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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 13, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब बस्ते के बोझ से मिलेगा छुटकारा, टैबलेट से होगी पढ़ाई

By Raksha PanthariEdited By:
Published: Tue, 13 Feb 2018 02:03 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 13 Feb 2018 09:12 PM (GMT+05:30)

अब स्कूली बच्चों को बस्ते के बोझ से छुटकारा मिलेगा। केंद्र सरकार की पहल पर अब बच्चों को पढ़ार्इ के लिए टैबलेट दिए जाएंगे।

अब बस्ते के बोझ से मिलेगा छुटकारा, टैबलेट से होगी पढ़ाई
अब बस्ते के बोझ से मिलेगा छुटकारा, टैबलेट से होगी पढ़ाई

देहरादून, [जेएनएन]: स्कूली बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने के लिए केंद्र सरकार ने खास पहल की है। इसके तहत बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा पद्धति से जोड़ा जा रहा है। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने देश के सभी 25 रीजन से एक-एक केवि को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसके लिए चुना है। देहरादून में केवि-1 हाथीबड़कला को इसके लिए चुना गया है। केंद्रीय विद्यालय संगठन देहरादून संभाग के उपायुक्त सौमित श्रीवास्तव ने स्कूल के कक्षा आठ के 124 विद्यार्थियों को टैबलेट वितरित किए। 

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया और डिजिटल इंडिया के तहत ई प्रज्ञा कार्यक्रम के अंतर्गत ये टैबलेट बांटे जा रहे हैं। जिसका उद्देश्य शिक्षकों और छात्रों को डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त बनाना हैं। आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए किताबों की हार्ड कॉपी पर निर्भरता घटाकर ई-बुक्स को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा इस टैबलेट में कक्षा आठ के सभी विषयों का पाठ और वीडियो शामिल हैं। 

वहीं प्रधानाचार्य इंद्रजीत सिंह ने कहा कि ई प्रज्ञा कार्यक्रम से डिजिटल इंडिया की मुहिम तेज होने के साथ साथ ये कैसी लाचारी है बस्ता मुझसे भारी है के मुहावरे से मुक्ति मिलेगी। टैबलेट प्राप्त करने वाली छात्रा रितिका चौहान ने कहा इस टैबलेट से हम घर पर अपने पाठ्यक्रम पर आधारित पाठ का वीडियो देखकर अपने ज्ञान को और बढ़ा सकेंगे। 
टैबलेट की होगी मॉनिटरिंग 
बच्चों को टैबलेट पर गलत कंटेट को देखने से रोकने और सही पढ़ाई कराने के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन लगातार नजर रखेगा। इसके लिए संगठन ने समय-समय पर टैबलेट से पढ़ाई की रिमोट मॉनिटरिंग की योजना तैयार की है। टैबलेट को एमडीएम(मल्टी डिवाइस मैनेजमेंट) से जोड़ा जाएगा। इससे न केवल बच्चों पर नजर रहेगी। बल्कि शिक्षकों ने भी पढ़ाई के लिए टैबलेट का कितना प्रयोग किया इसका पता चलेगा।