वर्ष 24-25 मई को काराकास का दौरा किया था।

    रॉबिन्द्र सचदेव ने भारत और वेनेजुएला के बीच ट्रेड डील को लेकर कहा कि "ONGC विदेश ने वेनेजुएला में ऑयल ब्लॉक में इनवेस्ट किया था। वहीं जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (JSPL) ने भी खनन और अयस्क के क्षेत्र में इनवेस्ट किया था। इसमें भारतीय कंपनियों को ज्यादा फायदा नहीं हुआ था। वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगने की वजह से भी भारत के साथ व्यापार घटता गया।"

    रॉबिन्द्र सचदेव ने आगे बताया कि "अमेरिका के वेनेजुएला पर हमला करने से दुनिया को यह फायदा होगा कि पेट्रोल और डीजल की कीमत काफी कम हो जाएगी। दुनिया में पेट्रोल और डीजल के दाम 40 से 45 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ सकते हैं।" आपको बता दें कि आज के समय में पेट्रोल और डीजल की औसत कीमत 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के करीब है।

    भारत और वेनेजुएला के बीच 2019-20 के दौरान करीब 6,397 मिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ करता था। लेकिन देखा जाए तो और 2022-2023 में यह 431 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक आ गया है।

    भारत और वेनेजुएला के बीच व्यापारिक संबंधों के कमजोर पड़ने पर विदेशी मामलों के विशेषज्ञ कमर आगा ने कहा कि "जब डोनल्ड ट्रंप पहली बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, तब से ही लगातार भारत और वेनेजुएला के बीच व्यापार कम होता जा रहा है। हम वेनेजुएला से तेल खरीदते थे, तब हमें सस्ता भी पड़ता था। भारत जिन देशों से तेल खरीदता है, उनके साथ 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार बहुत कम है।"

    America Venezuela Impact on India

    बुरी हालत में अमेरिका की अर्थव्यवस्था

    अमेरिका की अर्थव्यवस्था बुरी हालत में है। वहां के लोग सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी को लेकर काफी परेशान हैं। लेकिन अमेरिकी सरकार को लगता है कि तेल पर कब्जा करके सबकुछ सामान्य किया जा सकता है। अमेरिका में लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है और लोग सरकार से इसे लेकर सवाल भी कर रहे हैं।

    रॉबिंद्र सचदेवा ने बताया, "वेनेजुएला पर हमला करने का फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को मिल सकता है। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में इसी साल होने हैं, तब ट्रंप अमेरिका के लोगों को अपनी पावर बता सकते हैं। ट्रंप अमेरिकी लोगों से कह सकते हैं कि मैंने ड्रग्स की तस्करी करने वालों के खिलाफ कितनी बड़ी कार्रवाई की। वे लोगों को यह भी बता सकते हैं कि मैंने पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम कर दिए। इससे ट्रंप के पक्ष में वोट बढ़ सकते हैं।"

    रॉबिंद्र सचदेवा ने यह भी कहा, "अमेरिका में वेनेजुएला में करीब आठ से दस लाख लोग रहते हैं। वहीं मादुरो वेनेजुएला में तानाशाह बना बैठा था, तो इस हमले से अमेरिका में रह रहे वेनेजुएला के नागरिकों को खुशी मिली होगी। इस हमले का परिणाम यह होगा कि इन वेनेजुएला के नागरिकों का वोट शेयर भी डोनल्ड ट्रंप को मिल सकता है।"

    वेनेजुएला के बाद किस पर हमला करेगा अमेरिका?

    अमेरिका काफी समय से दुनिया के कई देशों को टैरिफ की धमकी भी दे रहा है। वहीं दूसरे देशों से तेल का भंडारण हासिल करने के लिए डरा-धमका रहा है। रॉबिन्द्र सचदेव से जब ये सवाल पूछा गया कि वेनेजुएला के बाद अमेरिका आने वाले समय में किस और देश पर हमला कर सकता है, तब विदेश मामलों के जानकार ने बताया, "अमेरिका के सामने इस समय तीन देश हैं- कोलंबिया, क्यूबा और मेक्सिको। कोलंबिया और क्यूबा पर तो अमेरिका तख्तापलट जैसी कार्रवाई कर सकता है, लेकिन मेक्सिको के साथ ऐसा करना अमेरिका के लिए भी मुश्किल हो सकता है।"

    रॉबिन्द्र सचदेव ने आगे बताया, "वेनेजुएला पर हमले के बाद भी अमेरिकी सरकार ने कोलंबिया को धमकी दे दी, क्योंकि कोलंबिया में भी लेफ्टिस्ट सरकार है, वो एंटी अमेरिका है और कोलंबिया से भी अमेरिका में ड्रग्स जाते हैं, तो अमेरिका, वेनेजुएला की तरह ही कोलंबिया पर हमला कर सकता है।"

    रॉबिन्द्र कहते हैं, "अमेरिका के प्रतिबंध लगाने की वजह से क्यूबा को जो सस्ता तेल मिलता था, वो अब नहीं मिलेगा। प्रतिबंध की वजह से अब इसे सीधे मार्केट से तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिससे सरकार के क्यूबा में विद्रोह हो सकता है। वहीं अमेरिका, मेक्सिको की सरकार पर डायरेक्ट हमला नहीं करेगा। अमेरिका ने मेक्सिको को पहले ही फॉरन टेरर ऑर्गेनाइजेशन घोषित किया हुआ है तो मेक्सिको में ये केवल वहां जाकर ड्रग गैंग वॉर को मार सकते हैं, लेकिन ये वहां सरकार नहीं बदल सकते।"

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