नई टिहरी, अनुराग उनियाल। महानगरों की ऐशोआराम वाली जिंदगी छोड़कर गांव में बिना मिट्टी के खेती करने का सपना देखना हर किसी के बस की बात नहीं है। लेकिन टिहरी जिले के चंबा ब्लॉक स्थित ग्राम जड़ीपानी निवासी प्रभात रमोला ने चंडीगढ़ में 40 हजार रुपये महीने की नौकरी छोड़कर ऐसा संभव कर दिखाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स से बीटेक कर चुके  प्रभात अपने गांव में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। यह ऐसी तकनीक है, जिसमें बिना मिट्टी के सिर्फ पानी की मदद से खेती की जाती है। प्रभात की इस पहल से प्रभावित उद्यान विभाग भी अब उन्हें बड़े स्तर पर सब्जी उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। 

जड़ीपानी निवासी यशपाल रावत के बड़े पुत्र प्रभात रमोला ने साल 2013 में देहरादून के एक कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स में बीटेक की डिग्री ली। जिसके बाद दिल्ली और चंडीगढ़ में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी की। लेकिन, शहरों की चकाचौंध भरी जिंदगी 27 वर्षीय इस युवा को रास नहीं आई और 40 हजार रुपये महीने की नौकरी छोड़ वह चंडीगढ़ से सीधे जड़ीपानी लौट आए।

जड़ीपानी गांव चंबा-मसूरी फलपट्टी क्षेत्र में आता है और यहां की जमीन सोना उगलती है। लेकिन, प्रभात यहां जमीन के बिना ही सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। महज 700 रुपये का प्लांट लगाकर की शुरुआत प्रभात ने हल्द्वानी में उद्यान विभाग के दो दिनी शिविर में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से सब्जी उगाने का प्रशिक्षण लिया। इसमें पानी की मदद से सब्जी उगाने के लिए पीवीसी (पॉली विनाइल क्लोराइड) पाइप का इस्तेमाल होता है। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 2018 में महज 700 रुपये की लागत से अपने पैतृक घर में इसका प्लांट लगाया। तब से घर में ही ब्रोकली, धनिया, सलाद पत्ता, पत्ता गोभी आदि सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।

उद्यान विभाग भी कर रहा सहयोग 

जिला उद्यान अधिकारी टिहरी डॉ. डीके तिवारी बताते हैं कि हाइड्रोपोनिक्स विधि में बिना मिट्टी के पानी की मदद से सब्जियां उगाई जाती हैं। इसके लिए पानी में न्यूट्रिएंट मिलाए जाते हैं। प्रभात की पहल को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यान विभाग उनके खेतों में पॉलीहाउस लगा रहा है। ताकि सब्जियों का अधिक उत्पादन संभव हो सके। 

ऐसे उगाई जाती हैं सब्जियां 

हाइड्रोपोनिक्स विधि में पीवीसी पाइप में होल बनाए जाते हैं। फिर प्लास्टिक की ट्रे में बीज डालकर उसमें पौधे तैयार किए जाते हैं, जिन्हें पीवीसी पाइप में रखा जाता है। इस दौरान सामान्य पानी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, कैल्शियम आदि न्यूट्रिएंट का मिश्रण तैयार किया जाता है और मोटर की मदद से उसमें पानी डाला जाता है। हर 12 दिन में पानी को बदला जाता है। इसके बाद 30 से 45 दिनों में सब्जियां तैयार हो जाती हैं। यह विधि उत्तराखंड में अब तक सिर्फ रामनगर (नैनीताल) के एक उद्यमी अपना रहे थे। हालांकि, दक्षिण भारत में यह विधि काफी लोकप्रिय है।

अब व्यावसायिक उत्पादन की तैयारी 

प्रभात रमोला बताते हैं कि अब वह व्यावसायिक स्तर पर सब्जियों के उत्पादन की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल उनकी उगाई सब्जियों से घर की जरूरतें पूरी हो रही हैं। साथ ही गांव के लोग भी इनका उपयोग कर रहे हैं।

हाइड्रोपोनिक्स विधि से सब्जी उत्पादन के लाभ 

-मिट्टी के मुकाबले जल्द तैयार होती हैं सब्जियां 

-सब्जियों में बीमारी की आशंका नहीं रहती 

-पूरी तरह ऑर्गेनिक हैं यह सब्जियां 

-खेतों में होने वाली अनावश्यक मेहनत से राहत 

-प्रतिकूल मौसम का भी सब्जियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता 

-जंगली जानवरों से पूरी तरह सुरक्षित 

-सिंचाई के लिए बेहद कम पानी की जरूरत

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