नैनीताल, रमेश चंद्रा : बादल फटना, तूफान या फिर बारिश होने का सटीक पूर्वानुमान देने में अब उत्तराखंड का मौसम विभाग भी सक्षम होगा। इन घटनाओं की जानकारी विभाग को तीन घंटे पहले ही पता चल जाएगी। इसके लिए प्रदेश का पहला डॉप्लर रडार नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर में स्थापित हो चुका है। टेस्टिंग होते ही जुलाई अंत से पहले यह रडार काम करना शुरू कर देगा।

अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित डॉप्लर रडार मुक्तेश्वर के शीतोष्ण बागवानी संस्थान में स्थापित किया गया है। इस रडार की खासियत यह है कि बादलों के फटने जैसी घटनाओं के होने से पहले ही हमें जानकारी मिल जाएगी। बारिश, तूफान या अंधड़ के साथ तेज हवाओं के यहां पहुंचने से पहले ही जानकारी मिल जाने से जरूर एहतियात बरतना भी आसान हो जाएगा।

 

राज्य मौसम निदेशक डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि रडार की अंतिम टेस्टिंग का कार्य होना है। रडार स्थापना कार्य हैदराबाद की कंपनी आस्ट्रा माइक्रोवेब द्वारा किया गया है। मौसम की जानकारी के लिहाज से हिमालय क्षेत्र में इस रडार की सख्त जरूरत थी।

 

360 डिग्री एंगल में सौ किमी की जानकारी देगा

नैनीताल शहर से मुक्तेश्वर की दूरी 51 किमी है। यह खूबसूरत पर्यटक स्थल समुद्र की सतह से 2286 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां स्थापित रडार 100 किमी के दायरे में 360 डिग्री एंगल पर कार्य करेगा। यह हिमालय समेत चारों दिशाओं के मौसम पर नजर रख सकेगा। इससे हवा की गति व दिशा, तापमान व आर्द्रता की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती रहेगी।

 

दस करोड़ रुपये की लागत से बना है रडार

डॉप्लर रडार को स्थापित करने में दस करोड़ रुपये की लागत आई है। जिसमें अत्याधुनिक उपकरणों समेत भवन आदि का खर्च भी शामिल हैं। टेस्टिंग कार्य पूर्ण होते ही रडार से डाटा मिलना शुरू हो जाएगा।

 

प्रदेश का पहला होगा रडार

प्रदेश का यह पहला रडार है। इसके अलावा गढ़वाल मंडल के पौड़ी व टिहरी जिले में भी एक-एक डॉप्लर रडार स्थापित किया जाना है। मुक्तेश्वर में रडार लग जाने से कुमाऊं क्षेत्र के मौसम की सटीक जानकारी मिलने लगेगी।

 

तीन टीमें करेंगी टेस्टिंग का कार्य

रडार की टेस्टिंग में तीन टीमें लगेंगी। केंद्रीय मौसम विभाग के विशेषज्ञ, मौसम विभाग देहरादून व कार्यदायी संस्था आस्ट्रा हैदराबाद के विशेषज्ञ शामिल रहेंगे। जुलाई दूसरे पखवाड़े में टेस्टिंग कार्य चलेगा।

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