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    उत्तराखंड में ई-सिगरेट और ई-हुक्का पर लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, इन बीमारियों की हैं जड़

    By Raksha PanthariEdited By:
    Updated: Tue, 24 Sep 2019 03:32 PM (IST)

    राज्य में ई-सिगरेट और ई-हुक्का पर सरकार पूर्ण प्रतिबंध लगाने जा रही है। इसके बाद प्रदेश में ई-सिगेरट और ई-हुक्का की बिक्री वितरण भंडारण और विज्ञापन पर ...और पढ़ें

    उत्तराखंड में ई-सिगरेट और ई-हुक्का पर लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, इन बीमारियों की हैं जड़

    देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड में ई-सिगरेट और ई-हुक्का पर प्रदेश सरकार पूर्ण प्रतिबंध लगाने जा रही है। इसके बाद प्रदेश में ई-सिगेरट और ई-हुक्का की बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। सोमवार को केंद्र सरकार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये राज्यों को ई-सिगरेट का इस्तेमाल रोकने के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए। 

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    बता दें, केंद्र सरकार ने ई-सिगरेट और ई-हुक्का पर प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्र की गाइडलाइन के आधार पर प्रदेश सरकार ने भी उत्तराखंड में इन पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की है। जल्द ही इसे लेकर आदेश जारी किए जाएंगे। दरअसल, ई-सिगरेट में निकोटिन की भारी मात्रा होने के कारण इसके इस्तेमाल से छाती, फेफड़े, दिल और दिमाग पर बुरा असर पड़ रहा है।

    यहां तक कि जो व्यक्ति साधारण सिगरेट नहीं पीता है, यदि वह ई-सिगरेट पीने वाले के बगल में है तो उसके स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ सकता है। खास तौर पर ई-सिगरेट की लत युवा पीढ़ी में ज्यादा बढ़ रही है। अपर सचिव स्वास्थ्य अरुणेंद्र सिंह चौहान के अनुसार केंद्र ने ई-सिगरेट को प्रतिबंध करने के लिए गाइड लाइन जारी कर दी है। इसी तर्ज पर प्रदेश भी ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी किए जाएंगे। 

    क्या है ई-सिगरेट? 

    ई-सिगरेट बैटरी से चलने वाले ऐसी डिवाइस है जिनमें लिक्विड भरा रहता है। यह निकोटिन और दूसरे हानिकारक केमिकल्स का घोल होता है। जब कोई व्यक्ति ई-सिगरेट का कश खींचता है तो हीटिंग डिवाइस इसे गर्म करके भाप में बदल देती है। इसीलिए इसे स्मोकिंग की जगह वेपिंग कहा जाता है। 

    दिल की बीमारी का खतरा 

    ई-सिगरेट में निकोटिन की मात्रा भले ही कम हो लेकिन इसमें मौजूद फ्लेवरिंग से ब्लड वसेल के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। 

    निकोटिन की लत 

    ई-सिगरेट में निकोटिन और दूसरे हानिकारक केमिकल्स का घोल होता है। निकोटिन अपने आप में ऐसा नशीला पदार्थ है, जिसकी लत लग जाती है। इसलिए विशेषकर हृदय रोगियों को ई-सिगरेट से दूर रहना चाहिए। वैज्ञानिक शोध में यह कहा गया है कि यह दिल की धमनियों को कमजोर भी करता है। इसकी लत पड़ जाती है, इसलिए इसे छोडऩे पर विदड्रॉल सिंड्रोम और डिप्रेशन की समस्या हो सकती है। 

    गर्भवती के लिए नुकसानदायक 

    गर्भवती महिलाओं केलिए वेपिंग बहुत खतरनाक है। इससे उनके गर्भस्थ शिशु पर बुरा असर पड़ता है। छोटे बच्चों के आसपास इसे पीना ठीक नहीं, क्योंकि हानिकारक भाप उनके दिमागी विकास पर असर डालती है। 

    खुशबूदार केमिकल से कैंसर की आशंका 

    इसमें निकोटिन के अलावा जो खुशबूदार केमिकल भरा होता है। वह गर्म होने पर सांस के साथ फेफड़ों में जाता है और फेफड़ों के कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। 

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    दिखावे के लिए पीते हैं युवा 

    एक सर्वे के मुताबिक ज्यादातर युवा ई-सिगरेट का सेवन दिखावे के लिए करते हैं। कई लोगों को ऐसा लगता है कि ई-सिगरेट के नुकसान कम हैं, इसलिए वे इसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन हकीकत ये है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट भी सेहत के लिए कई तरह से नुकसानदेह है। 

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