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देहरादून, विकास धूलिया। पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड में अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी पर्यावरण और जल संरक्षण की मुहिम छेड़ेगा। पर्यावरण एवं जल संरक्षण के संघ की गतिविधि में शामिल होने के बाद उत्तराखंड में इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 

इस कड़ी में उत्तराखंड वन विभाग के सेवानिवृत्त प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) डॉ.आरबीएस रावत को प्रांत प्रमुख और पाणी राखो आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानंद भारती को सह प्रांत प्रमुख का जिम्मा सौंपा गया है। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने फरवरी में इंदौर में हुई संघ की बैठक में पर्यावरण एवं जल संरक्षण को संघ की गतिविधि में शामिल करने का एलान किया था। इसके बाद मार्च में ग्वालियर में हुई संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस पर मुहर लगाई गई। 

फिर संघ मुख्यालय ने पर्यावरण एवं जल संरक्षण को संघ की नियमित चलने वाली गतिविधि के रूप में शामिल कर लिया। अब इसे देशभर में सभी राज्यों में आकार देने की कवायद शुरू कर दी गई है। 

असल में संघ इस बात से चिंतित है कि सरकार तो पर्यावरण एवं जल संरक्षण के लिए कार्य कर रही है, मगर इसमें समाज की अपेक्षित भागीदारी नहीं हो पा रही। इसे देखते हुए संघ ने इसे अपनी नियमित गतिविधि में शामिल कर इस मुहिम में समाज की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने का निश्चय किया है। पर्यावरण एंव जल संरक्षण की इस मुहिम के लिए उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पहल कर दी है। 

संघ के प्रांत प्रचारक युद्धवीर ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में पर्यावरण एवं जल संरक्षण की गतिविधि के लिए सेवानिवृत्त पीसीसीएफ डॉ.आरबीएस रावत को प्रांत प्रमुख और उत्तराखंड में जलपुरुष की पहचान रखने वाले पाणी राखो आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानंद भारती को प्रांत सह प्रमुख का दायित्व सौंपा गया है। 

उन्होंने बताया कि पर्यावरण एवं जल संरक्षण की मुहिम के अंतर्गत पौधारोपण और जलस्रोतों के संरक्षण में समाज की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मुहिम का खाका खींचा गया है और राज्यभर में यह चलेगी। संघ के कार्यकर्ता इसमें जुटने के साथ ही लोगों को भी प्रेरित करेंगे।

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