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    30 हजार रुपये के लिए अस्पताल भूला मानवता, महिला के शव को चार घंटे तक बनाया बंधक

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 10:23 PM (IST)

    हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में 42 वर्षीय सीमा बिरौड़िया की मौत के बाद अस्पताल पर शव को बंधक बनाने का आरोप लगा है। पति ने 57 हजार रुपये पहले ही जमा क ...और पढ़ें

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    सांकेतिक तस्वीर।

    जागरण संवाददाता, हल्द्वानी: अल्मोड़ा जिला के बेस अस्पताल से रेफर होकर इलाज के लिए आई 42 वर्षीय सीमा बिरौड़िया की निजी अस्पताल में मौत हो गई। अस्पताल ने पहले महिला के पति टैक्सी चालक नंदन बिरौड़िया से इलाज के नाम पर 57 हजार रुपये जमा करवा लिए। इसके बाद महिला की मौत होने पर 30 हजार रुपये की मांग और करने लगे। पीड़ित का आरोप है कि करीब चार घंटे तक उन्हें अस्पताल से शव नहीं दिया गया। इसके बाद उसने एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई।

    एसएसपी डा. मंजुनाथ टीसी ने कहा कि शनिवार की रात पीड़ित का उनके पास फोन आया। फोन करने वाले ने उन्हें बताया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है, पत्नी के उपचार के लिए 57 हजार रुपये पहले ही दे चुका है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से 30 हजार की मांग करने के बाद ही शव देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
    दरअसल, गोलना करड़िया धारानौला अल्मोड़ा निवासी सीमा बिरौड़िया कीडनी की मरीज थी, उनके डायलिसिस भी चल रही थी। तबीयत बिगड़ने पर अल्मोड़ा के अस्पताल से उन्हें रेफर किया गया था। हल्द्वानी के निजी अस्पताल में उन्हें शनिवार शाम साढ़े चार बजे पहले इमरजेंसी में भर्ती किया गया।

    इस पर पीड़ित से उपचार व दवाई के लिए 57 हजार रुपये जमा करवाए गए। फिर महिला को आइसीयू में ले जाने की बात कही। इतने में ही महिला का आइसीयू में जाने से पहले ही मृत्यु हो गई। एसएसपी ने कहा कि पीड़ित ने उन्हें पत्नी का शव दिलवाने की गुहार लगाई। जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सीओ सिटी अमित कुमार व प्रभारी निरीक्षक विजय मेहता को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

    इसके बाद पुलिस ने अस्पताल जाकर मृतका के शव को उसके स्वजन के सुपुर्द किया। साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र भी दिलवाया। उन्होंने अस्पताल के प्रबंधक को मानवता का ध्यान रखते हुए भविष्य में ऐसा न करने की हिदायत भी दी।

    इधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज को कई गंभीर बीमारियां थीं। आइसीयू में रखकर डाक्टरों की टीम इलाज में जुटी रही। इलाज के दौरान 30 हजार रुपये की दवाई ही लग गई थी। मरीज की मौत के बाद उनके परिवार के लोग छूट के लिए बात कर रहे थे। हमारे स्तर पर किसी तरह की लापरवाही और शव न देने की बात बेबुनियाद है।

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