Uttarakhand lockdown में गुजरात से 111 लोग पहुंचे ऋषिकेश, बसों से भेजा गया घर
गुजरात से कुल 111 लोगों को ऋषिकेश लाया गया। प्रशासन ने सभी को बसों के मध्यम से उनके घर रवाना किया है।
ऋषिकेश, जेएनएन। गुजरात में काम करने वाले उत्तराखंड क्षेत्र के विभिन्न जनपदों के लोगों को लेकर शनिवार को परिवहन निगम की बसें श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज ऋषिकेश पहुंची। यहां गुजरात से कुल 111 लोगों को लाया गया। प्रशासन ने सभी को बसों के मध्यम से उनके घर रवाना किया है।
उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से संबंधित लोग गुजरात प्रांत में विभिन्न कारखानों और संस्थानों में काम करते हैं। लॉकडाउन के कारण यह सभी लोग वहां फंसे हुए थे। सूरत और अहमदाबाद से संबंधित इन लोगों को अहमदाबाद में 26 दिन से क्वारंटाइन पर रखा गया था। शनिवार को परिवहन निगम की बसों से यह सभी लोग ऋषिकेश स्थित श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में बनाए गए राहत शिविर में पहुंचे। इनमें रुद्रप्रयाग के 76, चमोली के आठ, टिहरी के 10, पौड़ी के चार, उत्तरकाशी के तीन, ऊधमसिंह नगर के तीन, बागेश्वर के तीन, अल्मोड़ा के तीन और चंपावत के एक श्रमिक को यहां लाया गया है।
राजकीय चिकित्सालय के चिकित्सकीय टीम ने ऋषिकेश पहुंचे सभी लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग और स्वास्थ परीक्षण किया। उप जिलाधिकारी प्रेमलाल ने बताया कि भोजन व अन्य व्यवस्था कराने के बाद उनके संबंधित जनपद के लिए रवाना किया गया। एआरटीओ कार्यालय के परिवहन कर अधिकारी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि इन लोगों को सात बसों में विभिन्न जनपदों के लिए रवाना किया गया। एजीएम परिवहन निगम पीके भारती ने बताया कि बसों की व्यवस्था परिवहन निगम ने कराई है। इसके अलावा प्रशासन को ढाई सौ लोगों की सूची प्राप्त हुई है, जो हरियाणा से रविवार को यहां पहुंच जाएंगे।
हर आपात स्थिति को दक्ष होगा स्टाफ
एम्स ऋषिकेश में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में रेजिडेंट्स चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ को वेंटीलेटर मैनेजमेंट सिस्टम का प्रशिक्षण दिया गया। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि संस्थान कोरोना वायरस को देखते हुए संस्थान में चिकित्सकों से लेकर नर्सिंग ऑफिसर्स और अन्य स्टाफ को हर स्थिति के निपटने के लिए दक्ष कर रहा है। कार्यशाला में सबसे पहले मरीजों में सांस संबंधी दिक्कतों की पहचान व तत्काल राहत देने का प्रशिक्षण दिया गया।
सरकार से पर्यटन व्यवसायियों ने मांगी रियायत
कोरोना के कारण उत्तराखंड में साहसिक गतिविधियों सहित पर्यटन से जुड़े तमाम व्यवसाय प्रभावित हुए हैं। प्रमुख व्यवसाईयों ने पर्यटन सचिव के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्हें आवश्यक सुझाव दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में चर्चा के दौरान यूटीडीबी के सीईओ एवं प्रमुख सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन के प्रमुख ब्रिगेडियर अशोक एबे और पद्मश्री अजीत बजाज से उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन से जुड़े कई सवाल पूछे।
वहीं, प्रबंध निदेशक हिमालयन आउटडोर प्राइवेट लिमिटेड प्रतीक कालिया ने सुझाव दिया कि साहसिक पर्यटन राफ्टिंग का प्रमुख सीजन मार्च से जून का होता है जो कि कोरोना महामारी के चलते खराब हो गया है। इसलिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में चल रहे होटल, कैंप, गेस्ट हाउस पर टैक्स माफ हों। साथ ही रिवर राफ्टिंग गतिविधि में जो लोग जुड़े हैं। उनकी राष्ट्रीय परमिट की रिनुअल फीस माफ होनी चाहिए।
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