देहरादून, अशोक केडियाल। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) से संबद्ध 98 संस्थानों और वहां पढ़ रहे छात्रों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। विवि प्रशासन की आपसी खींचतान के चलते इन संस्थानों में पढ़ाए जा रहे 422 पाठ्यक्रम कई वर्षों से बिना मान्यता संचालित हो रहे हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि बिना मान्यता दिए ही यूटीयू इन संस्थानों से पास आउट होने वाले छात्रों को डिग्री भी प्रदान कर रहा है। ऐसी स्थिति में अगर किसी दिन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने निरीक्षण कर लिया तो इन संस्थानों पर ताला लटकना तय है। ऐसा होने पर विवि भी परेशानी में पड़ सकता है। इसको देखते हुए दो दिन पहले मुख्यमंत्री ने विवि के सभी पूर्व कुलपतियों की विजिलेंस जांच करवाने का आदेश दिया है। 

नियमानुसार किसी भी संस्थान को वहां संचालित हो रहे पाठ्यक्रमों के लिए हर वर्ष विश्वविद्यालय से मान्यता लेनी होती है। इसके लिए विवि इस संस्थान का निरीक्षण करता है और संतुष्ट होने पर पाठ्यक्रम को मान्यता प्रदान करता है। लेकिन, यूटीयू से संबद्ध इंजीनियरिंग और प्रोफेशनल कॉलेजों में कई वर्षों से बिना मान्यता ही पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसका खुलासा बीते वर्ष 22 अक्टूबर को करीब ढाई वर्ष बाद हुई विवि की कार्य परिषद (ईसी) की बैठक में हुआ।

विवि प्रशासन ने बैठक में संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों को मान्यता देने का प्रकरण भी रखा था, लेकिन ईसी ने यह कहते हुए मान्यता देने से इनकार कर दिया कि आखिर विवि कई वर्षों से इन संस्थानों में चल रहे पाठ्यक्रमों को मान्यता क्यों नहीं दे रहा था? साथ ही ईसी ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी, जिसे बीती 26 नवंबर को अपनी रिपोर्ट विवि को सौंपनी थी। पर उससे पहले ही विवि प्रशासन दो खेमों में बंट गया, जिससे जांच टीम की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। अब मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद शासन ने विवि के सभी पूर्व कुलपतियों की विजिलेंस जांच करवाने का आदेश दिया है। जिससे एक बार फिर लंबित पाठ्यक्रमों की मान्यता का मामला लटकता दिखाई दे रहा है। 

ईसी के विशेषज्ञ यूटीयू से असहमत 

यूटीयू की ईसी में राज्यपाल की ओर से नियुक्त प्रतिनिधि, अकादमी विशेषज्ञ, टेक्नोक्रेट, विधि सदस्य, मेडिकल शिक्षा, औद्योगिक क्षेत्र, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, आइआइटी रुड़की, कृषि विवि पंतनगर आदि से एक-एक सदस्य शामिल है। ये सभी यूटीयू की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। 

टीईक्यूआइपी पर भी उठे थे सवाल   

बैठक में टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (टीईक्यूआइपी-तृतीय) को भी चर्चा में रखने पर ईसी के सदस्यों ने गहरी नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि यह विवि की परियोजना है। जिसका ईसी से कोई लेना देना नहीं है। विवि अपने स्तर पर कार्य करवाए और केंद्रीय सरकार व केंद्रीय एजेंसियों से मंजूर धनराशि प्राप्त करे। इस पर ईसी चर्चा नहीं कर सकती। 

भर्ती में परिनियमावली की अनदेखी 

बैठक में ईसी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विवि अध्यादेश और परिनियमावली से इतर शैक्षिक व गैर शैक्षिक रिक्त पदों पर सीधे भर्ती के प्रयास किए गए। जबकि नियमानुसार रिक्त पद पहले विज्ञापित किए जाते हैं। उसके बाद एक निर्धारित समयावधि में आवेदन मांगे जाते हैं। स्क्रूटनी कमेटी की जांच के बाद पात्र अभ्यर्थी परीक्षा के लिए चयनित किए जाते हैं। पूर्व सूचना के बाद लिखित और मौखिक परीक्षा आयोजित की जाती है। 

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यूटीयू के कुलपति प्रो. नरेंद्र एस चौधरी ने बताया कि विवि से संबद्ध संस्थानों के पाठ्यक्रमों की मान्यता का मामला कुलसचिव के अधिकार क्षेत्र में आता है। मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। ईसी की बैठक के बाद गठित तीन सदस्यीय कमेटी की ओर से मुझे एक पत्र मिला था। पत्र में जिन बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी, वह मैंने उपलब्ध करवा दी थी। 

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वहीं, यूटीयू की कुलसचिव अनिता रावत का कहना है कि ईसी की बैठक में विवि की परिनियमावली में शामिल बिंदुओं को चर्चा के लिए रखा गया था। जिस पर ईसी ने कड़ी आपत्ति दर्ज की और आवश्यक सुधार के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की, लेकिन इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिनियमावली को बदल दिया। जिसके लिए मैं जिम्मेदारी नहीं हूं। 

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Posted By: Raksha Panthari

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