v>पिथौरागढ़, [जेएनएन]: माता-पिता के शव को बेटे ही मुखाग्नि देते हैं, पहाड़ पर अब यह मिथक बेटियां तोड़ रही हैं। आज ही एक शिक्षिका के निधन पर उनकी चिता को इंजीनियर बेटी ने मां को मुखाग्नि देकर बदलती सोच की नई इबारत लिखी।

राजकीय इंटर कालेज पिथौरागढ़ के प्रधानाचार्य पीसी पंत की पत्नी बीना पंत राइंका मूनाकोट में जीव विज्ञान की प्रवक्ता थीं। दो रोज पूर्व उन्हें हृदयाघात हुआ। हल्द्वानी ले जाए जाने के दौरान उनका निधन हो गया। पंत दपंती की दो पुत्रियां हैं। दंपती ने बचपन से ही अपने बच्चों को प्रगतिशील सोच दी और दकियानूसी विचारों से दूर रखा।
इसी परवरिश का नतीजा था कि शुक्रवार को रामेश्वर घाट में परिवार की बड़ी बेटी इंजीनियर केतकी पंत ने अपनी मां को मुखाग्नि दी। केतकी वर्तमान में पूणे में इंजीनियर हैं और उनकी छोटी बहन पढ़ाई कर रही है। केतकी के इस कार्य को नगर के लोगों ने रूढ़ परंपराओं के खिलाफ बड़ी पहल बताते हुए कहा कि ऐसी पहल से ही बेटी और बेटे के बीच अंतर की सोच बदलेगी और बेटियों को बचाने की मुहिम सफल होगी। 
देश के 10 संवदेनशील जिलों में शामिल है पिथौरागढ़ 
सीमांत जिला पिथौरागढ़ लिंगानुपात के मामले में देश के दस सबसे संवेदनशील जिलों में शामिल है। बेटे और बेटी में अंतर की इसी सोच के चलते बेटियों की संख्या में कमी आ रही है। सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश कलौनी ने कहा है कि केतकी ने जो पहल की है उससे रू ढि़वादी सोच खत्म होगी और जिले में बेटियों का ग्राफ बढ़ेगा। 
रीता की मुहिम ला रही है रंग 
करीब पांच वर्ष पूर्व लोहाघाट की सामाजिक कार्यकत्री रीता गहतोड़ी ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर समाज में हलचल मचा दी थी। क्षेत्र में यह पहला मामला था जब बेटी ने घाट पहुंचकर अपने पिता को मुखाग्नि दी। इसके बाद लगातार इस दिशा में आगे आ रही हैं। बीते रोज लोहाघाट में दो बेटियों ने अपनी मां को मुखाग्नि दी थी। 

Posted By: Sunil Negi

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