देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश के हर जिले में एक-एक सरकारी डिग्री कॉलेज को मॉडल कॉलेज बनाया जाएगा। शासन ने उच्च शिक्षा निदेशक से चालू माह नवंबर में ही इस संबंध में प्रस्ताव मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। इन कॉलेजों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित होंगे, जबकि पढ़ाई स्मार्ट क्लास के माध्यम से होगी। इसके साथ ही विद्यालयी शिक्षा की तर्ज पर सरकारी डिग्री कॉलेजों में भी स्नातक व स्नातकोत्तर परीक्षा पास करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा। 

उत्तराखंड में केंद्र सरकार की मदद से हरिद्वार जिले के रसूलपुर और ऊधमसिंहनगर जिले के किच्छा में सरकारी डिग्री कॉलेजों को मॉडल कॉलेज के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इन दोनों ही मॉडल कॉलेजों के नए भवनों के निर्माण के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है। केंद्र से मिली मदद से उत्साहित राज्य सरकार की योजना अब प्रत्येक जिले में एक-एक मॉडल कॉलेज स्थापित करने की है। 

शासन स्तर पर बैठक में निर्णय लिया गया कि नैनीताल जिले में हल्द्वानी कॉलेज, बागेश्वर जिले में बागेश्वर कॉलेज, अल्मोड़ा जिले में रानीखेत कॉलेज, पिथौरागढ़ में पिथौरागढ़ कॉलेज, चंपावत जिले में चंपावत कॉलेज, ऊधमसिंहनगर जिले में काशीपुर कॉलेज, पौड़ी जिले में कोटद्वार कॉलेज, चमोली जिले में कर्णप्रयाग कॉलेज, उत्तरकाशी जिले में उत्तरकाशी कॉलेज, रुद्रप्रयाग जिले में अगस्त्यमुनि कॉलेज, देहरादून में डाकपत्थर कॉलेज, टिहरी जिले में नई टिहरी कॉलेज और हरिद्वार जिले में लक्सर कॉलेज को मॉडल बनाने की योजना है। 

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उच्च शिक्षा प्रभारी सचिव अशोक कुमार ने बताया कि उक्त मॉडल कॉलेजों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम, शोध, ई-लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास, शिक्षकों के लिए आवासीय कॉलोनी, काउंसिलिंग सेल की स्थापना और शिक्षकों के पदों को पूरी तरह भरने की व्यवस्था रहेगी। अब शासन ने उच्च शिक्षा निदेशालय को मॉडल कॉलेजों के संबंध में विस्तृत प्रस्ताव देने के लिए नवंबर माह की डेडलाइन तय कर दी है।

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उन्होंने बताया कि सरकारी डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर भर्ती को जल्द राज्य लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजा जाएगा। इस संबंध में उच्च शिक्षा निदेशक को कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। 

उन्होंने कहा कि रिक्त पदों की संख्या 300 से अधिक हो सकती है। सरकारी कॉलेजों में विज्ञान प्रयोगशाला उपकरणों व रसायन विज्ञान के लिए आवश्यक सामग्री की खरीद और ई-लाइब्रेरी या ई-ग्रंथालय की स्थापना को धनराशि की मांग का प्रस्ताव शासन को देने को कहा गया है।

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