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देहरादून, जेएनएन। केदारनाथ में ध्यान गुफा को लेकर देश-विदेश से आ रहे फोन कॉल्स से गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) उत्साहित है। यहां तक गुफा में साधना के लिए दरों में भी वृद्धि कर दी गई है। पहले निगम ने 24 घंटे के लिए 990 रुपये का शुल्क तय किया था और अब यह धनराशि बढ़ाकर 1500 रुपये कर दी गई है। सोमवार को गुफा को वायरलेस सेवा से भी जोड़ दिया गया है और ऑन लाइन बुकिंग शुरू कर दी गई है। इसी माह 18 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ में थे। इस दौरान उन्होंने ध्यान गुफा में साधना भी की। 

प्रधानमंत्री की बाद सुर्खियों में आई इस गुफा के बारे में जानने के लिए लोग उत्सुक हैं। जीएमवीएन के महाप्रबंधक (पर्यटन) बीएल राणा ने बताया कि हर दिन 50 से ज्यादा लोग फोन पर जानकारी मांग रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब निगम ने गुफा को अपने यात्रा पैकेज में शामिल कर लिया है। बताया कि पहले ऑफ लाइन बुकिंग की भी योजना थी, लेकिन अब तय किया गया है कि सिर्फ ऑन लाइन बुकिंग ही की जाएगी। गुफा में एक दिन व एक रात बिताने के लिए 1500 रुपये शुल्क वसूला जाएगा, लेकिन साधक सिर्फ दिन की बुकिंग भी करा सकता है। 

इसके लिए उसे 990 रुपये चुकाने होंगे। मंगलवार को निगम ने ऑन लाइन पैकेज जारी करते हुए अपनी वेबसाइट पर इसका पूरा ब्योरा अपलोड कर दिया है। राणा ने बताया कि गुफा में 24 घंटे स्टाफ तैनात रहेगा। मौसम के मिजाज को देखते हुए गुफा को वायरलेस से जोड़ा गया है ताकि साधक को किसी तरह की परेशानी न उठाने पड़े। उन्होंने बताया कि अक्टूबर तक गुफा की बुकिंग कराई जा सकेगी। 

अधूरी तैयारी के बीच जीएमवीएन की हेली टिकट बुकिंग 

केदारनाथ धाम के लिए जीएमवीएन की हेली बुकिंग अधूरी तैयारी के चलते यात्रियों के लिए सिर दर्द बन गई है। सिर्फ क्रोम ब्राउजर से ही टिकट बुक हो रहे हैं। जबकि क्रोम को छोड़ अन्य इंटरनेट ब्राउजर और मोबाइल के माध्यम से टिकट बुक नहीं हो पा रहे हैं। इससे साफ है कि ऑनलाइन बुकिंग का फायदा आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। केदारनाथ धाम के लिए संचालित सात हेली कंपनियों के टिकट वितरण में गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। इस पर सरकार ने गढ़वाल मंडल विकास निगम के मार्फत आनन-फानन दो कंपनियों की सौ फीसद टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग का निर्णय लिया गया। 

सोमवार देर शाम को इस पर शासन ने निर्णय लिया। मगर, टिकट बुक करने वाली वेबसाइट के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी न होने से मंगलवार दिन से टिकट बुक होने शुरू हुए। दिनभर लोग मोजिला और दूसरे इंटरनेट ब्राउजर पर साइट खोलने का प्रयास करते रहे। मगर, निगम ने जो एप्लीकेशन बनाई है, वह सिर्फ क्रोम पर सपोर्ट कर रही है। इससे आम लोग टिकट बुक नहीं करा पाए। इस संबंध में जब लोगों ने निगम की हेली लाइन से संपर्क किया तो जानकारी मिली कि टिकट सिर्फ क्रोम से ही बुक होंगे। इसके बाद ही लोग बामुश्किल टिकट बुक करा पाए। 

एप इंजीनियर संजय बताते हैं कि यह एप्लीकेशन सिर्फ क्रोम के लिए तैयार की गई है। ऐसे में दूसरे ब्राउजर सपोर्ट नहीं करेंगे। क्रोम के माध्यम से टिकट आसानी से बुक होंगे। 

यूकाडा के सीईओ दिलीप जावलकर ऑनलाइन टिकट बुक हो रहे हैं। यदि किसी को कोई शिकायत है तो वह फीडबैक दे सकते हैं। एप्लीकेशन की समस्या जल्द दूर की जाएगी।  

हेमकुंड साहिब ट्रस्ट यात्रियों को देगा कैरीबैग 

इस बार हेमकुंड साहिब ट्रस्ट यात्रियों को गन्ने की खोई से बने कैरी बैग उपलब्ध कराएगा। गन्ने की खोई से बने इन कैरी बैग की खासियत यह है कि अगर इसको कहीं फेंकेंगे तो बाद में स्वत: ही यह कैरीबैग मिट्टी में मिलकर खाद का काम करेगा। 

श्री हेमकुंड साहिब के कपाट एक जून को खुलने हैं। यात्रा तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। हेमकुंड मैनेजमेंट ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि हेमकुंड यात्रा मार्ग में अटलाकोटी से हेमकुंड तक भारी बर्फ होने के चलते श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे कपाट खुलने के दो सप्ताह तक बुजुर्ग, बीमार और बच्चों को यात्रा पर लाने से बचें, क्योंकि तीन किमी क्षेत्र में बर्फ के बीच से होकर पैदल चलना है। यात्रा मार्ग पर फिलहाल घोड़े खच्चरों का संचालन नहीं हो पाया है।

यात्रियों की सुविधाओं के लिए गोविंदघाट, घांघरिया में रहने और लंगर प्रसाद हर समय उपलब्ध है। हेमकुंड साहिब में भी यात्रियों को जलपान और प्रसाद के रूप में खिचड़ी उपलब्ध कराई जाएगी। इस बार स्वच्छ हिमालय के तहत यात्रियों को पॉलीथिन का प्रयोग करने से बचना है। 

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यात्रियों को कैरीबैग उपलब्ध कराएगी और यह कैरीबैग कंपोस्टेबल है। इसकी खासियत यह है कि अगर यह कैरी बैग 180 दिन भी मिट्टी में रहेगा तो इसकी स्वत: ही खाद बन जाएगी। गुरुद्वारा प्रबंधक हर यात्री को यह कैरी बैग निश्शुल्क उपलब्ध कराएगी। 

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Posted By: Raksha Panthari

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