अल्मोड़ा, जेएनएन : अल्मोड़ा जिले के भैंसियाछाना ब्लॉक के डूंगरी गांव के उडल तोक में मासूम को शिकार बनाने वाले तेंदुए को नरभक्षी घोषित कर दिया गया है। उसे पहले ट्रैंकुलाइज करने की कोशिश होगी। काबू में न आने पर उसे गोली मारने की रणनीति बना ली गई है। गांव में उस स्थान पर पिंजड़ा लगा दिया गया है, जहां पर तेंदुआ बच्चे को छोड़ गया था। एहतियातन विभागीय शार्प शूटर मुस्तैद कर दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर पेशेवर शूटर जॉय व्हीकल से संपर्क साध लखपत सिंह रावत से भी राय मशविरा किया जा रहा।

तेंदुए के आतंक से बेजार डूंगरी ग्रामसभा उससे लगे उडली तोक में डीएफओ महातिम सिंह यादव की अगुवाई में विभागीय टीम ने डेरा डाल दिया है। बीती रात आक्रोशित ग्रामीणों के समक्ष डीएफओ ने विभाग प्रमुख से फोन पर वातर की थी। उधर वन संरक्षक (कुमाऊं) प्रवीण कुमार ने मंगलवार को पत्र भेज गुलदार को आदमखोर घोषित करने की सिफारिश की।

 

सायं विभाग प्रमुख (वन्य जीव) की ओर से आतंक का पयरय बन चुके गुलदार को नरभक्षी घोषित कर उससे निपटने की अनुमति दे दी गई। इस पर विभागीय सरगरि्मयां बढ़ गई। डीएफओ के साथ वन क्षेत्राधिकारी संचिता वमर मय टीम रणनीति बनाने में जुट गए। रानीखेत व बिनसर सेंच्यूरी से विभागीय शूटर बुला लिए गए हैं। अनुभवी शूटर लखपत सिंह रावत से राय सुझाव कर साथी जॉय व्हीकल से संपर्क साधा जा रहा।

 

अब तक 155 से ज्यादा आदमखोर

विभागीय सूत्रों की मानें तो अब तक हिमालयी राज्य में 155 से ज्यादा तेंदुआ नरभक्षी घोषित किए जा चुके। इनमें करीब 80 शूटरों के निशाने में नहीं आ सके। जबकि शेष को आदमखोर बनने की कीमत चुकानी पड़ी है। वहीं तमाम जिंदगगियां मानव गुलदार टकराव में खत्म हो गई।

 

18 घंटे बाद उठाया बच्चे का शव

ग्रामीणों के आक्रोश के मद्देनजर डीएफओ महातिम सिंह व वन क्षेत्राधिकारी संचिता वमर बीती रात उडल गांव में ही रहे। तड़के तीन बजे वहां से जिला मुख्यालय पहुंच कागजी कार्यवाही के बाद फिर वहीं डट गए। घटना स्थल के आसपास तीन चार राउंड फायरिंग की गई। ताकि दोबारा आबादी में घुसपैठ न कर सके। वहीं विभागीय स्तर पर त्वरित कदम उठाए जाने से ग्रामीणों का गुस्सा थमा। करीब 18 घंटे बाद मासूम का शव उठाया गया। बाड़ेछीना स्वास्थ्य केंद्र में बच्चे का पोस्टमार्टम कराने के बाद गमगीन माहौल में उसे परंपरानुसार धरती की गोद में समरि्पत कर दिया गया।

 

पिता बोला- कोई और बच्चा न बने निशाना

उडल गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। ममता का आंचल दूर होने की पीड़ा हेमादेवी को रह रह कर सता रही। वहीं बंगलुरू से मंगलवार सुबह लौटे पिता देवेंद्र सिंह मेहरा ने बताया कि बीती सोमवार शाम करीब तीन बजे रोज की तरह पत्नी हेमादेवी को हालचाल पूछने के लिए फोन किया। बातें करते अचानक पत्नी चिल्लाई तो वह समझ गया कि कोई अनहोनी हो गई। हेमादेवी फोन पर थी, तभी जंगल की ओर से घात लगाए बैठा गुलदार उसके डेढ़ वर्षीय पुत्र हरि्षत को उठा ले गया। बाद में ग्रामीण शोर मचाते हुए दौड़े तो लगभग ढाई सौ मीटर दूर जंगल में झाडि़यों के बीच गुलदार बच्चे को छोड़ गया। देवेंद्र ने कहा, अब कोई दूसरा बच्चा गुलदार का शिकार न बने, इसके लिए विभाग व सरकार को ठोस कदम उठाए।

 

घटना पर सियासत से ग्रामीण दुखी

तेंदुए के हमले में मासूम की मौत पर सियासत से ग्रामीण आहत भी दिखे। बीती रात विस उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, पूर्व दजर राज्य मंत्री बिट्टू कनरटक आदि मौके पर पहुंचे थे। ग्रामीणों के साथ लंबी वातर चली। इधर गांव वालों ने कहा कि बेशक छह हादसे होने के बाद विभाग ने त्वरित कदम उठाया। मगर विभागीय स्तर से दुख की घड़ी में अच्छा सहयोग मिला। इस घटना पर सियासत या राजनीतिक लाभ के लिए टीका टिप्पणी ठीक नहीं। याद रहे डूंगरी पेटशाल व उडल गांव के आसपास गुलदार अब तक छह घटनाओं को अंजाम दे चुका। सालभर के भीतर ही वह तीन लोगों को शिकार बना चुका।

 

अरसे से आसपास घूम रहा था कुनबा

ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुआ अपने कुनबे के साथ आबादी क्षेत्र में सरेशाम घूमता रहा है। उसके साथ एक मादा व दो शावक भी हैं। मगर आंगन में मां के पास से बच्चे को उठा ले जाएगा, सोचा भी न था। चूंकि देवेंद्र सिंह का मकान पहाड़ी पर निर्जन इलाके में है। चारों तरफ से जंगल है। ऐसे में गुलदार को हमले का आसान मौका मिल गया। डीएफओ महातिम सिंह यादव ने बताया कि तेेंदुआ को नरभक्षी घोषित कर दिया गया है। पहले उसे ट्रैंकुलाइज कर कैद करने की कोशिश करेंगे। बात न बनी तो फिर आदमखोर को गोली मार दी जाएगी। विभागीय शूटर तैनात कर दिए हैं। विभाग से बाहर के कुशल शूटरों से संपर्क साध बात चल रही है। ग्रामीणों के हित में जो भी संभव हो पड़ेगा करेंगे।

 

शूटर जॉय व्हीकल को 37वें शिकार का इंतजार

कुमाऊं व गढ़वाल में अब तक 36 आदमखोर तेंदुओं को ढेर कर चुके शार्प शूटर जॉय व्हीकल ने कहा, विभाग का बुलावा आते ही ग्रामीणों को निजात दिलाने वह बगैर देर किए उडल गांव पहुंच जाएंगे। एक जवाबी सवाल पर अपने अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि गुलदारों की संख्या जिस हिसाब से बढ़ी है, उस अनुपात में उत्तराखंड के वन क्षेत्रों में भोजन पर्याप्त नहीं है। ऐसे में मानव गुलदार संघर्ष वर्तमान में चरम पर है। भूख मिटाने के लिए गुलदारों ने शिकार का शॉर्ट कट ढूंढ लिया है। आसान शिकार की तलाश में आबादी में डटना आदत में शुमार हो गया है। वहीं जॉय व्हीकल के वरिष्ठ साथी शूटर व वन्यजीव विशेषज्ञ लखपत सिंह रावत में अब राज्य में 53 आदमखोर गुलदारों को अपना निशाना बना चुके हैं।

यह भी पढ़ें 

निशंक बोले, कोई सोच भी नहीं सकता था कि 33 करोड़ लोग घर रहकर पढ़ सकेंगे 

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस