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    मॉडल रोड के शिगूफे के बाद स्मार्ट रोड के हसीन ख्वाब Dehradun News

    राजधानी में मॉडल रोड की योजना पर आठ करोड़ से ज्यादा का बजट खर्च होने के बावजूद कोई सुधार होता नजर नहीं आया। अब सरकार स्मार्ट सिटी के तहत स्मार्ट रोड के हसीन ख्वाब दिखा रही है।

    By BhanuEdited By: Updated: Thu, 27 Jun 2019 01:17 PM (IST)
    मॉडल रोड के शिगूफे के बाद स्मार्ट रोड के हसीन ख्वाब Dehradun News

    देहरादून, संतोष भट्ट। सूबे के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने राजधानी में जिस मॉडल रोड को प्रदेश के लिए नजीर बनाने के ख्वाब देखे थे, उस पर अफसरों ने पलीता लगा दिया। दो साल में छह किमी नाली और फुटपाथ न बन पाने से योजना मजाक बन कर रह गई है। योजना पर तीन विभाग आठ करोड़ से ज्यादा का बजट खर्च कर चुके हैं। मगर, न तो फुटपाथ चलने के काम आए और न ही जल निकासी हो पा रही है। इसके बावजूद सरकार अब स्मार्ट सिटी के तहत स्मार्ट रोड के हसीन ख्वाब दिखा रही है।

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    घंटाघर में चकराता रोड पर 2012 के सफल प्रयोग से सीख लेते हुए सरकार के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने दून में मॉडल रोड योजना शुरू की। इसके तहत आइएसबीटी से घंटाघर तक छह किमी हिस्से में नाली, फुटपाथ और रेलिंग के कार्य की योजना बनाई गई। इससे पहले मई 2017 में मंत्री ने इस क्षेत्र का भ्रमण कर यहां किए गए अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए। 

    जून 2017 से यहां राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, लोनिवि निर्माण खंड और प्रांतीय खंड को मॉडल रोड संवारने की जिम्मेदारी दी गई। एक साल के भीतर इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। मगर, जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी और विभाग की मनमानी से प्रोजेक्ट दो साल बाद भी अधूरा पड़ा है। 

    स्थिति यह है कि आइएसबीटी से निरंजनपुर मंडी तक 30 से ज्यादा स्थानों पर क्षतिग्रस्त नाली दुर्घटना को न्योता दे रही है। यहां एक इंच भी रेलिंग का कार्य शुरू नहीं हुआ है। टाइल्स और स्लैब डालने का काम भी अधूरा है। इसी तरह लालपुल से प्रिंस चौक तक नाली और फुटपाथ बनने से पहले ही टूट गए। यहां भी 22 स्थानों पर नाली खुली पड़ी है। 

    प्रिंस चौक से गांधी रोड घंटाघर तक फुटपाथ तो बने, मगर, रेलिंग का काम पूरा नहीं हुआ। साफ है कि सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर अफसरों ने पानी फेर दिया। मॉडल रोड के आधे-अधूरे काम के बाद सरकार ने स्मार्ट सिटी के तहत 190 करोड़ से स्मार्ट रोड परियोजना पर काम करने की योजना बनाई है। 

    ऐसे में जब छह किमी की नाली-फुटपाथ पर विभागों का दम फूल चुका है तो स्मार्ट रोड योजना कितनी कारगर साबित होगी, इस पर संशय है, कार्य शुरू होने से पहले ही इस पर सवाल उठने लगे हैं। 

    इससे इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है कि कहीं अधिकारी सिर्फ बजट खर्च करने के लिए तो ऐसे प्रोजेक्ट लांच नहीं कर रहे। पुराने प्रोजेक्ट का नफा-नुकसान का आंकलन किए बिना इस तरह के हवाई प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। 

    मंत्री का भ्रमण भी बेअसर 

    मॉडल रोड के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए शहरी विकास मंत्री स्वयं दून की सड़क पर उतरे। पहले अतिक्रमण चिह्नीकरण को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए। सात मई 2017 को ई-रिक्शा पर सवार होकर आइएसबीटी से घंटाघर तक एक-एक जगह देखी। इसके बाद 22 जून 2018 और फिर 14 दिसंबर 2018 को अधिकारियों के साथ भ्रमण कर मॉडल रोड योजना की प्रगति जानी। इस दौरान अधिकारियों को निलंबित करने, मुकदमा करने से लेकर कड़े आदेश दिए गए। मगर, इस सब के बाद भी अधिकारी गंभीर नहीं हुए।

    अतिक्रमण हटा न मुकदमा हुआ

    मंत्री ने अतिक्रमण हटाने के लिए डीएम और एसएसपी को संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिए थे। टीम में नगर निगम को शामिल कर हर दिन निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। इस दौरान अतिक्रमण पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश थे। मगर, न मुकदमा हुआ न ही अतिक्रमण हटाया गया।

    छह किमी में 300 अतिक्रमण 

    आइएसबीटी से घंटाघर तक मॉडल रोड की नाली और फुटपाथ पर जहां भी काम हुआ है, वहां अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया है। छह किमी क्षेत्र में छोटे बड़े 300 अतिक्रमण हो गए हैं। मॉडल रोड के फुटपाथ और नाली से बाहर सड़क तक लोगों ने अतिक्रमण सजा रखा है। 

    सबसे खराब स्थिति शिमला बाईपास से लालपुल, पटेलनगर से सहारनपुर चौक, गांधी रोड से घंटाघर तक है। यहां सड़क पर दोनों तरफ नालियों पर पूरी तरह से व्यापारियों ने कब्जा कर रखा है। 

    ट्रांसफार्मर, हैंडपंप और बिजली के पोल भी अवरोधक 

    शहरी विकास मंत्री ने मॉडल रोड पर अवरोधक बने बिजली के ट्रांसफार्मर, बिजली के पोल, पेड़, हैंडपंप हटाने के निर्देश दिए थे। मगर, छह किमी क्षेत्र में 30 से ज्यादा बिजली के पोल, छह ट्रांसफार्मर, तीन हैंडपंप फुटपाथ के बीचोंबीच बनाए गए हैं। नाली और फुटपाथ बनाते समय इनको अन्यत्र शिफ्ट करने पर विचार भी नहीं हुआ। 

    मांगा गया दोबारा एस्टीमेट 

    जिलाधिकारी देहरादून एसए मुरूगेशन के मुताबिक, मॉडल रोड की नाली और फुटपाथ का अधिकांश काम पूरा हो गया है। कुछ स्थानों पर रेलिंग का काम अटका है। बजट कम पडऩे से दोबारा एस्टीमेट मांगा गया है। निर्माण की गुणवत्ता में यदि शिकायत मिली तो जांच कराई जाएगी। 

    मॉडल रोड पर एक नजर

    विभाग----------------------दूरी-----------बजट 

    लोनिवि प्रांतीय खंड------01 किमी----दो करोड़

    लोनिवि निर्माण खंड-----03 किमी----चार करोड़ 

    एनएच देहरादून-----------02 किमी----तीन करोड़ 

    गांधी रोड पर कब्जों की भरमार 

    प्रिंस चौक से दर्शनलाल चौक के बीच गांधी रोड पर दिन और रात कब्जा हो रखा है। यहां कई दुकानें सड़क तक सजी रहती हैं। इससे दिनभर यहां जाम लगा रहता है। रात दो बजे तक यहां होटल, दुकानें फुटपाथ पर सजाई जाती हैं। एसएसपी और डीएम ऑफिस से कुछ दूरी पर ही यह हाल होने के बावजूद अधिकारी कार्रवाई को तैयार नहीं है।

    अनदेखी पर होई कार्रवाई 

    शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के अनुसार, मॉडल रोड के बाद शहर की सड़कें चौड़ी हुई हैं। फुटपाथ और नाली पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। नगर निगम को भी इस तरफ ध्यान देना होगा। यदि अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। सरकार शहर को सुंदर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। जल्द कुछ नए प्रोजेक्ट भी शुरू होने वाले हैं। इसके भविष्य में अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे। 

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