नैनीताल हाई कोर्ट में दुष्कर्म के आरोपित की जमानत मंजूर, कहा- 'हर रिश्ते को शादी के झूठे वादे का रंग नहीं दिया जा सकता'
नैनीताल हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपित को अग्रिम जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति वाले हर रिश्ते को शादी के झूठे वादे ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने मंजूर की दुष्कर्म के आरोपित की अग्रिम जमानत। आर्काइव
जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हर आपसी सहमति वाले रिश्ते को शादी के झूठे वादे का रंग नहीं दिया जा सकता। शादी का वादा तोड़ने को तभी अपराध माना जाएगा, जब आरोपित का शुरू से ही शादी करने का कोई इरादा न हो। इस तथ्य का फैसला सिर्फ जांच के दौरान ही हो सकता है।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने इस मामले में याचिकाकर्ता की जमानत मंजूर कर ली। साथ ही कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक कीमती मौलिक अधिकार है और इसे तभी कम किया जाना चाहिए, जब मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों के अनुसार यह आवश्यक हो जाए।
ऊधम सिंह नगर के जसपुर कोतवाली के अंतर्गत नौ मई को दर्ज प्राथमिकी के अनुसार आरोपित ने शादी का झांसा देकर शिकायतकर्ता-पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। बाद में उसने शादी करने से मना कर दिया है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 और 351(2) के तहत जांच चल रही है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपित और कथित पीड़िता के बीच रिश्ता आपसी सहमति से था। पीड़िता एक समझदार बालिग महिला है। आरोपित ने कभी शादी का वादा नहीं किया। उसका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है।
आरोपित ऊधम सिंह नगर जिले का स्थायी निवासी है, इसलिए उसके भागने की कोई संभावना नहीं है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि उसे 21 मई को अंतरिम जमानत दी गई थी। उसने अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया है। सरकारी अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया।
एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। एकलपीठ ने आदेश दिया कि गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपित को 30 हजार के निजी मुचलके और दो जमानती पेश करने पर गिरफ्तार करने वाले अधिकारी की संतुष्टि पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाएगा।

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