अब मिलेग जंगली-जानवरों से सुरक्षा, वन्यजीवों को गांवों में आने से रोकेंगे फाक्स लाइट व एनाइडर
उत्तराखंड में वन्यजीवों के बढ़ते हमलों को देखते हुए वन विभाग ने फाक्स लाइट और एनाइडर लगाने का निर्णय लिया है। फाक्स लाइट रात में चमकती है और एनाइडर आवाज निकालकर वन्यजीवों को दूर रखता है। विभाग ने सभी वन प्रभागों को संवेदनशील गांवों में इन उपकरणों को लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके।

संवेदनशील गांवों के आसपास इन उपकरणों को लगाने के लिए वन प्रभागों को दिए गए निर्देश. Concept
राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीवों के बढ़ते हमलों ने चिंता और चुनौती दोनों बढ़ा दी हैं। इससे निबटने को जरूरी है कि वन्यजीव जंगल की देहरी लांघ आबादी वाले क्षेत्रों में न पहुंचे। इसके लिए अब प्रयास तेज किए गए हैं और वन सीमा से सटे संवेदनशील गांवों के आसपास फाक्स लाइट और एनाइडर लगाने का क्रम तेज किया जा रहा है। फाक्स लाइट एक सोलर सुरक्षा लाइट है, जो रात में तेज चमकती है और वन्यजीव उसके पास नहीं आते। इसी तरह एनाडर सेंसरयुक्त उपकरण है और उसकी परिधि में किसी वन्यजीव के आने पर इससे तेज आवाज निकलती है, जिससे जानवर भाग जाते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में इन उपकरणों को उपयोगी माना जा रहा है।
वन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2000 से अब तक वन्यजीवों के हमलों में 1266 व्यक्तियों की जान जा चुकी है, जबकि 6526 घायल हुए हैं। इस वर्ष की ही तस्वीर देेखें तो वन्यजीवों ने 45 व्यक्तियों की जान ली है, जबकि घायलों की संख्या 493 है। इन दिनों भी गुलदार, बाघ, भालू, हाथी जैसे जानवरों ने विभिन्न क्षेत्रों में नाक में दम किया हुआ है। इसे देखते हुए अब वन्यजीवों और मनुष्य के बीच टकराव थामने के लिए तात्कालिक व दीर्घकालिक उपाय किए जा रहे हैं। इसी क्रम में सौर ऊर्जा से संचालित फाक्स लाइट और एनाइडर लगाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।
क्या है एनाइडर व फाक्स लाइट
एनाइडर को मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिहाज से ही डिजाइन किया गया है। इन्फ्रारेड तकनीक आधारित इस उपकरण में लगे सेंसर की निश्चित परिधि (180 मीटर तक) में किसी वन्यजीव के आने पर इसका स्वचालित अलार्म, सायरन समेत वन्यजीवों को डराने वाली तेज आवाज निकालता है। साथ ही रोशनी कर लोगों को सतर्क करता है। इसके अलावा फाक्स लाइट भी एक तरह की सुरक्षा लाइट है। यह रात में तेजी से चमकती है। इसकी रोशनी आंखों में पड़ने से वन्यजीव वहां का रुख नहीं करते।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को थामने के लिए तकनीकी का उपयोग भी किया जा रहा है। फाक्स लाइट व एनाइडर का उपयोग बेहद कारगर है। इसीलिए सभी वन प्रभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वन सीमा से सटे गांवों के साथ ही संवेदनशील गांवों में इन उपकरणों को लगाया जाए। -आरके मिश्र, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उत्तराखंड
यह भी पढ़ें- पिथौरागढ़ में भालू का आतंक, तड़ाग गांव में चारा पत्ती लेने गई महिलाओं के पीछे दौड़ा
यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में जंगली भालू का खौफ, स्कूल में वन विभाग के सुरक्षा घेरे में पढ़ रहे बच्चे
यह भी पढ़ें- उत्तरकाशी में भालूओं की दहशत...5 माह में किए 11 हमले, अब तक दो की गई जान

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।