गंगा नदी राफ्ट की संख्या का मामला, नैनीताल हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार
उच्च न्यायालय ने गंगा नदी में राफ्ट की संख्या निर्धारित करने के मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है। अदालत ने कहा कि राफ्ट की संख्या तय करने का अधिकार समिति के पास है और सभी पक्षों को समिति के निर्णय का पालन करना होगा। उच्च न्यायालय ने समिति के फैसले को बरकरार रखा।

पर्यटन विकास बोर्ड गठित कमेटी के निर्णय के आधार पर तय की थी राफ्ट की संख्या। आर्काइव
जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने गंगा नदी में राफ्ट की संख्या को स्वीकृति देने से जुड़े एक मामले का निपटारा करते हुए उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के निर्णय पर हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। बोर्ड नेसाहसिक पर्यटन के लिए राफ्ट की संख्या तय की थी।
कोर्ट को बताया गया कि उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड ने गंगा नदी की वहन क्षमता का अनुमान लगाने के लिए 15 सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी और यह निर्णय लिया गया था कि गंगा नदी की अधिकतम वहन क्षमता 576 राफ्ट होगी।
वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में अलकनंदा गंगा रीवर राफ्टिंग समिति की ओर से याचिका दायर कर पर्यटन विकास बोर्ड की ओर से गठित कमेटी के निर्णय को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता का कहना था कि कमेटी का आकलन गलत है, क्योंकि एक राफ्ट को रैपिड पार करने में एक मिनट का समय लगता है, जबकि कमेटी ने उस समय को लगभग तीन मिनट माना है।
एकलपीठ ने कहा कि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए प्रश्न पर जाने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि यह विशेषज्ञ का काम है कि एक तय समय में कितनी राफ्ट चलाई जा सकती हैं।
कमेटी ने अपने मिनट्स में देखा है कि देवप्रयाग से कोडियाला के बीच 36 किमी के हिस्से को राफ्टिंग के लिए खोलने पर विचार किया जा सकता है, इसलिए याचिका का निपटारा इस छूट के साथ किया जाता है कि याचिकाकर्ता राफ्टिंग के मकसद से उस हिस्से को खोलने के लिए रिप्रेजेंटेशन दे सके। अगर याचिकाकर्ता सक्षम अथॉरिटी को ऐसा रिप्रेजेंटेशन देता है, तो अथॉरिटी उस हिस्से की तकनीकी जांच कर छह महीने के अंदर कानून के मुताबिक निर्णय लेगी।

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