देहरादून, निशांत चौधरी। वाह रे आबकारी विभाग। एक तो 30 घंटे बाद जागे, ऊपर से कार्रवाई भी ऐसी की जो किसी के गले नहीं उतर रही। एक तरफ आबकारी विभाग ने आनन-फानन अपनी ही शराब के सैंपल भरकर जांच के लिए भेजे, दूसरी तरफ शहर में देशी व अंग्रेजी शराब की दुकानें बंद करा दीं। लेकिन, बंद कराई दुकानों को सील नहीं करने पर भी आबकारी की कार्रवाई सवालों के घेरे में रही। बता दें कि बीते रोज देहरादून में जहरीली शराब पीने से छह की मौत हो गई, जबकि तीन बीमार हैं। उनका इलाज चल रहा है। हालत बिगड़ने पर तीनों बीमारो को देर रात ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया। 

नेशविला रोड पर जहरीली शराब पीने से गुरुवार से ही मौतों का सिलसिला जारी था, लेकिन आबकारी विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। 30 घंटे बाद नींद से जागने पर भी आबकारी विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया। विभाग द्वारा आनन फानन की गई कार्रवाई भी लोगो के गले नहीं उतर पाई। आबकारी विभाग को शक था कि देशी शराब की दुकानों से ही मिलावटी शराब की बिक्री हो रही है। ऐसे में देर शाम आबकारी ने शहर के सभी देशी शराब की दुकानों व कुछ अंग्रेजी शराब की दुकानों को बंद करा दिया। लेकिन, विभाग ने इन्हें सील करने की जहमत नहीं उठाई।

आबकारी की इस कार्रवाई पर शहर में दबी जुबान में चर्चा है कि आबकारी विभाग ने रातों-रात शराब की दुकानों से मिलावटी शराब को ठिकाने लगाने के लिए समय दे दिया है। हालांकि, जब इस पर जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय से संपर्क किया गया तो उनका तर्क था कि जहां शराब के सेवन करने से मौत हुई हैं, उसके आसपास देसी शराब की दुकान से बिकने वाली शराब की खाली बोतले मिली हैं।

इसे विभाग ने गंभीरता से लेते हुए अपनी ही शराब के सैंपल भरकर जांच के लिए भेजे हैं। इसके अलावा शहर के सभी देशी शराब के ठेके बंद करा दिए हैं। जबकि आसपास के सभी अंग्रेजी शराब के ठेके भी बंद कराए हैं। सैंपल की जांच होने तक संबंधित बैच नंबर की शराब की बिक्री बंद रहेगी।

सुशील कुमार (आबकारी आयुक्त) का कहना है कि सर्कल के आबकारी निरीक्षक सुजात हसन व प्रवर्तन निरीक्षक मनोज फर्त्‍याल को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रधान सिपाही व अन्य सिपाहियों पर भी जल्द निर्णय लिया जाएगा। प्रकरण की जांच जारी है, जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

रुड़की में बेखौफ बिक रहा मौत का सामान

जहरीली शराब से दो राज्यों में हुई करीब डेढ़ सौ मौत के बाद भी पुलिस प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। रुड़की में अब भी बेखौफ मौत का सामान बिक रहा है। वहीं शराब माफिया भी एक बार फिर से सक्रिय हो गए है। इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है। पुलिस भी बस दिखाने के लिए पांच या दस लीटर कच्ची शराब पकड़ अपनी पीठ थपथपा रही है।

आठ फरवरी 2019 को जहरीली शराब पीने से उत्तराखंड के ¨बडू खड़क, बाल्लूपुर, नन्हेड़ा अनंतपुर, जहाजगढ़, लाठरदेवा, साबतवाली, चुड़ियाला समेत करीब दस गांव के 47 लोगों की मौत हो गई थी। एक के बाद एक मौत से प्रदेश में हड़कंप मच गया था। साथ ही, दो लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई थी। उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश में भी जहरीली शराब पीने से करीब 100 लोगों की जान चली गई थी। इतनी मौत होने के बाद ही दोनों राज्यों के अधिकारी हरकत में आए थे।

दून में जहरीली शराब पीने से छह की मौत, कोतवाल, चौकी इंचार्ज व दो आबकारी निरीक्षक सस्‍पेंड

इसके बाद आनन फानन में 13 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। कई जगह छापे मारे गए। लेकिन कुछ दिन तक सख्ती दिखाने के बाद पुलिस प्रशासन के अधिकारी सुस्ताने लगे है। अधिकारियों की इसी सुस्ती के चलते जिले में इस समय कच्ची शराब की भट्टी चल रही है। शराब माफिया फिर से सक्रिय हो रहे है। उप्र के कई शराब माफिया उत्तराखंड में भी कच्ची शराब की तस्करी में लगे क्षेत्र के लोग भी अधिकारियों को लगातार अवैध शराब की बिक्री की शिकायत कर रहे है। पुलिस और आबकारी टीम के अधिकारी भी पांच से दस लीटर कच्ची शराब पकड़कर खानापूर्ति करने में लगे है।

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Posted By: Sunil Negi

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